Monday, February 9, 2009

तो ऐसे शुरु हुआ चोखेरबाली वर्षगाँठ का कार्यक्रम

डॉक्यूमेंटेशन का काम विनीत ने सम्भाला था , सो रिपोर्ट मे देरी के लिए मैने उन्हें ही शिकायतें फॉरवर्ड कर दी हैं। अभी पहली किस्त है , इसके बाद आर.अनुराधा, पूजा प्रसाद और संगीता ..सभी की ओर से अपने अपने अनुभव रखे जाएंगे।
तस्वीर मे कौन कौन है ?

(बाएँ से दाएँ )मधु किश्वर ,राजकिशोर ,अनामिका,डॉ.सुकृता पाल कुमार, पूजा प्रसाद
(बाएँ से दाएँ) नीलिमा,डॉ.प्रेम सिंह,संगीता मनराल,सुजाता,आर.अनुराधा

तो ऐसे शुरु हुआ चोखेरबाली बर्षगांठ का कार्यक्रम

विनीत कुमार


 चोखेरबाली के निमंत्रण पत्र में निर्धारित समय के हिसाब से कार्यक्रम शुरु होने में अभी सात-आठ मिनट बाकी ही रहे होंगे। लोग अपने-अपने घरों से लाए छोले-चावल, पराठे और नीलिमा की ओर से दिए गए केले पर अभी भिड़े  ही थे कि अनामिका एकदम से अपने परिचित अंदाज में लोगों के बीच आ पहुंची। उस खाने-पीने के माहौल के बीच सलाम-नमस्ते का दौर शुरु हुआ। दिल्ली विश्वविद्यालय के एक्टिविटी सेंटर का कमरा जिसमें कि एक साथ सत्तर लोगों के बैठने की व्यवस्था है, सेमिनार हॉल का रुप लेने लगता है। लोग औपचारिक होने की कोशिश करते हैं,जल्दी-जल्दी समेटना चाहते हैं। विनय जो कि करीब पांच मिनट से अलग-अलग मसलों पर अपनी बात लोगों से शेयर कर रहा होता है, अनामिका के आते ही चुप हो जाता है। अनामिका लोगों को औपचारिक होते देख आते ही साफ कर देती है। इस आयोजन का मकसद साथ मिलकर सोचने की प्रक्रिया होनी चाहिए।  सबके पास अपने-अपने अनुभव की गठरी है। बेहतर हो, यहां हम सब एक-दूसरे से शेयर करें, बजाय इसके कि हममें से दो-चार लोग बोलें और बाकी सुनते रहें। अब ऑब्जेक्ट और सब्जेक्ट का मामला नहीं रह गया है। इस उत्तर-आधुनिक परिवेश में ऑब्जेक्ट और सब्जेक्ट के बीच की दीवारें दरक गयी है। इसलिए हम सब संवादधर्मिता के माहौल में बातचीत करें तो ज्यादा सही रहेगा। ये नहीं कि घर के एक मुच्छड़ और उसकी भाषा की तरह कोई एक बोले और बाकी लोग बस सुनते जाएं। क्यों न जिनके पास जो-जो सवाल हैं, जो ऑवजर्वेशन्स हैं, उन्हें जमा कर लें और फिर बारी-बारी से सब पर चर्चा करें। कार्यक्रम शुरु होने के पहले से ही सब् बार-बार इस बात पर जोर देते आ रहे थे कि इसे कम से कम औपचारिक बनाया जाए। अनामिका की इस घोषणा के बाद एक मुहर लग गयी कि कार्यक्रम का स्वरुप अनौपचारिक ही रहेगा। और यही क्रम अंत तक बना रहा। 

विनय जो अनामिका के आने पर अपनी बात अधूरी छोड़कर ही चुप हो गया था, अनामिका ने उसे फिर से अपनी बात रखने को कहा-आप बताइए, क्या बता रहे थे। विनय ने बताया कि वो इस मसले पर बात करना चाहता है कि स्त्रियों के बीच जो लेवर डिवीजन हुआ है, जो विस्थापन हुआ है, आए दिन आर्थिक ढांचों में जो बदलाव हो रहे हैं, इन सबका स्त्री मन पर, उसके जीवन पर क्या असर हो रहा है। विनय फिलहाल विस्थापन, स्त्री औऱ आर्थिक बदलावों पर काम कर रहे हैं,इसलिए चोखेरबाली कार्यक्रम के बहाने उनकी इच्छा रही कि इस मसले को भी विमर्श में शामिल किए जाएं। वक्ता के तौर पर अभी तक सिर्फ अनामिका ही आयी थीं। उन्होंने कहा कि पहले सबके बारे में कुछ जान लें,सवालों को जमा कर लें तो एकमुश्त उन पर बातचीत हो जाएगी।
आगे बैठे प्रणव प्रियदर्शी ने अपना परिचय देते हुए कहा- वो नवभारत टाइम्स डॉट कॉम से जुड़े हुए हैं औऱ ब्लॉगर के रुप में रिजेक्टमाल से। उनका मानना रहा कि ब्लॉगरों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है,आए दिन पचास-साठ हिन्दी के ब्लॉग बन रहे हैं लेकिऩ इसके वाबजूद भी यहां मुद्दों और कंटेट को लेकर रिपिटेशन बहुत है। एक ही सवाल बार-बार उठाए जाते हैं,उनके जबाब भी उसी तरह से दिए जाते हैं, नयी चीजें उतनी नहीं आ पाती जितनी कि ब्लॉग के स्तर पर अपेक्षा की जाती है। अनामिका ने चुटकी लेते हुए कहा कि-लगता है आपकी ये समस्या एडिटिंग से जुडी़ हुई है, प्रणव ने साफ किया कि- मैं मानता हूं कि ब्लॉग के लिए ये एक चिंता का विषय है, नए विषयों का नए संदर्भों में आना जरुरी है। 

