Friday, January 16, 2009

पर बात चलनी चाहिए

पिछले 6 दिन मे आई ये पोस्ट्स दिखाती हैं कि जेंडर अब ब्लॉग जगत की चर्चाओं का एक मुख्य हिस्सा है।दृष्टि क्या है ,विरोध या असहमति ,उपदेश या विमर्श यह भी देखा जाएगा। फिलहाल तो -

इस ब्लॉग पर न सही
उस ब्लॉग पर सही
हो कहीं भी
पर बात चलनी चाहिए!

नारी v/s नारी

मंतव्य शायद यह है कि विज्ञापन आदि मे जो अँग प्रदर्शन होता है उसमें दर असल स्त्री देह को हथियार बनाकर इस्तेमाल किया जाता है।एकाध पंक्ति में मंतव्य लीक से हटा है।लेकिन कुल मिलाकर मर्यादा और स्वाभिमान से इसे जोड़ दिया गया है।


अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी-स्त्री शोषण पर
पोस्ट की मुख्य चिंता है -
'राज्य महिला आयोग तो शोभा की वस्तु बन चुके हैं, महिला दिवस मनाकर, महिला थाने खोलकर सरकारें औपचारिकतायें पूरी करती रहती हैं, समाज अपनी चाल चलता रहता है, शोषण जारी रहता है. पता नहीं भारतीय समाज की मानसिकता में कब बदलाव आयेगा, कब व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन होगा और कब महिला के लिये भोग्या और शोषण की वस्तु होने से छुटकारा मिल पायेगा '

इच्छा जैसी बहुत सी लड़कियाँ हैं
टी वी धारावाहिक उतरन की बाल कलाकार स्पर्श का साक्षात्कार -
मैं और इच्छा एक-दूसरे के विपरीत हैं। हमारे बीच कोई समानता नहीं है। मैं अमीर परिवार की लड़की हूं। मैं मुंबई के अंबरनाथ स्थित केंद्रीय विद्यालय में कक्षा चार की छात्रा हूं। मुझे शतरंज खेलना अच्छा लगता है। इच्छा दूसरों की सहानुभूति पर जी रही है। हां, मासूमियत हम दोनों में एक जैसी है। मैंने अपने घर के पास इच्छा जैसी बहुत लड़कियों को देखा है। इस कारण मैं इच्छा का किरदार निभा पायी।

पत्नी की कमाई अच्छी या बेईमानी की ?
दोस्तों वाली बातों में ये जिदंगी की फू-फां क्यों आ जाती हैं?
"पत्नी कमाने लगे तो वो लोग कहते हैं बहू की कमाई खा रहा है आप बताइये जब परिवार पर आर्थिक संकट आए तो क्या वो लोग मदद करने आएंगे ? "

ये तो हमारे देश का आम नज़ारा है,महिलाएँ ध्यान दें

वैसे कैसा रहेगा अगर लिखा जाए-पुरुष इस पर ध्यान दें!
















औरत शालिनी की नज़र से - अतित के ब्लॉग पर इसे पढकर मुझे याद आती है वर्जीनिया वूल्फ की पुस्तक - ' अ रूम ऑफ वंज़ ओन 'मेंटल स्पेस के साथ साथ फिज़िकल स्पेस भी बहुत ज़रूरी है जिसे आप अपना कहें।

और जब कभी वो ढूंढ लेती है
अपना व्यक्तित्व, अपनी पहचान
बना लेती है
अपना कोई मकाम
इस पुरुष प्रधान समाज में
तो उसके अपने ही
प्रत्यंचा लेते हैं तान
चलाते हैं,
तीखे बचनों के कटु बान

दहेज म्रत्यु के मामले मे करार साबित करना ज़रूरी नही-सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीमकोर्ट ने व्यवस्था दी है कि दहेज मृत्यु के मामले में अभियोजन पक्ष को यह साबित करने की जरूरत नहीं है कि दूल्हे और दुल्हन के परिवारों के बीच दहेज के लिए कोई करार हुआ था। सुप्रीमकोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 304-बी की व्याख्या करते हुए कहा कि अगर अदालत ऐसे करार पर जोर देने लगेगी तो किसी भी अपराधी के खिलाफ न तो मामला दायर किया जा सकता है और न ही उसे सजा दी जा सकती है।

बिकाऊ है बाढ पीड़ितों के बेटे
बाढ अकाल त्रासदी के समय दानव वेश्यावृत्ति के लिए बढिया स्थितियाँ ढूंढ लेते थे अब बच्चों के अंगों की तस्करी भी करने लगे। महाजनों ने ऐसे समय में दबाव बनाया है की वो अपनी जान बचाने के लिए अपने कलेजे के टुकडों का सौदा करने पर मजबूर हैं .

