Tuesday, March 11, 2008

कन्या शिक्षण से जुडी कुछ बातेँ



लावण्य़ा शाह
स्वतँत्र भारत मे कन्या शिक्षण की दिशा मे काफी प्रगति हुई है परँतु अभी कई क्षेत्रोँ मे विकास होना शेष है।कन्या शिक्षा को प्रोत्साहन देने से लेकर, कन्याओँ का स्कूलोँ मेँ और कोलेजोँ मेँ दाखिला होने से लेकर, स्कूल व पाठ्यक्रम से जुडे रहने मेँ सहायता और स्थिरता भी प्रमुख मुद्दोँ मेँ से कुछ हैँ .

समाज के उन तबक्कोँ मेँ कि, जहाँ कन्या शिक्षा के प्रति उदासीनता व बाधाएँ आडे आतीँ हैँ उनके प्रति भी सरकार प्रयाप्त मात्रा मेँ , ध्यान देते हुए, व्यवस्थाओँ को सुद्रढ करने का परिश्रम सुनियोजित तरीके से करने मेँ सँलग्न है.

भारतीय गणतँत्र स्त्री शिक्षा, तथा, स्त्री नागरिकोँ के हक्कोँ के प्रति जागरुक भी है. कई सारे व्यवधानोँ तथा सामाजिक परिस्थितियाँ जहाँ पुरुष प्रधान समाज के अपने दबाव हैँ उनके बावजूद, बदलाव , व्यवस्था तथा प्रयास जारी हैँ जिन्हेँ कानूनी धाराओँ के तहत भी सँबल प्राप्त है.

कई प्रणालियाँ, नवीन कार्यक्रम, अवधारणाओँ को कार्यान्वित किया गया है.

जिनका लक्ष्य, कन्या शिक्षा की परिवर्तित स्थितीयोँ मेँ सुधार किया जाना रहा है.

सर्व शिक्षा अभियान एक ऐसा ही कार्यक्रम है।

जिसका प्रमुख अँग है --the Universalisation of Elementary Education (UEE)

सर्व शिक्षा अभियान SSA जिसे २००१ से शुरु किया गया है -यह एक बहु- महत्त्वाकाँक्षी., कन्या वर्ग के बहुआयामी विकास को केन्द्र मेँ रखकर , कन्याओँ के स्कूल जाने से, कन्या छात्राओँ को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा हासिल हो पाये, वैसे प्रयास से लेकर , स्त्री के पुरुषोँ से बराबरी के व्यवहार को सच करने के प्रयास हैँ -

जिसके तहत कुछ इस प्रकार के मुद्दोँ के निर्णय, पारित किये गये हैँ

१) कक्षा ८ तक कन्या छात्राओँ को मुफ्त पाठ्यक्रम की पुस्तकोँ का वितरण

२)कन्या छात्राओँ के लिये अलग शौचालयोँ की वयवस्था
३) जो कन्याएँ स्कूल नहीँ जातीँ उनके लिये, शिबिरोँ का आयोजन
४) ५०% महिला शिक्षिकाओँ का चयन व आराक्षण
५) शिशुवस्था मेँ कन्याओँ की देखभाल के लिये स्कूलोँ के समीप शिक्षा देने का प्रबँधन व ठोस प्रयास
६) महिला शिक्षिकाओँ को विशेष ट्रेँनीँग
७) कन्या शिक्षा के प्रमुख सवालो व निराकरण को बयान करती खास निर्देशिकाओँ का ,वितरण
८) समाज के हर स्तर को कन्या शिक्षा के प्रति जोडना तथा इस का प्रचार करने की पहल
९) हर प्राँत, हर तहसील हर गाँव मेँ कन्या छात्रओँ के दाखिले तथा स्कूल मेँ पूरी शिक्षा मिले ऐसे जुडे प्रवधानोँ के लिये खास धन की व्यवस्था

इन सारे मुद्दोँ के अलावा माता , पिता समाज व कन्या छात्राओँ के सहकार तथा रस लेकर , भाग लेने के लिये ठोस प्रयास भी जारी हैँ जिसके बाद कन्या छात्राओँ की प्रगति पर भी निगरानी रखी जाती है कि जससे प्रयासोँ की सफलता का सही सही अँदाज लगाया जा सके.

