Tuesday, February 19, 2008

चोखेर बाली आगंतुक कथा वाया स्टेट काउंटर

कल प्रत्यक्षा ने लिखा था कि आपकी नींद हराम क्यों ? दूसरों के सेट पर डाह क्यों ? आज हम भी कहने वाले हैं यही । नीलिमा जी ने कल पहुँचाए आंकडो का विश्लेषण छापा है । उसे जस का तस छाप रही हूँ ।

चोखेर बाली आगंतुक कथा वाया स्टेट काउंटर

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सराय से मिले पैसे से हम बौद्धि‍क रूप से गुलाम तो खैर हो ही रहे थे :) पर साथ ही साथ एक काम और कर रहे थे (आप चाहें तो मान लें कि ये काम गौण था) यह था शोध करना। इस दौरान आंकड़ों में मतलब आवाजाही वगैरह के, झांकने के काम में कुछ कुछ समझ बनी थी। शायद इसलिए ही सुजाता ने जो चोखेरबाली देखती हैं मुझे आदेश (छोटों के आग्रह भी आदेश होते हैं और बड़ों के आदेश भी सलाह भर:)) दिया कि चोखेरबाली के स्‍टेटकाउंटर आंकड़े देखूं, ये क्‍या कहते हैं...मैंने उस एक्‍सेल फाइल को देखा और कुछ कुछ हैरानी हुई। इससे पहले एग्रीगेटरों के आंकड़ों को देखा था और उन पर पोस्‍ट लिखीं थीं। अपने खुद के ब्‍लॉगों के आंकड़ें देखते हैं और उनपर कोई पोस्‍ट नहीं लिखते :)। पर चोखेरबाली के आंकड़ों में कुछ अलग बात है-





आप कह सकते हैं कि इसमें अलग क्‍या है, आखिर चोखेरबाली एक नया ब्‍लॉग है सिर्फ दस दिन पुराना उस लिहाज से 220 की औसत से पेजलोड कम नहीं है। पर हमारा इशारा उस ओर नहीं है हम कहना चाहते हैं कि पेजलोड और यूनीक विजीटर के बीच का अंतराल देखें।औसत पेजलोड हैं 219 और यूनीक विजीटर औसत 76. इतना अधिक अंतराल सामान्‍यत: एग्रीगेटरों में तो देखा जाता है- मसलन नारद की विवादकालीन आवाजाही में यूनीक विजीटर व पेजलोड के बीच इतना अधिक अंतर था किंतु किसी ब्‍लॉग के लिए ये कुछ सामान्‍य नहीं है।

आसान भाषा में इसका क्या मतलब है ? हमारी अनंतिम सी व्‍याख्‍या इस प्रकार है-

1. सबसे पहली बात तो यह कि सामुदायिक ब्लॉगों और निजी ब्‍लॉगों के ट्रेफिक पैटर्न में अंतर है- अगर मोहल्‍ला और भड़ास या हिन्‍दयुग्‍म के आंकड़ों से तुलना करें तो और बेहतर तस्‍वीर मिले पर प्रथम दृष्‍टया तो लगता है कि सामुदायिक ब्‍लॉग लोग अलग अपेक्षाओं से पढ़ते हैं। पोस्‍ट संख्‍या का अधिक होना भी एक भूमिका अदा करता है।
लेकिन मूल बात जो चोखेरबाली में दिखाई दे रही है वह यह है कि ये वाकई चोखेरबाली है, खटकने वाला ब्‍लॉग...कुछ लोग बार बार वापस आकर देख रहे हैं...हम्‍म क्‍या हुआ...क्‍या हुआ। बाकी जबरदस्‍त इग्नोर मार रहे हैं।
2. क्‍यों झांक रहे हैं बार बार...? मुझे लगता है टिप्‍पणियॉं।। जी संभवत पहली बार ब्‍लॉग में पोस्‍ट से ज्‍यादा आकर्षण टिप्‍पणियों का है, इतना कि टिप्‍पणियॉं ट्रेफिक ला रही हैं।इस ब्‍लॉग पर 'अच्‍छा है' लिखने वाले आमतौर पर नदारद है ( चिट्ठे 'अच्‍छा है' के खिलाफ तो बाकायदा झंडा लिए है, कुछ अच्‍छा नहीं है, हम पतनशीला हैं, बोलो क्‍या कल्‍लोगे) और टिप्‍पणियॉं लंबी हैं विमर्शात्‍मक हैं तल्ख भी हैं।
3. एक अन्‍य अपुष्‍ट बात ये है कि एग्रीगेटरों के स्थान पर चिट्ठासंसार में अब ध्रुवीकरण सामुदायिक ब्‍लॉगों के इर्द गिर्द होने वाला है- इस विषय पर अगली किसी पोस्‍ट में लिखूंगी।
4. जो बात आंकड़ों से नहीं दिख रही वह यह कि इस चिट्ठे को लेकर ही ऐसी विचित्र प्रतिक्रिया क्‍यों है? पर इस बात को समझने के लिए आंकड़ों को नहीं समाज को देखने की जरूरत है। चिट्ठों में स्त्रियों से 'भाभीजी', 'माताजी' खानपान, हे हे हे टाईप लेखन की उम्‍मीद रही है। चोखेरबाली चुभने के लिए आया है और चुभ रहा है।


