Friday, June 6, 2008

pink is new blue- एक प्रदर्शनी

"पिंक या गुलाबी रंग लड़कियों का होता है बुद्धू !!" - मुझे मेरी एक मित्र ने कहा जब मैं अपने बेटे के लिए कपड़े खरीद रही थी और मुझे गुलाबी रंग बेहद पसन्द आ रहा था । यह और बात है कि गुलाबी रंग कभी मैने खुद के लिए पसन्द नही किया । यह पहला अवसर था जब मुझ जैसी अल्पज्ञानी को रंगों के इस लैंगिक विभाजन का पता चला । ब्लॉगजगत में भी ये फेमिनिन पिंक और मस्क्यूलिन नीला विभाजन ब्लॉगिंग प्रवृत्तियों के रूप में पिछले डेढ साल मे कई बार देखा । तकनीक , एच टी एम एल , टूल्स, फिलॉसफी , अर्थशास्त्र , एग्रीगेटर , प्रतिबन्ध , विवाद ,गाली गलौच ....ये सभी ब्लू ब्लॉगिंग के विषय रहे और ....कविता , रेसिपीज़ , घर-गृहस्थी , बेटे-बेटियाँ ,फूल ,सजावट , भावनात्मक विषय ये सब पिंक ब्लॉगिंग के हिस्से में थे । इनमें संक्रमण जब भी कभी थोड़ा बहुत हुआ उसे असहज ही लिया गया ।

खैर इस पर बात कभी विस्तार में करूंगी , कुछ आंकड़ों के साथ ।

फिलहाल ये विचार फिर य़ाद आये यह शीर्षक देखकर "pink is new blue" जो भारतीय महिलाओं की पेंटिंगस की प्रदर्शनी है । आप यह प्रदर्शनी 30 जून 2008 तक देख सकते हैं , सुरुचि आर्ट गैलेरी , नॉएडा में सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक ।
पूरा पता है -
सुरुचि आर्ट गैलेरी
सी- 16 , सेक्टर -26 ,
नॉएडा -201301
फोन -91-120-4248008
मैं भी कोशिश करती हूँ कि देख कर बता पाऊँ कैसे पिंक अब नया नीला हो रहा है .........

11 comments:

विनीत कुमार said...

रंग को लेकर लिंग विभाजन की एक घटना बताउं।
मुझे लाल और गुलाबी रंग बहुत पसंद है। गुलाबी रंग की शर्ट,टीशर्ट,इनर,किताबों की जिल्द औऱ जुराबें तक मिल जाएगी मेरे पास।
लाल रंग की तो फेहरिस्त और भी लम्बी है जिसमें जूते,कारगो, चश्मा तक शामिल है. पहनने की ऐसी कोई भी चीज नहीं है जो लाल में आते हैं और मेरे पास नहीं है.
लाल सर्ट और टीसर्ट भी मुझे बहुत पसंद है। इसलिए जब भी कपड़े खरीदता हूं तो अलग रंगों के बजाय अलग स्टफ और कंपनी की लाल ही खरीद कर आ जाता हूं।
आप जिस रंग को लड़कियों का रंग कह रही है, अब वो बदल चुका है। सारे शोरुम में आपको पिंक और पर्पल के कलेक्शन मिल जाएंगे.
एक बार की बात बताता हूं। मैं अपने हिन्दी विभाग में लाल रंग की शर्ट पहनकर चला गया. कुछ लोगों ने तारीफ की और कुछ ने कहा कि चंपक का रंग पहन लिया है। एक ने कहा, अब तो रहम खाओ, शर्म करो, पीएच.डी में आ गए हो। एक लड़की ने सबके सामने कहा कि विनीत हमेशा गे वाला रंग पहनता है। मैं तो मजाक में लिया लेकिन लोगों ने ताने देने और मजे लेने शुरु कर दिए। ये प्रक्रिया अभी भी दुहरा ली जाती है.

Ghost Buster said...

अरे बाप रे. तो हम अपने ब्लॉग के चेहरे पर बालाओं वाला रंग पोते बैठे हैं. इसे मर्दाना रंगत कैसे दें? कोई सुझाव?

सुजाता said...

अरे घोस्ट बस्टर जी ,
नीले या गुलाबी का यह लैंगिक विभाजन मुझ मूर्ख को भी बहुत देर से पता लगा । पर इसे मानना मुझे और भी बड़ी मूर्खता लगती है । मेरा तो प्रिय रंग ही नीला है , क्या करूंगी ?
आपको विचलित नही होना चाहिये । बहुत अच्छा है कि आप गुलाबी ब्लॉग वाले हैं । इससे हम मानेंगे कि आप स्त्री विरोधी नही हैं :-)

तरूश्री शर्मा said...

