Tuesday, May 13, 2008

औरत ऐसी भी होती है क्या

मैं आपका ध्यान एक ऐसी घटना की और दिलाना चाहता हूँ जिस ने घटना शेत्र के लोगों को अन्दर तक दहला दिया है. मैंने भी जब इस के बारे में सुना तो अन्दर तक दहल गया. इस घटना का मुख्य पात्र एक नारी है जो आज समाज की आँख की किरकिरी बन गई है. यह नारी अशिक्षित नहीं है. उसने अंग्रेजी में एम् ऐ किया है. उसके पिता ने अपनी इस एकलौती बेटी को बेटों जैसा प्यार दिया. शिक्षा पूरी होने पर उसे एक स्कूल में अध्यापिका की जाब दिला दी. कोई भेद भाव नहीं. कोई बन्धन नहीं. उसके मुहं से 'बाबा' सुनते वह दौड़े आते. उस की हर फरमाइश पूरी करते. बेटी की आँख में एक आंसू भी उन्हें दुखी कर देता.

यह नारी थी - अथाह प्यार करने वाले माँ-बाप की बेटी, दो प्यार करने वाले भाइयों की बहन, एक प्यार करने वाली भाभी की ननद, एक प्यारे भतीजे की बुआ, एक ममेरी बहन की दीदी. एक भाई अपनी पत्नी और बेटे के साथ शहर में नौकरी करता. दूसरा भाई शहर में पढ़ता. एक दिन जब सब घर आए हुए थे इस नारी ने सारे परिवार की हत्या कर दी. यह कार्य उसने अपने प्रेमी की मदद से किया. सब को खाने में बेहोशी की दवा दे दी. जब सब बेहोश हो गए तब इस ने अपने प्रेमी को बुलाया और एक एक कर सबकी गर्दनें काट डाली. वह बाल पकड़ कर सर ऊपर उठाती और उस का प्रेमी कुल्हाड़ी से गर्दन काट देता. भतीजे को उस के प्रेमी ने गला धोंट कर मारा. इस काम को पूरा कर उस का प्रेमी कुल्हाड़ी लेकर वहाँ से भाग गया और वह आगे का नाटक करने की तैयारी करने लगी. इतने में उस का भतीजा रोने लगा. शायद गला घोंटने में कोई कमी रह गई थी. इस कमी को पूरा उसकी बुआ ने किया. वह उस बच्चे की गर्दन तब तक दबाती रही जब तक वह तड़प कर शांत नहीं हो गया.

मिनटों में इस नारी ने एक प्यार भरे घर को कब्रिस्तान बना डाला. कहते हैं नारी माँ होती है पर इस नारी ने तो एक डायन का रोल अदा किया. क्यों किया उस ने यह सब? क्या कमी थी उसे? क्या चल रहा था उस के मन में? क्या उस ने यह सब अपने प्रेमी के लिए किया? इन सवालों का जवाब खोज रही है पुलिस. लोग कह रहे हैं, भगवान् ऐसी बेटी किसी को न दे. कुछ उसे डायन कहते हैं और कुछ नारी जाति पर कलंक.

यह घटना घटी, उत्तर प्रदेश के जे पी नगर जिला मुख्यालय से १७ कि मी दूर बाबनखेरी गाँव में. शौकत मियां एक अध्यापक थे. गाँव के अमीर लोगो में थे. सब उन्हें एक नरम दिल शान्ति प्रिय इंसान के रूप में जानते थे. वह अपने बच्चों से बहुत प्यार करते थे. खास तौर पर अपनी बेटी शबनम से. पर उन्हें क्या पता था कि उनकी यह प्यारी बेटी ही उनकी कातिल बन जायेगी. उनके बाल पकड़ कर उन का सर ऊपर उठाएगी और कहेगी अपने प्रेमी से 'चल काट गर्दन'.

