Sunday, September 14, 2008

हमारी हिन्दी

हिन्दी ने वरदान दिया ,
जीने का अभिमान दिया
इसकी सेवा में मन प्राण अपने लगायेंगे
जन-जन की प्यारी भाषा यह
उन्मुक्त उड़ने की अभिलाषा यह
अपने संग सबको आगे लेजायेगी ,
मन और बुद्धि की सच्ची आजादी क्या है
इसकी परिभाषा बतलाएगी ।

7 comments:

Dr. Chandra Kumar Jain said...

बढ़िया है.
हिन्दी दिवस की शुभकामनाएँ
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डॉ.चन्द्रकुमार जैन

महेन्द्र मिश्र said...

हिन्दी ने वरदान दिया ,
जीने का अभिमान दिया
इसकी सेवा में मन प्राण अपने लगायेंगे
जन-जन की प्यारी भाषा यह.


हिन्दी दिवस की शुभकामनाएँ

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

सभी हिन्दी-प्रेमियों और अक्षर-सेवियों का हार्दिक अभिनन्दन और शुभकामनाएं।

Dr. Ashok Kumar Mishra said...

hindi hamari pehchan sey judi hai. isliye isey samradh karna jarooi hai. hindi per meri rai post mein hai.

Unknown said...

सुंदर रचना है. पढ़ कर अच्छा लगा.

rakhshanda said...

हिन्दी दिवस पर बहुत बहुत मुबारकबाद...

pallavi trivedi said...

हिंदी को आगे बढ़ने का उत्तम प्रयास है....

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