सुजाता जी,
इत्तेफाक की बात है कि आज आपकी रंग को लेकर ये पोस्ट और कल की मेरी घटना। कल शाम ऑफिस खत्म हुआ तो मैंने अपने नए खुले अकाउंट का वेलकम किट खोला। उसमें सबसे पहले अपना डेबिट कार्ड देखा तो कुछ अजीब सा महसूस हुआ। मैंने ऐसा डेबिट कार्ड पहले नहीं देखा था। मेरे पुराने अकाउंट्स के कार्ड नीले या सिल्वर कलर के और नया वाला पिंक कलर का था। मैंने डिटेल्स पढ़ी तो लिखा था वीमेन्स स्पेशल डेबिट कार्ड। खीझ हुई.... क्या तमाशा है ये? किसने कहने पर मुझे ये स्पेशल फैसिलटी दी गई? जरूरत क्या थी? मुझे तो नीला रंग पसंद है,या फिर लाल कार्ड भी ठीक लगता है...लेकिन अब ये पिंक कार्ड ढोना पड़ेगा? वो भी स्पेशल वीमेन्स वाला? गुस्से में तपाक से फोन लगाया जिसने मेरा अकाउंट खोला था.... उसके पास जवाब नहीं था तो मैनेजर का नंबर दे दिया। मैनेजर बोला मैडम....ये तो बाय डीफॉल्ट फीमेल्स को पिंक कार्ड मिलता है और अभी तक किसी ने आपत्ति दर्ज नहीं कराई। आप कस्टमर केयर पर बात कर लीजीए। वहां एक लड़की ने कॉल रिसीव किया...उसे भी जवाब नहीं सूझा। आगे बढ़ा दिया.... वहां भी एक लड़की ने रिसीव किया...मैंने सारी रामायण फिर सुनाई। कहा क्या जरूरत है इस तरह की डीफॉल्ट सैटिंग्स की? गुलाबी नीले कार्ड बनाने की? फिर चुन चुन के महिलाओं को अलग और पुरूषों को अलग कार्ड देने की? मुझे नहीं चाहिए ये गुलाबी कार्ड....बदलो इसे। कहने लगी मैडम ...दरअसल महिलाएं शॉपिंग बहुत करती ना...तो उन्हें इस कार्ड के जरिए कुछ कम्पनीज़ डिस्काउंट ऑफर देती हैं। यही वजह है कि आपको भी पिंक कार्ड दिया गया...अगर आप चाहें तो चेंज कराने के लिए अप्लाई कर दें।
औह... ये बात है? अब उसकी बात सुनने के बाद मैं सोच रही हूं कि क्यों ना कलर से कॉम्प्रॉमाइज कर लिया जाए.... आखिर शॉपिंग तो मैं करूंगी ही ना। थोड़े से फायदे ने लम्बे चौड़े नैतिक विरोध का गला घोंट दिया।

PD said...

अब मैं क्या कहूं.. मुझे तो नीला रंग ही पसंद है.. मेरी कई महिला मित्रों को भी नीला ही पसंद है.. मेरे ख्याल से रंगों का लिंगीकरण करना सही नहीं है.. जिसे जो पसंद हो उसे अपनाये.. :)

Unknown said...

मेरी शर्ट्स तो मेरी पत्नी खरीदती हैं, पिछले कई दशक से खरीद रही हैं. कभी इस बारे में सोचा ही नहीं. आज यह दिलचस्प जानकारी हाथ लगी. लेकिन क्या यह सही है कि लाल रंग गे लोगों का होता है? मेरे कई साथी लाल रंग बहुत पसंद करते हैं.

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

ये पस्चिम से अनुकरण मेँ लाये गये चोँचले हैँ सुजाता जी
और व्यापार, विज्ञापनविद्` इनको
बढावा देते हैँ .
हाँ, हल्का गुलाबी रीबन, सूट पे या कमीज पे लगाना स्त्रीयोँ के स्तन कैँसर
के लिये शोध व उपचार से सँबँधित है जिसे अक्सर महिलायेँ ही नही कयी पुरुष भी लगा लेते हैँ...to show support & soldiarity..
लाल रीबन ह्र्दय रोग के निवारण की पहल के लिये होता है , और पीला रीबन युध्ध बँदी और
लापता सैनिकोँ के समर्थन के लिये लगाया जाता है -
हमेँ तो सँसार के हर रँग से प्यार है :)
और्, कला प्रदर्शनी के लिन्क देने का शुक्रिया ~~
- लावण्या

Arun Aditya said...

अच्छा रंग- विश्लेषण है। प्रदर्शनी की जानकारी देने के लिए शुक्रिया।

अनूप भार्गव said...

क्या कहा कविता ’पिंक ब्लौगिंग’ में आती है ?
ह्म्म्म्म सोचना पड़ेगा :-)

pallavi trivedi said...

किसी फिल्म में तो मैंने यहाँ तक सुना था की लड़कों को ब्लू पसंद होता है इसलिए उनका नाम बिल्लू होता है और लड़कियों को पिंक पसंद होता है इसलिए उनका नाम पिंकी होता है....

Anonymous said...

wikipedia says,
In Western culture, the practice of assigning pink to an individual gender began in the 1920s. From then until the 1940s, pink was considered appropriate for boys because it was the more masculine and decided color while blue was considered appropriate for girls because it was the more delicate and dainty color. Since the 1940s, the societal norm apparently inverted so that pink became appropriate for girls and blue appropriate for boys, a practice that has continued into the 21st century

Though the color pink has sometimes been associated with gender stereotypes, some feminists have sought to reclaim it. For example, the Swedish radical feminist party Feminist Initiative uses pink as its color.

It has been suggested that females prefer pink because of an evolutionary preference for reddish things like ripe fruits and healthy faces. This suggestion, however, has been criticized as unsubstantiated.

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