Friday, February 29, 2008

हां, मेरा नं. यही है

भड़ास पर हिज हाइनेस हिंजड़ा मनीषा के गुरु रूपेश श्रीवास्‍तव ने मेरा मोबाइल नं. सार्वजनिक किया है और यशवंत सिंह ने उसका पुरजोर समर्थन भी किया है। जानकारी के लिए बता दूं कि वह मेरा ही नं. है और बिल्‍कुल सही है।

आदिकाल से मर्दों को लगता आया है कि किसी स्‍त्री के आत्‍म-सम्‍मान को कुचलने या उसकी अस्मिता को ठेस पहुंचाने का ये सबसे शानदार तरीका है कि उसके शील पर ऊंगली उठाओ, सार्वजनिक रूप से उसका मान-मर्दन करो, ज्ञान और बुद्धि में उसका मुकाबला न कर सको तो अपने मर्द होने का फायदा उठाओ और उसके स्‍त्री होने का। किसी स्‍त्री को इमबैरेस फील करवाने का इससे बेहतर तरीका और क्‍या हो सकता है कि आप भरे चौराहे उसका दुपट्टा खींचे, उसके मुंह पर तेजाब फेंके, उसका बलात्‍कार करवाएं, उस पर अश्‍लील टिप्‍पणियां करें।

संजीत त्रिपाठी और मसिजीवी ने आगे बढ़कर मेरे मो. नं. को इस तरह सार्वजनिक किए जाने का विरोध किया है। मैं उनकी शुक्रगुजार हूं। लेकिन दोस्‍तों, मैं इस तरह के मानसिक संत्रास और स्‍त्री होने का एहसास कराए जाने वाले मर्दवादी तरीकों से बहुत ऊपर उठ चुकी हूं। अगर उन्‍हें यह लगता है कि मेरा नं. सार्वजनिक करने और चार छिछोरे लोगों का फोन आने से मैं डर जाऊंगी, दुखी हो जाऊंगी, घर में मुंह छिपाकर रोऊंगी, तो वे गलती पर हैं। ऐसे लोगों से निपटना मुझे खूब आता है, इसलिए कीड़े-मकोडों से बजबजाती इस दुनिया में सिर उठाकर जी रही हूं।

28 comments:

Ashish Maharishi said...

ब्‍लॉग के गिरते स्‍तर ने यह सोचने पर विवश कर दिया है कि इस गंदगी में रहना कितना उचित है

Priyankar said...

कोई बात नहीं . कोई उल्टा-पुल्टा फोन आएगा तो उसका भी उपचार किया जाएगा .

काकेश said...

हमने भी विरोध दर्ज करवाया था.

आपके साहस की प्रसंशा करता हूँ.मुझे भी अपने साथ ही मानें.

Sanjeet Tripathi said...

मैं किसी के साथ हूं यह कहने लायक हूं नही दर-असल मैं।
फिलहाल अब आपसे यह निवेदन है किइस पोस्ट से अपना मोबाईल नंबर अब आप भी हटा लें!
भड़ास वाली पोस्ट से आपका नंबर हटाया जा चुका है।

Ashok Pande said...

यू आर अ बिग बिग गर्ल इन अ बिग बिग वर्ल्ड मनीषा. सो यू वुड हैव टु फ़ाइट इट आउट. दे'फ़ोर द ऑप्शन ऑव सेइंग: "सो वॉट!" इज़ ऑलवेज़ देयर. वी आर विद यू. आइ रिपीट: "डोन्ट्यू वरी".

PD said...

Main abhi tak bas baith kar sabhi ka paksh dekh rahaa tha.. lekin aapke is posting ko padh kar pata nahi kyon gussa aaya aur apne upar kheej bhi hui ki maine kyon bhadas join kar rakha tha..

सुशील छौक्कर said...

लगता नही कि हम ब्लॉग कि दुनिया में है सोचता था इस दुनिया में आने से पहले कि ब्लॉगर अच्छे और पढे लिखे समझदार होंगे एक नई सोच और नये विचार जन्मे लेंगे. पर अफ़सोस हम अब भी ११ सदी में ही है | फ़ोन नम्बर जग जाहिर करके बहुत बहादुरी का काम किया है?बदलाव सोचने वालो को हमेशा पत्थर ही मिले है आप लिखती रहो.

अजित वडनेरकर said...

