Tuesday, July 22, 2008

हमारी बेटियों की बार्बी अपना साथी खुद चुनती हो !!

बार्बी हमारी बेटियों की पसंदीदा गुडिया है ! बार्बी एक आधुनिका नवयौवना और रॉयल मिज़ाज़ की सुंदरी है ! इस गुडिया को छोटी बच्चियों के हाथ में देकर हम अ[पनी बेटी के लिए सपने बुनते हैं- जैसी हसीन कमसिन और आभिजात्य यह गुडिया है वैसी ही हमारी बेटी भी बननी चाहिए ! हमारी बेटियां भी इस डॉल को अपना आदर्श मानती है ! इस बार्बी का एक ब्वाय फेंड है ऎलेन ! बार्बी का आदर्श साथी- सजीला जोशीला जवान ! पर भारत की बार्बी से खेलने वाली बेटियां नहीं जानती कि बार्बी का एक प्रेम साथी भी है सो वे शायद उसको खरीदने की ज़िद भी नहीं पालतीं !

बार्बी कंपनी के एक सर्वे में यह पाया गया है कि भारत में बार्बी के इस साथी ऎलेने के लिए कोई गुंजाइश नहीं है क्योंकि यहाँ भारतीय अरेंज मैरिज के आदर्श के लिए एक बडा खतरा हो सकता है ! यूं तो बाजार के द्वारा किए गए सर्वे की कोई सामाजिक ज़िम्मेदारी या जवाबदेही नहीं होती पर इस तरह के सर्वे हमारे समाज के मन की भीतरी परतों को उखाड कर सामने रखने का काम भी कर देते हैं ! महंगी बार्बी खरीदने वाला समाज भी अपनी मान्यताओं में कितना पुरातन और डरा हुआ है यह तथ्य हमें परेशान करता है ! अपने बच्चों को बडे स्कूलों में पढाने वाला , प्रेमाचार और यौनाचार भरी फिल्मकहानियों पर मर मिटने वाला ,बेटियों को बराबरी का माहौल देने का दावा करता समाज प्रेम विवाह के विचार से कितना भयभीत है यह तथ्य हमें चौकाता है ! दोहरे मानदंडों वाले भारतीय माता -पिता बेटी के सपने में भी प्रेम का विचार नहीं आने देना चाहते ! वे बेटी वहीं बांधेगे जहां उनका सोशल स्टेतस ,बिरादरी और उनका अहमं संतुष्ट होता है ! प्यार पर्दे की चीज़ है रोजमर्रा की ज़िंदगी में तो सबसे वाहिताय चीज़ है ! प्यार मनोरंजन की कहानी का नाम है जिसके लिए फॆंटेसी में जगह है रीयेलिटी में नहीं ! इसलिए बार्बी अकेली ही चलेगी ब्वॉयफेंड के साथ नहीं !

जहां औरतें गढी जाती हों उस देश के अभिभावक बेटियों को औरत बनाने पर आमादा है ! बच्ची का बचपन औरतपने को समर्पित एक कडा यज्ञ है हमारे लिए ! यहां तमाम बराबरी होगी ! आधुनिकता होगी ! पर प्रेम और विवाह के लिए आजादी नहीं होगी ! विवाह हमारे देश में पारीवारिक सामाजिक संबंध माना जाता है उसमें व्यक्तिगत चुनाव सबसे घृणित खयाल है ! हमारे लिए बेटी लगातार गढने की चीज है जिसका अपना अस्तित्व पनपना परिवार के लिए सबसे डरावनी चीज़ है ! बार्बी उसमें औरत पैदा करने के लिए है इसलिए नहीं कि वह हमारी बनी बनाई जमी जमाई परंपराओं की नींव हिला दे ! इसलिए कम समझदार अभिभावक भी बार्बी के ब्वायफ्रेंड के निहितार्थ समझते हैं !
.................. ये बस संयोग की बात है अपनी बेटी को जी भर आजाद खयाल बनाने वाले हम माता-पिता कल बेटी की बात पर बहुत हैरान हुए ! खेल और मजाक के माहौल में पापा ने जब कहा तुम्हारी ममा तो मेरी गर्लफ्रेंड हैं ! इसपर साढे पांच साल की बेटी का कहना था कि नहीं ममा आपकी बीवी हैं गर्लफ्रेंड की बात तो झूठ होती है ..वो सिर्फ फिल्मों में होती है ..!जाहिर है बेटी का समाजीकरण करने में कई ताकतें एक साथ जुटी हैं और हम चाहकर भी अपनी बेटी को उनके असर से बचा नहीं पा रहे हैं !

