Thursday, November 27, 2008


य़ह आक्रोश, विरोध और दुख का चित्र है। कल/आज की मुंबई की और पिछली तमाम ऐसी घटनाओं के खिलाफ। इस चित्र को अपने ब्लॉग पोस्ट मे भी डालें और साथ दें । इस एक दिन हम सब हिन्दी ब्लॉग पर अपना सम्मिलित आक्रोश व्यक्त करे । चित्र आभार

इसके आगे, अब डर कैसा कथांश की दूसरी किश्त पढ़ना जारी रखें। ...

6 comments:

सुजाता said...

निहायत अफसोसनाक ,निन्दनीय,घृणित है यह सब ..शब्द भी कह नही सकते ...हालात अब भी बदतर हैं ..रेडियो पर सुबह प्रेज़ेंटर बोलीं - अब हर वक़्त ही हाई अलर्ट रह कर चलने का वक़्त है -जीवन कीमती है ।
जीवन के अलावा भी और जीवन से ज़्यादा और बहुत कुछ है जो खो रहा है।

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद said...

आतंकवाद तो अब जैसे दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। अब फिर नेता यही कहेंगे कि आतंकवाद का कोई मज़हब नहीं होता!!!

संजीव कुमार सिन्‍हा said...

कांग्रेस को सबक सिखाओ- देश बचाओ।

आर. अनुराधा said...

यहां मामला सिर्फ इस या उस राजनीतिक पार्टी तक सीमित नहीं है। इस तरह के पार्टीवादी पूर्वाग्रहों से बाहर निकल कर देखें, सोचें। वाकई, जीवन के अलावा भी बहुत कुछ खो रहा है।

Anonymous said...

ये शोक पोस्ट में नही साईडबार में होना चाहिये, अभी इस सरकार के जाने में बहुत वक्त है। तब तक अक्सर जरूरत पड़ सकती है।

Anonymous said...

अपनी एक जुटता का परिचय दे रहा हैं हिन्दी ब्लॉग समाज । आप भी इस चित्र को डाले और अपने आक्रोश को व्यक्त करे । ये चित्र हमारे शोक का नहीं हमारे आक्रोश का प्रतीक हैं । आप भी साथ दे । जितने ब्लॉग पर हो सके इस चित्र को लगाए । ये चित्र हमारी कमजोरी का नहीं , हमारे विलाप का नहीं हमारे क्रोध और आक्रोश का प्रतीक हैं । आईये अपने तिरंगे को भी याद करे और याद रखे की देश हमारा हैं ।
thanks anuradha

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