Wednesday, October 22, 2008

कुछ विज्ञापन - कन्या बचाइये

(१)
(२)
(३)
(४)
(5)
कितनी आसानी से अपनी बात कह गये - है ना

11 comments:

Anonymous said...

ek achchhii post sangeeta
jagruktaaa laani bahut jarurii haen

makrand said...

humne bhi ek post likhi he
kanya bhurna
if possible visit
regards

सुजाता said...

सीता पानी ला और राम खीर खा ...
ऐसे पाठों की अब तक भी आम जीवन मे गहरी पैठ है इसलिए बहुत ज़रूरी है कि इन्हें डी कंस्ट्रक्ट किया जाए ।

डॉ .अनुराग said...

बिल्कुल ओर अंदाज भी बहुत खूब है

विनीत कुमार said...

bina dhol-nagade bajayae bahut gambheer baat kar di

Anonymous said...

अंतिम तो गजब है..

संजय बेंगाणी said...

इसे ही रचनाशीलता कहा जाता है जी.

Manuj Mehta said...

sangeeta ji
kadwa sach hai yeh
shukr hai meri ek beti hai

Unknown said...

बाकई बहुत आसानी से आप अपनी बात कह गई, एक सही बात.

अभिषेक मिश्र said...

Kahte hain ek tasveer hazar shabdon se badhkar hoti hai, yahan to aapne ek sngrah taiyar kar diya. Sahamat hoon aapse.

रोमेंद्र सागर said...

बहुत खूब !!

अनुप्रिया के रेखांकन

स्त्री को सिर्फ बाहर ही नहीं अपने भीतर भी लड़ना पड़ता है- अनुप्रिया के रेखांकन

स्त्री-विमर्श के तमाम सवालों को समेटने की कोशिश में लगे अनुप्रिया के रेखांकन इन दिनों सबसे विशिष्ट हैं। अपने कहन और असर में वे कई तरह से ...