जिसमें देश में प्यार मोहब्बत इश्क लव जैसे लफ्जों वाले गाने ज़ुबानों पर रटे रहते हों , इश्क के लिए मरने मिटने वाली कहानियां सुनहले पर्दे से सीधे दिलों में उतरती हों , कथांत में प्रेमी प्रेमिका के मिलन को देख दर्शक किलकित हो जाते हों उस देश के लोगों के लिए बच्चों के प्रेम विवाह की कल्पना तक डरा देने वाली हो--विचित्र है !
प्रेम और विवाह एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और प्रेम एक निहायत ही निजी वस्तु है !

9 comments:

आर. अनुराधा said...

सच कहा। तभी तो प्रेम कृष्ण-राधा का होता है, जिसमें सब कुछ अवास्तविक होता है जो इंसानों के लिए नहीं है और इंसान जिसकी बराबरी करने का सोचने की हिमाकत भी नहीं कर सकता। या फिर राम-सीता का प्रेम है जहां बेसहारा सीता अग्निपरीक्षा के बाद भी त्याग दी जाती है।

वैसे, बार्बी अपने आप में एक काल्पनिक, अवास्तविक, आदर्श फिगर वाली गुड़िया है। नाप-जोख के हिसाब से तो तो कहते हैं कि उस आदर्श फिगर वाली गुड़िया के आकार की सचमुच कोई लड़की हो तो वह खड़ी भी नहीं हो पाएगी!

Rachna Singh said...

"इसपर साढे पांच साल की बेटी का कहना था कि नहीं ममा आपकी बीवी हैं गर्लफ्रेंड की बात तो झूठ होती है ..वो सिर्फ फिल्मों में होती है ..!"
you being a mother obviously know better about your baby but somehow neelima i feel the baby is saying more than what these words are saying . she is probably is very clear in her mind about the concept of girl friend and wife . she can distinguish the the difference very clearly . i really feel the next gen of children are more sensitive to things because of exposure to media etc

Asha Joglekar said...

I just wonder that Barbi can be ideal for anybody. she is all body and no brains. I hope our girls in India know better than that. I know quite a few people of a generation earlier than mine who marrised a erson of their choice. In my generation my sistesr in law and many more off my friends married for love and my both sons did the same. I don't think Love marriage is a taboo any more, yes you have to be bold and courageous and have to take lot opposition. Boy friend i do not know.but before marriage, the guy is your boy friend only.

seema gupta said...

प्रेम और विवाह एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और प्रेम एक निहायत ही निजी वस्तु है !
"well this article is nice to read about and left many question in mind to think about"

Regards

Unknown said...

आपकी बात बलकुल सही है. प्रेम और विवाह एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और प्रेम एक निहायत ही निजी वस्तु है. पर बार्बी को एक आदर्श के रूप में देखा जाय यह सही नहीं है.

सुजाता said...

पर बार्बी को एक आदर्श के रूप में देखा जाय यह सही नहीं है.
____
हाँ , यह लेख भी यही कहता है । पर जैसे ही मैन , या सुपर मैन देखने वाले बच्चे सहज ही उन्हें अपना आदर्श बना लेते हैं , बार्बी गुड़िया भी बच्चियों की आदर्श बन जाती है ।

Unknown said...

सुजाता जी, आपकी बात सही है. बच्चे सहज ही इन्हें अपना आदर्श बना लेते हैं. शायद यह इसलिए है कि माता-पिता अपने बच्चों के आदर्श नहीं बन पाते.

Rajesh said...

१०० रुपये की न्यूनतम मूल्य की बार्बी १०० करोड़ में कितने लोग खरीद सकते हैं?

Vandana Pandey said...

अच्छी पोस्ट के लिये बधाई स्वीकार करें।

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