Thursday, January 15, 2009

परीक्षण पोस्‍ट अनदेखा करें

तकनीकी जॉंच जारी है, यदि चोखेरबाली न दिख रहा हो तो कृपया पेज रीफ्रेश करें।

जॉंचा

11 comments:

Dr. Amar Jyoti said...

चोखेर बाली दिखेगी कैसे? वो तो आँख के अन्दर है।:)

आर. अनुराधा said...

दिखना जरूरी नहीं, महसूस कर पाएं वही महत्वपूर्ण है। :-))

Anonymous said...

The last four visibile here are those posted on 7th, 12th, 13th and 15th. Am using explorer.

Keep writing. All the best.

ss said...

मह्सूस कर पा रहा हूं!!!

सुजाता said...

अरे भई महसूस ही न करें , पढें और कमेंट भी
करें :)

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

:)

विनीत कुमार said...

अरे भई महसूस भी करें, पढ़े और कमेंट भी करें..

Anonymous said...

blogspot sae in bannae ki bhadhaii wab sab swikaary jo iskae hakdaar haen .
ab tak kisi nae nahin dee socha mae shuruvaat kar hee dun

अविनाश वाचस्पति said...

रचना जी मैंने तो मिलकर भी
बधाई दी, पर यह नहीं मालूम
कि शुरुआत थी कि उसके बाद।

खैर ... बधाई तो बधाई है
नंबर से,
शुरू से क्‍या फर्क
यह सदा, सदा साथ रहे
यह भावना है।

समस्‍त चोखेरबालियों
जो चोखा ही लिखती हैं सदा
और लिखती रहेंगी चोखा ही सदा
आंख की किरकिरी नहीं
आंख को सतर्क रहने के लिए
सचेतकता का है कारनामा।

किरकिरी सिर्फ उनके लिए
जो कंकड़ हैं सदा से
कंकड़ से ताकतवर
किरकिरी सदा से।

Sanjay Grover said...

.........स्त्री थी कि हंस रही थी



............और स्त्री थी कि हंस रही थी

वे ज़रा हैरान हुए कि
उनकी उपस्थिति में भी......

अब वे हंसे उसकी हंसी पर
फिर ठिठके

क्यों कि स्त्री थी कि हंस रही थी

अब वे हकबकाए
फिर घूरा उन्होंने ज़ोर से

मगर स्त्री फिर भी हंस रही थी

अब वे हमके, थमके, भभके
अंततः लपके
कि कुछ कर ही डालेंगे इसका

मगर वह और तेज़ हंसी

अब वे ढूंढा किए यहाँ-वहाँ वो ज़माना कि
जब उनके हंसने से वह
घबरा जाती थी, लाल हो उठती थी,
पल्लू सम्हालती थी,
आखिरकार रो ही पड़ती थी

मगर नहीं मिला उन्हें कहीं कुछ

और स्त्री थी कि हंस रही थी.............


-संजय ग्रोवर

www.anubhuti-hindi.org पर प्रकाशित

Astrologer Sidharth said...

परीक्षण जांच में कमेंट का पहला उदाहरण देख रहा हूं। :)

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