जया शर्मा, प्रवासी स्त्री की बदलती छवियां,(साहित्य,समाज औऱ सिनेमा के संदर्भ में) पर दिल्ली विश्वविद्यालय से पीएच.डी कर रही है। जया के अनुसार पुरानी सामाजिक संरचनाएं, नयी संरचनाओं पर हावी होती जा रही है। यानि बदलाव के स्तर पर जो कुछ भी दिख रहा है, उसमें स्त्री के लिहाज से बात करें तो शोषण का स्तर अब भी कायम है। पुरानी संरचनाएं, नयी बनती संरचनाओं का उपयोग शोषण के स्तर को बनाए रखने के लिए कर रहे हैं। हॉल में मौजूद बाकी के लोग अपना परिचय देते और अपनी बात रखते कि तीन औऱ वक्ता बारी-बारी से आ गए। 
परिचय का क्रम बदल गया। अब तक एक-एक करके लोग अपना परिचय देते जा रहे थे, सारे वक्ताओं के आ जाने पर पूजा प्रसाद ने इन वक्ताओं का परिचय मौजूद लोगों के सामने रखा। 
और इस तरह बिना औपचारिक,अनौपचारिक होने के इंतजार में चोखेरबाली की वार्षिक संगोष्ठी शुरु हो चुकी थी। लोग एक-एक करके आते गए और देखते ही देखते दस मिनट के भीतर एक भी कुर्सी खाली नहीं रह पायी।.......क्रमशः 

8 comments:

दिनेशराय द्विवेदी said...

नजदीक होते हुए भी इस समारोह में शिरकत न कर पाने का अफसोस है। लेकिन हम भी बेटी को नयी जगह व्यवस्थित करने के महत्वपूर्ण काम में व्यस्त थे।

स्वप्नदर्शी said...

good, kuch to likha, yahan baithkar to atkal bhee nahee lagaayee ja sakatee hai..

Anonymous said...

चोखेर बाली की सालगिरह की सभी बाल-बालियों को बधाई हो, गोष्ठी करके सही तरीके से मनायी वर्षगांठ।

Sanjay Grover said...

*****अनामिका लोगों को औपचारिक होते देख आते ही साफ कर देती है। इस आयोजन का मकसद साथ मिलकर सोचने की प्रक्रिया होनी चाहिए। सबके पास अपने-अपने अनुभव की गठरी है। बेहतर हो, यहां हम सब एक-दूसरे से शेयर करें, बजाय इसके कि हममें से दो-चार लोग बोलें और बाकी सुनते रहें। अब ऑब्जेक्ट और सब्जेक्ट का मामला नहीं रह गया है। इस उत्तर-आधुनिक परिवेश में ऑब्जेक्ट और सब्जेक्ट के बीच की दीवारें दरक गयी है। इसलिए हम सब संवादधर्मिता के माहौल में बातचीत करें तो ज्यादा सही रहेगा। ये नहीं कि घर के एक मुच्छड़ और उसकी भाषा की तरह कोई एक बोले और बाकी लोग बस सुनते जाएं।*****
*****आए दिन पचास-साठ हिन्दी के ब्लॉग बन रहे हैं लेकिऩ इसके वाबजूद भी यहां मुद्दों और कंटेट को लेकर रिपिटेशन बहुत है। एक ही सवाल बार-बार उठाए जाते हैं,उनके जबाब भी उसी तरह से दिए जाते हैं, नयी चीजें उतनी नहीं आ पाती जितनी कि ब्लॉग के स्तर पर अपेक्षा की जाती है। *****
Achchhi shuruaat hai.
Vaise aisa hi ek vaktavya Rajendra Yadav ne kisi "Blogger-goshthi" meN de diya tha ki 'taknik ikkisviN sadi ki aur vichar solahviN sadi ke, nahiN chalega.' to bajaye swagat hone ke hungama shuru ho gaya tha.
Is hisaab se achchhi shruaat hai.

संगीता पुरी said...

कार्यक्रम के बारे में जानकर अच्‍छा लगा....सबको बहुत बहुत बधाई।

sandhyagupta said...

Aapka aayojan safal raha yah jankar khushi hui.Aapka prayas nirantar saarthak sanvad ko gati de.Shubkamnayen.

Arvind Mishra said...

तो ऐसे शुरू हुई नारी गोष्ठी !

विनय (Viney) said...

धन्यवाद विनीत! बिजनौर में श्रम प्रवासन पर सर्वे कर रहा हूँ. कुछ महत्त्वपूर्ण लैंगिक असमानता के भी मुदे दिख रहे हैं. समय मिलते ही लिखूंगा!

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