नारी माँ होती है. अन्याय के ख़िलाफ़ नारी दुर्गा भी बन जाती है. अन्याय के ख़िलाफ़ जंग करने पर यदि समाज उसे आँख की किरकिरी मानता है तो माने. मैं तो ऐसी नारी का स्वागत करूंगा. पर यह कैसा रूप हे नारी का. क्या इस आँख की किरकिरी को समाज को बर्दाश्त करना चाहिए? क्या इस को नारी समाज का समर्थन मिलना चाहिए? हो सकता है शबनम को अपने परिवार से कोई शिकायत हो. हो सकता है उसके पिता उस पर कोई दबाब डाल रहे हों जो उसे नागवार लग रहा हो. पर ऐसी बेरहम हत्या. क्या कोई भी कारण इसे सही ठहरा सकता है?


suresh gupta

यह लेख सुरेश गुप्ता जी ने चोखेर बाली के लिए भेजा है और ऐसी नारी के बारे में चोखेर बालियों के विचार जानने की इच्छा भी जताई है ।

24 comments:

Admin said...

ऐसी घटनाएँ इस देश मैं कम जरूर होती हैं लेकिन अपवाद बिलकुल नहीं हैं.. बात नारी की नहीं...अपराध की है..

नारी..???????

VIMAL VERMA said...

विदारक है...पर इन सारी घटनाओं को नारी और पुरुष के अपराध के रूप में देखना ठीक नहीं...यही तो मानव जाति की फ़ितरत है..वो परिस्थियों का दास है...हां ये ज़रूर है सामाज में क्रूरता बढ़ती जा रही है...और इन्हें रोकने का उपाय भी अब तक हो नहीं पाया....सिर्फ़ विश्वविद्यालय में पढ़ लेने भर से शिक्षित तो नहीं ही समझा जा सकता ।

Unknown said...

बात यहाँ रखने जैसा मुद्दा तब बनती जब यह कृत्य ऐसे कई कृत्यों का प्रतिनिधित्व करता... नारी की ओर से या उसके खिलाफ उठा कोई प्रश्न होता। समाज में नर, नारी, बच्चे, बूढ़े सब में बीमार मानसिकता के लोग मौजूद हैं। जहाँ ऐसे प्रसंग रोचक हो सकते हैं...वे नारी के प्रति जो पूर्वाग्रह समाज में है उसके लिये कोई विमर्श नहीं खड़ा करते। और यहाँ नर को दोष दे की नारी को या प्रेम के पागलपन को...या फिर अलग सिरे से बात समझने की कोशिश करें..।

बलबिन्दर said...

इन जघन्य हत्यायों के चलते अब नारी भी, क्रूर हत्यारों के क्षेत्र में पुरूषों के एकाधिकार को तोड़ कर उनके साथ खड़ी है तो, कहा जा रहा है 'औरत ऐसी भी होती है क्या'

Anonymous said...

similar incident has also happened in hissar few years back and the lady and her husband were found guilty of murdering the family of 7-8 people including children . court gave them death sentence i think though not sure wheter it was life imprisionment .
our society is decaying and man or woman who so ever does this should
be punished . पर यह कैसा रूप हे नारी का
here i would say see both man and woman as human beings . people say पर यह कैसा रूप हे नारी का because they have made a mould for "woman " . crime is deplorable whether man does it or woman
rachna

दिनेशराय द्विवेदी said...

बराबर हैं सब खुदा के घर से, बराबर हों इस दुनियाँ में भी। पर क्यों हों बराबर अपराध और क्रूरता में भी?

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

समाज का अभिशाप होते हैँ
ऐसे नर और नारी, जो
ऐसे जघन्य कृत्य करते हैँ ! :-((
और कानून उन्हेँ दँड दे ये उचित है.

ऐसी नारी 'चोखेरबाली " कदापि नहीँ

'चोखेरबाली, स्त्री अपना तथा दूसरी स्त्रीयोँ का उत्थान करती है.
समाज और
सामाजिक व्यवस्था का ,
विनाश नहीँ करती.
--- लावण्या

डॉ .अनुराग said...

अमरोहा का प्रसंग है .पर कोई हैरानी भरा नही है....बेजी जी ने सही कहा है .....बीमार मानसिकता के लोग हर जगह मिल जाते है.....

ab inconvenienti said...

अपन तो भूल भी गए थे इस घटना को................ छोटी-छोटी बातें हैं, दुनिया में ये सब चलता रहता है, फालतू में किसी भी चीज़ पर वक्त बर्बाद नहीं करना चाहिए

नीलिमा सुखीजा अरोड़ा said...

पुरुष या स्त्री को अपराध से जोड़ कर नहीं देखा जाना चाहिए। अगर इस ढंग से देखा जाए तो पुरुषों के अपराधों से अखबार रंगे होते हैं और स्त्रियां कभी कभार भावावेश में ही ऐसा कदम उठाती हैं। पर अपराध की भयावहता इस बात से कम नहीं होता कि ये कौन कर रहा है। बल्कि अपराध की हर तरह से भर्त्सना ही की जानी चाहिए।

pallavi trivedi said...