आपने अपनी बात अच्छी तरह से कही है मनीषा। आपके तेवर और विचारों की हम क़द्र करते हैं बस, गुजारिश है कि संजीत का सुझाव मानकर अपना नंबर यहां से हटा लें। सभी एक से नहीं होते। ज्यादातर आपके साथ हैं।
सचमुच ब्लागिंग को जारी रखूं या नहीं , यह सोचना पड़ रहा है। भड़ास को बढ़ावा देने से वालों को क्या कमी नज़र आ रही थी हमारे समाज में ? अजीब है कि उसे बैन करने की पहल भी उन्हें ही करनी पड़ी और आलोचना की भी।

Anonymous said...

manisha
we all are with you but remove your personal number from this post and go ahead with leagal proceddings against any blog who puts in your personal infomation on the blog
its an offence and cyber police will help you i have the snap shot of the same

चंद्रभूषण said...

यह टिप्पणी बस इतना याद दिलाने के लिए अपनी एक छोटी सी गलती- अविनाश बाबू के आगे अपना दुखड़ा रोने- के चलते आप इतने बड़े वितंडा की मोहरा भर बनकर रह गई हैं। यह कहां की अक्लमंदी है कि मेरे साथ फलां ज्यादती हो रही है, लेकिन मैं इसपर बोल नहीं सकती, लिहाजा हे लोकतंत्र के महानायक, उठो और मेरी जंग लड़के दिखाओ। तो लीजिए, नायक जी उठे और एक चवन्नी छाप महाभारत संपन्न हुआ। इससे मोहल्ला और भड़ास की बेहतर कमाई का आगम बनेगा और आपको तीन-चार दिन बिला वजह के मानसिक कष्ट में गुजारने पड़ेंगे। बाकी इससे कुछ नहीं होने वाला। और अगर हो तो भी मेहरबानी करके किसी से कहने मत आइएगा, खींच के चार चप्पल धर दीजिएगा, सबकुछ तुरंतै ठीक हो जाएगा।

दिनेशराय द्विवेदी said...

Manisha, Aapako Salam! I am at sehore and will reach kota on sunday.But I am feeling bad by this episode. I think if we want death of a thing than we must ignore that. Papi ko marane ko pap mahabali hai.

Ankit Mathur said...

Its definitely something which should be condemned. No personal information should be published any where without your prior consent.
Its Bad.

अनिल रघुराज said...

मनीषा जी, इन चिरकुटानंदों और अवसरवादियों का चेहरा नोचना ज़रूरी है। डटे रहिए। हम सभी आपके साथ हैं।

Unknown said...

मनीषा जो भड़ास में हुआ गलत है.....पर इसे सुलझाने का क्या यही तरीका है...
मैं चंद्रभूषण जी से सहमत हूँ,
इससे मोहल्ला और भड़ास की बेहतर कमाई का आगम बनेगा और आपको तीन-चार दिन बिला वजह के मानसिक कष्ट में ....

बहरहाल मो नं की बात गंभीर है और ऐसी बहस करें ना करें ....जायज़ शिकायत सही जगह पर दर्ज करा कर न्याय की कोशिश करनी चाहिये।

अनुनाद सिंह said...

मनीषा जी,

मुझे बहुत कानफ़्यूजन हो रहा है।

पहले आप कहती थीं कि 'हम लड़कियाँ पतनशील होना चाहती हैं' । यदि ये सही है तो भड़ास वाले तो आपको और अधिक पतनशील बनाने में मदद ही कर रहे हैं! आप को दुख काहे हो रहा है, यही समझ नही पा रहा हूँ?

Neeraj Rohilla said...

मनीषाजी,
भडास के द्वारा आपका नम्बर सार्वजनिक करना अत्यन्त निंदनीय है |

स्वप्नदर्शी said...

मैं चंद्रभूषण जी से सहमत हूँ.
I condemn Bhadas, but this is not the way. Apani laDaaee thodee bahut khud bhee ladanee chaahiye.

it would have been more appropriate that chokher bali should have taken more aggressive stand and have replied to Bhadas.

I appreciate irfaan for removing his patansheel post.


Avinash has to remove all nude images of womens, in whatever context they appear in mohalla, before he can advocate on your behalf, and condemn Bhadas.




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अनूप भार्गव said...

मेरा सुझाव यह होगा कि ’चोखेर बाली’ पर ’comments' को कुछ समय के लिये ’under moderation' कर दिया जाये ।
अगर प्रतियोगिता इस बात की हो रही है कि कौन कितना नीचे गिर सकता है (No Pun Intended :-), तो आप ’भडास’ से नहीं जीत सकते । आप जितना अधिक उन के बारे में लिखेंगे , वह उतना ही ज्यादा नीचे गिरेंगे और फ़िर एक समय ऐसा आयेगा जब आप के पास उनके स्तर पर उत्तर देने के लिये शब्द नहीं बचेंगे । यही उन का उद्देश्य है, यही उन की रणनीति है । Don't fall for it, Just Ignore it. More you talk about them, more you are helping them.
हाँ अगर उन की कोई हरकत गैर कानूनी या बहुत ही गलत लगे तो बात मत कीजिये, सीधा कदम उठाइये ।

Sanjeet Tripathi said...

