Wednesday, August 20, 2008

RAW फ़िर दागदार

अमर उजाला में छपी ख़बर पढ़कर हैरानी नही हुई ...कब तक इंडिया में महिलाओं को अपने बॉस ( जॉब में ) की ग़लत हरकतों को सहना होगा ? विरोध करने पर निशा प्रिय भाटिया ( Director ) की तरह मानसिक रोगी करार दिया जाएगा ...मुझे लगता है इस मुद्दे पर विचार मंथन की जरुरत है ........
----नीलिमा गर्ग

4 comments:

सुजाता said...

विरोध तो घरेलू बॉस का हो या ऑफिस के बॉस का , स्त्री के लिए निरापद नही रहता नीलिमा जी।सेक्सुअल हरासमेंट पर यह पोस्ट http://sandoftheeye.blogspot.com/search/label/sexual%20harassment साफ बताती है कि विरोध करने वाली महिला को क्या क्या सहना होता है।
एकाध स्थान पर बदलाव आया है पर बिलकुल निचले स्तर पर कतई नही आया है । चुड़ैल,डायन कहकर ऐसी स्त्री को कड़ाह के खौलते तेल मे जलाया जा सकता है जो लीक पर नही चलती।कानून का डर हो तो ये काम चुपचाप हो जाते हैं और भनक भी नही लगती।कोई बावड़ी मे कूद पड़ती है या आग लगा लेती है ,किसी का पाव खाई मे फिसल जाता है ......
हम एक समय मे कई युग जीते हैं,एक उत्तर आधुनिक युग है ,एक आधुनिक ,एक मध्यकालीन...लेकिन् स्त्री की दासता का एक युग ऐसा है जो व्यतीत ही नही होता।

वर्षा said...

लड़ाई अभी लंबी है। पर अच्छा पहलू ये है कि लड़ाई शुरू तो हुई।

Unknown said...

कुछ समय पहले भारतीय थल सेना और उस के बाद भारतीय वायु सेना में महिला यौन शोषण के मामले सामने आए हैं. अब रा में भी यह मामला सामने आया है. शिकायत कर्ता को उस की पोस्ट से हटा दिया गया है. आगे महिला अधिकारी के पक्ष में कुछ न्याय हो पायगा ऐसा विश्वास नहीं हो पा रहा है. पर आज परिस्थिति अनुकूल है कि ऐसे मामलों में महिलाओं के साथ न्याय हो, जिस से और लोगों को महिला यौन शोषण करने की हिम्मत न हो. आज भारत की राष्ट्रपति एक महिला हैं. केन्द्र में शासन कर रही पार्टी की अध्यक्ष एक महिला हैं, जिन्हें दुनिया की शक्तिसंपन्न महिला माना जाता है. महिला पर अत्त्याचार से सम्बंधित मंत्रालय की मंत्री भी एक महिला हैं.

Unknown said...

इस पोस्ट पर टिप्पणियां न के बराबर हैं. ऐसा क्यों है?

आज के अखबार में रा के मुख्य ने निशा से जो कहा वह छपा है. रा मुख्य ने इसका खंडन किया है. अगर यह सही है तो बहुत ही शर्मनाक है रा के लिए, इस सरकार के लिए और समाज के लिए. आप भी देखिये - "क्या केरियर-केरियर, बच्चे-बच्चे, पोस्टिंग-पोस्टिंग लगाए रखती हो हर वक्त. तुम जवान हो, खूबसूरत हो, कितना ग्लो रहता है तुम्हारे चेहरे पर. अकेली हो, मजे करो. एक अच्छा सा आदमी ढूँढ लो अपने लिए. इतने हैं किसी को भी पसंद कर लो. और उस से कहो तुम्हे खुश रखेगा."

क्या इस से ज्यादा शर्मनाक हो सकता है?

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