पूरी पोस्ट पढी....निश्चित रूप से इसमें एक जघन्य घटना का वर्णन दिया गया है जिसे कोई भी किसी कीमत पर सही नहीं ठहरा सकता....यह सीधे सीधे एक जघन्य अपराध की श्रेणी में आता है
लेकिन मुझे यह समझ में नहीं आता की इसे इसलिए क्यों मुद्दा बनाया जा रहा है की ये एक नारी ने किया है...यदि पुरुष करता तो क्या जायज ठहराया जा सकता था? इसे पुरुष या नारी की नज़र से ने देखें.... सही बात सही है और गलत बात गलत चाहे जो भी इसे करे! हम कब नारी और पुरुष की जगह इंसान शब्द प्रयोग करना शुरू करेंगे?

अनामिका said...

अगर उस लडकी ने यह जघन्य अपराध किसी अनजान परिवार के साथ किया होता तो उसे अन्य अपराधी पुरुषों की तरह माना जा सकता था परन्तु जिस परिवार ने उसे आजीवन अपने स्नेह से सींचा, उसके साथ ऎसी वीभत्सता! बहुत संभव हॆ कि वह मानसिक रूप से विक्षिप्त हो परन्तु यह घटना सच में दिल दहलाने वाली हॆ।

Udan Tashtari said...

दरिन्दगी की पराकाष्टा. वहशीयत जब अपने पाश में कसती है तो यह नहीं देखती कि वह नर है या नारी-दोनों के लिये सम भाव. इस घटना में अंजाम देने वाला यदि नर भी होता यानि कि उस परिवार का बेटा तो क्या दरिन्दगी और वहशीपन का भाव कम आँका जाता क्या? क्या नारी ने किया है यह जुर्म इसलिए ज्यादा संगीन माना जायेगा-कम से कम कानूनन तो नहीं.
आँखों की किरकिरी है, तकलीफ देगी. दिल दुखायेगी. रुलायेगी खून के आँसू-बस !! कोई फरक नहीं कि किरकिरी स्त्री है या पुरुष-तकलीफ वही होगी. किरकिरी तो किरकिरी है बस.

Anonymous said...

नमस्कार सुधिजनो,

बहुत तार्किकता के साथ सभी लोगों ने सब कुछ किनारे कर दिया कि अच्छे-बुरे तो हर जगह होते हैं. लेकिन यही सारे तर्क पुरुषों के लिये भी क्यों नहीं लागू होते हैं. किसी अमुक पुरूष की गलतियों के एवज में सारा नारी-मुक्ति आन्दोलन सारे पुरुषों के खिलाफ क्यों हो जाता है. अफ़सोस कि यहाँ सब लोग सारे मुद्दों जैसे उत्पीडन, गरीबी, भूख और इन जैसी ना जाने कितनी समस्यायों का जाति के आधार पर, लिंग के आधार पर और धर्मं के नाम पर और ना जाने किस-किस आधार पर वर्गीकरण करने में लगे हुए हैं लेकिन हम सबको पता है कि दर्द का अहसास हमेशा एक सा ही होता है वो किसी पर भी गुजरे. अब भी समय है कि इन सब मुद्दों के हल के लिए सामूहिक प्रयास करें. इन्हें वर्गीकृत करके बौद्धिकता का जामा ओढा जा सकता है, मुद्दों या समस्यायों के हल नहीं निकल सकते. खैर, शायद आप लोग चाहते भी यही हैं.

आप सबका
एक पाठक

Batangad said...

ये राक्षस प्रजाति के लोग हैं। कोई स्त्री-पुरुष का भेद नहीं है। और, जरूरी बातें जो कहनी थी उसको तो, आईना ने दिखा ही दिया है।

संजय शर्मा said...

इस कुकृत्य के पीछे एक पुरूष भी तो है [प्रेमी के रूप मे ] अपना तो मानना है हर सफलता के पीछे नारी होती है .और हर असफलता के पीछे पुरूष खड़ा होता है . इस कहानी मे दो पुरूष भयंकर दोषी है . एक बाप दूसरा प्रेमी .