SMS भेज कर गहना को बचा लीजिए

गहना को माँ बनना चाहिए या नही ये तो बालिका वधु के निदेशक तय करेंगे लेकिन sms के जरिये जो परिणाम सामने आ रहे हैं उससे तो लगता है की देश की जनता नही चाहती है की गहना माँ बने।
अफ़सोस तब होता है जब sms भेजने वाले के पड़ोस में कोई गहना माँ बन जाती है और हम sms करते हैं मगर इस बात का की एक नाबालिग माँ बन गई है और उसकी मौत हो गई है और उसका पैदा बच्चा भी ख़त्म हो गया है।

दुनिया भर की लड़कियों के नाम
यकीन साहब की एक गज़ल

सोज़े-पिन्हाँ को बना ले साज़ लड़की!
बोल ! कुछ तो बोल बेआवाज़ लड़की!
अपनी कू़व्वत का नहीं अहसास तुझ को
कर ‘यक़ीन’ इस बात पर जाँबाज़ लड़की!



कुछ छूटा हो तो याद दिलाएँ !

13 comments:

Himanshu Pandey said...

हो कहीं भी /पर बात चलनी चाहिये.
सार्थक.

Unknown said...

Good to see your collection. But there is an Important web., people should know and must read.

For details

See - "Beyond the Second Sex - Streevimarsh"

( http://streevimarsh.blogspot.com )

The whole content is based on these topics, related to women.

सुशील छौक्कर said...

इस ब्लॉग पर न सही
उस ब्लॉग पर सही
हो कहीं भी
पर बात चलनी चाहिए!
बिल्कुल जी। नई सोच, नए विचारों की गंगा निकलनी ही चाहिए।
चंद लाईन याद आ रही है। (सोना चौधरी की किताब "पायदान" से)
"जैसे ही लड़की कुछ नया करना चाहती है अकेली पड़ जाती है वरना लोग साथ देते ही हैं
एक देवी का,एक सती का, .......।"

विजय तिवारी " किसलय " said...

एक ओर जहाँ नारी , नारी की ही दुश्मन कही जाती है, कहीं शर्म को नारी का आभूषण कहा जाता है या फ़िर नारी को कहीं भोग्या या अश्लीलता को लाँघने वाली आधुनिक वास्तु मन जाता है आख़िर इन सब के पीछे दुनिया का ५०% पुरूष ही है अथवा स्वयं नारी भी बहुत हद तक इसकी जिम्मेवार भी है., संदर्भित एक आलेख भी देखें.. http://hindisahityasangam.blogspot.com/2009/01/blog-post_4775.html
- विजय

सुजाता said...

स्वप्नदर्शी जी ,

धन्यवाद !

ये केवल पिछले एक हफ्ते मे विभिन्न ब्लॉग्स पर आई कुछ पोस्ट्स हैं , प्रयास करूंगी कि हर हफ्ते स्त्री विमर्श सम्बन्धी पोस्ट्स यहाँ संग्रहित हो सकें।

स्वप्नदर्शी said...

Sorry, Sujata that's not me

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

सुजाता जी,
आप की पैनी द्रष्टि से देखे हुए कई अनदेखे ब्लोग यहाँ देख लिये
स्त्री सँघर्ष जारी है और रहेगा
शुक्रिया -
-- लावण्या

Jimmy said...

Nice blog good post yar keep it up

Site Update Daily Visit Now And Register

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shayari,jokes,recipes and much more so visit

copy link's
http://www.discobhangra.com/shayari/

http://www.discobhangra.com/create-an-account.php

KK Yadav said...

...Bat chali hai to door tak jani chahiye..nice post !!

Sanjay Grover said...

AAj sare chokherBale/BaliyaN chhutti par chale gaye kya?

आलोक साहिल said...

सुजाता जी,
अच्छा लगा जानकर कि इस दिशा में इतना कुछ लिखा जा रहा है,
बिल्कुल सही उद्धृत किया गया है दुष्यंत कुमार जी को कि,लिखे कोई भी पर जरुरी है कि लिखा जाए...
आलोक सिंह "साहिल"

अर्चना said...

katha desh men sudha arora ji ke stambh-ourat ki duniyan- ke band hone ki ghoshana se jo khaali pn utpann huaa tha wo aapake is blog ko padh ke door ho raha hai.

हें प्रभु यह तेरापंथ said...

सुजाताजी।

"पर बात चलनी चाहिए" पर मेरे ब्लोग पर प्रसारित एक विज्ञापन v/s नारी से लिन्क दिया एवम आलेख पर अपनी रॉय भी दी। मै आपका शुक्रगुजार हु कि आपने मेरे विचारो को समझा सराहा।

सुजाताजी आपको एक बात कहना चाहता हु आप नाराज नही हो। आपको किसी को ऐप्रिसियेट करना हो तो उसके घर(चिट्ठे) जाकर करना चाहिये, आप अपने घर पर से वैसा करते है तो थोडा अटपटा लगता है। क्यो कि हम लोग तो बेझिझक बधाई या क्रिटिक के लिये उनके वहॉ जाकर अपना मत बताते है। जैसे इस वक्त आपके ब्लोग पर आकर ही मै आपका शु़क्रिया अदा कर रहा हु। मै विश्वास करता हु कि आप जरुर मेरी बात पर ध्यान देगी।

जय हिन्द

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