ये कुछ प्रयास हैँ जिनकी आशिँक सफलता का भारत सरकार ,उत्साह से, आशाएँ सँजोये , रास्ता देख रही है -

-हमारी शुभ कामना है कि ये सारे सराहनीय प्रयास, सफल होँ --

-- लावण्या

10 comments:

मनीषा पांडे said...

Good

ghughutibasuti said...

अभी तो हम गुजरात में अध्यापन ट्रेनिंग की छात्राओं के उनकी ही संस्थाओं में शोषण के समाचारों से उबर नहीं पा रहे हैं । इस सबके बाद नए सत्र में कितनी छात्राएँ यहाँ दाखिला लेंगी देखना है ।
घुघूती बासूती

Anonymous said...

bahut khub manisha pandey kii post aur manisha pandey ka hii comment
lavanya jii kii post hae yaa manisha pandey kii kuch pataa nahin chal rahaa
aur ab toh confusion he confusion ho rahaa hae manisha pandey kae naam mae

मनीषा पांडे said...

केवल सच जी, कन्‍फ्यूज न हों। पोस्‍ट डाली मैंने जरूर है, लेकिन है लावण्‍या जी की। ये पोस्‍ट कई दिनों से ड्राफ्ट में पड़ी थी और पब्लिश करने पर भी सबसे नई पोस्‍ट की तरह नहीं, बल्कि पीछे जाकर पब्लिश हो रही थी। टेकनीक के मामले मं में अनाड़ी हूं। सो मेरे पास कोई और रास्‍ता नहीं था कि मैं उसे डिलिट करके फिर से नई पोस्‍ट के रूप में डालती। कम्‍प्‍यूटर मेरे लॉजिक से तो चलता नहीं, वो अपने लॉजिक से ही चलेगा। सो लिखा भले लावण्‍या जी ने था, नाम उसने मेरा ही लिया। माफी चाहती हूं, अपने अनाड़ीपन के लिए। ऐसी समस्‍या होने पर क्‍या किया जाए, अगर कोई तकनीक गुरु राह सुझाएंगे तो आभारी रहूंगी।

इष्ट देव सांकृत्यायन said...

मुश्किल यह है कि जो भी तरक्की हो रही है वह सिर्फ़ मात्रात्मक है और सिर्फ़ एक छोटे से तबके तक ही सीमित है. बात तो तब बने जब यह गुणात्मक हो और इसका लाभ सब तक पहुंचे.

अनूप भार्गव said...

शिक्षा, चेतना और जागरुकता ही उपाय हैं । हम सब अपने स्तर पर छोटा ही सही लेकिन इस दिशा में कदम तो उठायें तो शायद बात बने ।

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

आप सभी की टिप्पणीयों के लिए
बहुत बहुत आभार !

siddheshwar singh said...

बहुत अच्छा

अजित वडनेरकर said...

बहुत अच्छा ।

KAMLABHANDARI said...

sarkar kannyao ke liye kai yognaye nikalti hai pur phir bhi aaj aadhe se jyada kannyaye "anpad" hai kyu?
me batati hu -kyuki sarkar sirf yognaye nikalti hai baaki saara kaam dusro par chor deti hai.aur dusre sirf apni jebe bharna hi jante hai unhe kanya siksha se koi matlab nahi hai,kyuki unki kannyaye to acche collego me padh rahi hai . to kyu uthaye wo dusri ke liye kast.unka to hai bas yahi nara -ram-nam japna ,paraya maal apna.

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