संजय शर्मा said...

इस कुकृत्य के पीछे एक पुरूष भी तो है [प्रेमी के रूप मे ] अपना तो मानना है हर सफलता के पीछे नारी होती है .और हर असफलता के पीछे पुरूष खड़ा होता है . इस कहानी मे दो पुरूष भयंकर दोषी है . एक बाप दूसरा प्रेमी .

संजय शर्मा said...

इस कुकृत्य के पीछे एक पुरूष भी तो है [प्रेमी के रूप मे ] अपना तो मानना है हर सफलता के पीछे नारी होती है .और हर असफलता के पीछे पुरूष खड़ा होता है . इस कहानी मे दो पुरूष भयंकर दोषी है . एक बाप दूसरा प्रेमी .

संजय शर्मा said...

इस कुकृत्य के पीछे एक पुरूष भी तो है [प्रेमी के रूप मे ] अपना तो मानना है हर सफलता के पीछे नारी होती है .और हर असफलता के पीछे पुरूष खड़ा होता है . इस कहानी मे दो पुरूष भयंकर दोषी है . एक बाप दूसरा प्रेमी .

संजय शर्मा said...

इस कुकृत्य के पीछे एक पुरूष भी तो है [प्रेमी के रूप मे ] अपना तो मानना है हर सफलता के पीछे नारी होती है .और हर असफलता के पीछे पुरूष खड़ा होता है . इस कहानी मे दो पुरूष भयंकर दोषी है . एक बाप दूसरा प्रेमी .

बलबिन्दर said...

… और अब यह खबर मिली है कि हत्यारोपित शबनम सात माह के बाद खुद मां बन जाएगी। जिला अस्पताल में जांच के बाद इसकी पुष्टि कर दी गई है।

Asha Joglekar said...

एक बहुत ही महीन लकीर होती है सामान्यता और पागलपन के बीच, और उन्माद में कब व्यक्ति यह पार कर जाता है उसे खुद भी पता नही चलता ।अपराध जघन्य है और उसका सजा़ अवश्य मिलनी चाहिये और मिलेगी । यह नही सोचें कि अपराधी नारी है या पुरुष।

Anonymous said...

Suresh wrote: "लोग कह रहे हैं, भगवान् ऐसी बेटी किसी को न दे. कुछ उसे डायन कहते हैं और कुछ नारी जाति पर कलंक."

By the way aap kya kahte hein? Haan it is right ki aisi beti na de but it doesn't mean ki saari naari jaati ko galat kaha jaye. Same things apply on males as well. If we see with open eyes, you will find males are more and more involved in crime as compared to women. Males to her jagah her mode per ghar ho ya bahar crime karte dikh jate hein. Daily kitne rapes hote hein, kitne hi blasts hote hein aur kitne bade se bade ghotale huye hein aur hote hein. Bade-2 businessmen se lekar chote kursi per baithe male kitni ladkion ki mazburi ka fayada daily uthate hein? Isliye ye bilkul sach hai ki abhi tak aankhon mein males bahut aage hein crime mein.

Sureshji, are you talking about a particular nari 'Shabnam' who commited crime or whole nari jati ?


I feel crime has no link with any community and gender. It wil be totally nonsense if you universailze the crime of one person. Aise to fir her nar jo narayan roopi bane baitha hai wo bhi criminal kaha jana chahiye aur her nar mein Sureshji aap bhi crimnal mein count kiye jayenge!!!


Anyway, there might be so many reasons and questions. As for as the crime is concerned, whatever the reason may be, a crime is a crime and who soever committs it, he/she must be get punished. But, yeh bhi dekhna hai ki isme kiska-2 hath hai or jo bhi isme shamil hein unsabko same punishment milna chahiye.


Khair ab hame sochna yeh hai ki aise kadam kyun uthaye ja rahe hein ? Pyar ki pratimurty bani ek devi kyun apna roop badal rahi hein?


Note: "All comments and critics are most welcome on my views"


Thanks & Regards,
Miss Rewa Smriti
www.rewa.wordpress.com

Unknown said...

Note: "All comments and critics are most welcome on my views"


Rewa ji khud comment karke aap kyu apne comment per view aur comment nahee chahtee samajh nahee aataa.
vichaar aapke bahut badhiyaa hain, santulit hai lekin thahre hue paane mai kankad fenkaa hai to thodaa bheege bhee.

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