डिस्‍क्‍लेमर : कमलजी व आलोकजी शेयरटिप्‍स देते हुए लिख देते हैं कि इस कंपनी में लेखक का निवेश हो सकता है...हम भी कहे देते हैं कि यूँ हमने आंकड़ों का ही विश्‍लेषण किया है पर चोखेरबाली के हम भी सदस्‍य हैं।

3 comments:

Anonymous said...

hi sujata
lets not forget that choker balii is an "manch" to highlight issues and problems faced by woman . these things at such an early stage are meaning less and also lets not make it a "blog " to hit and retalite who is wirting where and what . we have our individual blogs to do this . we need to bring more woman who would like to write about problems faced by them . its my personal view point hat we are all here to find a way out on how to improve the condition in our society . dicussions on that issue are awaited but i dont feel that discussions on who came and who did not are meaning less . visitors will come when the content will be thought provoking and written in simple hindi/english understandable by common blogger
with regds
rachna

समयचक्र said...

bhagawan kare ye din jaldee ave

dilip uttam said...

see my site www.thevishvattam.blogspot.com &
hiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii my aim worldpeace is a my life my dream&concentration as a breath to me.it is not a side of money/selfbenifit.i want do socialwork with honesty;not a only working for it but more harderwork.my book A NAI YUG KI GEETA..is completed.This is in hindi languages .nowadays im suffering many problems like.1.publishers says that u have no enough degree&b.tech students is not a enough for it.&who know you in your country/world so they advice me firstly you concentrate for degree because of at this stage nobody read your book but they also said that your book is good. 2.publishers wants to data for publishing the book.means from where points did you write your book but i have no data because of my book is based on my research.book chapter name is. 1.MAHILA AAJ BHI ABLA HAI KYO . 2. AIM PROJECT {AAP APNA AIM KA % NIKAL SAKTE HO }. 3. MY PHILOSPHEY 4.MERA AIM VISHVSHANTI. 5.POETRY. 6.NAYE YUG KI GITA VASTAV MAY KYA HAI. 7. WORLD {SAMAJ} KI BURAIYA. 8. VISHV RAJ-NITE. ALL THESE CHAPTER COVERD BY ME. 3.max. people told me that firstly u shudro than worry others. they told me now a days all lives for own .why u take tansen for world . i cant understands thease philoshpy. according to my philoshpy in human been charcter; huminity; honesty; worlrpeace &do good work. i have two problem 1. DEGREE. 2. LACK OF MONEY because my parents told me your aim is not any aim &u tents to many difficulties. PLEASE ADVICE ME. IF U CAN GIVE ME YOUR POSYAL ADDRESS &PHONE NO. THAT WILL BE GOOD . THANKS. " JAI HINDAM JAI VISHVATTAM " THANKS.

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