गुड!!!
चंद्रभूषण जी की बात से पूरे तौर पर सहमति है!!

डा० अमर कुमार said...

किसी अप्रिय प्रकरण को तूल देकर उसका महत्व न
ही बढ़ायें । वह हाँका लगा रहे हैं, और अपने मंतव्य
में सफ़ल होने के अनुमान से झूम रहे होंगे ।
Just ignore the whole issue and
let them live in oblivion !

ghughutibasuti said...

हम्म! क्या कहूँ समझ नहीं आता । आज भी सब जगह वे ही भेड़िये बैठें हैं जो मेरे समय में थे । शायद वे तब भी होंगे जब मेरी नातिनें इस संसार में जीने की कोशिश करेंगी ।
घुघूती बासूती

रिपुदमन पचौरी said...

मतलब कि यह तो हद हो गई .... बडे़ ही जाहिल लोग हैं ये तो।

कमेन्ट को मोडरेट करने से क्या होगा। बिना मोडरेशन के ही चलने दें।

Shiv Kumar Mishra said...

आदरणीय मनीषा जी,

अगर किसी ने आपका सेल न. अपने ब्लॉग पर सार्वजनिक कर दिया है तो क्या केवल इसलिए कि वह एक मर्द है? क्षमा कीजियेगा, लेकिन ये बात कितनी सही है, उसपर एक बार विचार कीजियेगा. हमलोग व्यक्तिवादी क्यों नहीं हो सकते? आपको किसी ने ठेस पहुँचाई तो क्या केवल इसलिए कि वह एक मर्द है? आप ये क्यों नहीं लिख सकतीं या कह सकतीं कि वह एक बुरा इंसान है. मेरे विचार से यह एक बुरे इंसान द्वारा एक अच्छे इंसान के ख़िलाफ़ की गई साजिस है न कि एक मर्द द्वारा एक औरत को जलील करने का प्रयास. और यह साजिस इसलिए कि अच्छे लोगों से बुरे लोग हमेशा डरते ही हैं.

अगर आपके लिखे गए वाक्य को मान लिया जाय तो फिर इस बात पर सवाल किया जा सकता है कि बाकी के जितने ब्लॉगर आपके समर्थन में खड़े हुए हैं (जो कि बहुत ही अच्छी बात है क्योंकि अनय का विरोध करना हर इंसान का कर्तव्य है) उनमें से क्या कोई मर्द नहीं है?

आप को अगर मेरी बात बुरी लगे तो क्षमा कीजियेगा लेकिन ये भाषा उन पत्रकारों की भाषा से मिलती-जुलती है जो किसी न्यूज़ की हेडलाइन में लिखने से नहीं हिचकते कि "ट्रेन ने एक दलित को कुचला" जैसे दलित एक इंसान नहीं होता.

आपके साहस की प्रशंसा करता हूँ कि आपने खुले तौर पर विरोध जताया. आपके इस साहस बहुत सारे और लोगों को बल मिलेगा.

अनूप भार्गव said...

रिपुदमन:
कमेन्ट्स को मौडरेट करने से यही होगा कि जो गन्दगी आज ’भडास’ में है वह अपना मूँह यहां भी दिखा सकती है । गन्दगी अगर बाज़ार में हो तो उस से बच कर चला जा सकता है लेकिन घर में अगर आ जाये तो उसे ’इग्नोर’ करना मुश्किल होता है ।

डा० अमर कुमार said...

श्री शिव कुमार जी के दृष्टिकोण से मैं भी सहमत हूँ, कि मुद्दों को लड़ाई में स्त्री-पुरुष का विभेद किसी
भी कोण से तर्कसंगत नहीं है । ग़लत ग़लत है,
और सही हमेशा सही ही रहेगा । इसको मनवाने के लिये पुरुष होना या स्त्री होने की दुहाई देना क्लुछ वाज़िब नहीं लगता ।

travel30 said...

@आशीष said... @ Aashish ji dukhi mat hoiye mujhe to pahle hi pata tha ki hindi blogs mein yeh hoga jarur hoga

dilip uttam said...

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sanjeev persai said...

भडास बेलगाम हो चुका है
सोचो क्या करना है

अनुप्रिया के रेखांकन

स्त्री को सिर्फ बाहर ही नहीं अपने भीतर भी लड़ना पड़ता है- अनुप्रिया के रेखांकन

स्त्री-विमर्श के तमाम सवालों को समेटने की कोशिश में लगे अनुप्रिया के रेखांकन इन दिनों सबसे विशिष्ट हैं। अपने कहन और असर में वे कई तरह से ...