Tuesday, February 17, 2009

ब्लॉग जगत के बलात्कारी ब्वायज़

एक पुरानी पोस्ट

प्रासंगिक जानकर डाल  रही हूँ। अविनाश जी को चिंता रहती

थी कि 


चोखेरबालियाँ चुप क्यो है ? चोखेरबालियाँ चुप न थीं , न रहती हैं। लेकिन कोई उनके हलक मे उंगली डालकर 


अपनी  मनचाही बात उगलवाना चाहे यह सम्भव नही है।हम  स्त्री के सम्मान पर आघात का विरोध और निन्दा  


करते रहे हैं , करते रहेंगे॥  


खबर आई है और उसकी पुष्टि हो चुकी है सो ,अविनाश जी का कर्तव्य बनता है कि वे इसका जवाब दें। लड़की ने 


लिखित मे शिकायत की है और अविनाश जी नौकरी गँवा चुके हैं इसलिए अब चुप रहने का कोई फायदा नही है।


खोने को कुछ नही है सो सच बोलना चाहिए।

 




Monday, May 26, 2008

ब्लॉग जगत के बलात्कारी ब्वायज़

कल से कठपिंगल नामक एक नव ब्लॉगर जो कि बडे मठाधीश भी होते हैं बहुत परेशान हैं ! उन्होंने एक साथी बलात्कारी ब्लॉगर की अपराध की दास्तान हम सब को सुनाई और फिर जी भर यहाँ जांचने में तुल गए कि कौन उसपर कितना रिऎक्ट कर रहा है ! यश्वंत के बलात्कारी व्यक्तित्व की निंदा में चोखेरबाली समाज चांय चांय नहीं कर रहा वे इस बात से भी आहत हैं ! अविनाश ने कल बलात्कार की कथा को बहुत दम से बयान किया ! उन्होंने हमेशा की तरह अपनी पत्नी को घर पर ही रखा और ब्लॉग जगत के सबसे सेंसेटिव और ज़िम्मेदार नागरिक होने के नाते सब ब्लॉगरों को उनके नैतिक ड्यूटी के लिए उकसाया ! पर जैसा कि प्रमोद ने कहा यश्वंत पकडा गया क्योंकि वह फिजिकल एब्यूज़ कर बैठा था ! पर यहां के कई थानेदार मठाधीश जो कि समाज के हर मुद्दे पर सबसे तेज और संवेदनशील राय रखते हैं आजाद हैं और तबतक रहेंगे जबतक कि कोई फिजिकल एब्यूज न कर बैंठें !

ब्लॉग जगत के मोहल्ला की चारपाई पर बैठा एक ब्वाय बलात्कार की खबर दे रहा है दूसरा ब्वाय जेल से छूटा ही है ! चारपाई वाले ब्वाय की पत्नी घर के अंदर और बलात्कारी की पत्नी गांव में है ! अब बचीं ब्लॉग जगत की औरतें जिनके लिए मोहल्लापति ने नए संबोधन बनाना ,उनको उनके कर्तव्य बताना , उनके सम्मान और हित में बोलने वाले पुरुषों को पुरुष समाज का विभीषण बताना जैसी कई बातें इस ब्वाय ने बताईं हैं ! इसमें से एक ब्वाय स्त्री विमर्श जैसे कई विमर्शों की रिले रेस चलवाता है और चाहता है कि उसे हिंदी ब्लॉग जगत का सबसे बौद्दिक और समझदार ब्वाय समझा जाए ( क्योंकि वह बलात्कारी भी नहीं है ) जबकि दूसरे ब्वाय के द्वारा बलात्कार की खबर देता हुआ यहाँ चारपाई ब्वाय अपनी एक परिचित ब्लॉगर को " सनसनी गर्ल " दूसरी को छुटे सांड की तरह सींग चलाने वाली माताजी कहकर ही अपनी बात आगे बढा पाता है ! हमारे पास यश्वंत के बलात्कारी रूप के कोई फोटो नहीं हैं ( हो सकता है कोई ब्वाय जारी कर दे आजकल में ..) पर हमारे पास चारपाई ब्वाय का लिखा है

ScreenHunter_02 May. 25 13.15

आप कहें गे कहेंगे क्या अनूप तो कह ही रहे हैं कि नीलिमा ने ही उनको उकसाया है तो फिर यहाँ सब तो लाजमी है ! यश्वंत का भी क्या कसूर रहा होगा उस पीडिता ने भी उसको उकसाया होगा !अब चारपाई ब्वाय को उकसाया जाएगा तो वह किसी स्त्री को पहले तो भूखी सांड की तरह हर जगह दौडती ही कहेगा माताजी भी कह लेगा पर इससे ज्यादा मत उकसाओ ....! जाहिर है अपनी हदों को पार करने वाली औरत या आपकी गलती दिखाने वली औरत माताजी ही कलाऎगी क्योंकि वह सुकुमारी वाले काम कहां कर रही है ! विरोध के स्वर में बोलने वाली औरत को बूढी पके बाल वाली माताजी कहने से कितना चिढ सकती है वह ! वह जाकर शीशे में ध्यान से अपने को निहारने पहुंचेगी कि ऎसा मेरे चेहरे में क्या था कि मैं माताजी लगने लगी हूं , छुटी भूखी सांड की तरह लगती हूं .....बस वह उदास हो जाएगी चेहरे पर लेप मलेगी और अपने आप से वादा करेगी कि कल से किसी भी मर्द को ऎसे नहीं कहेगी और उनकी तारीफ के योग्य करम करेगी !

वैसे जब चारपाई ब्वाय एक बलात्कार की खबर देते हुए स्त्री के बारे में इन संबोधनों को कह रहा है तो उसके मन में यही न चल रहा होगा कि छुटी सांड सी दौडती फिरोगी तो यही सुनोगी ! और फिर कुछ भी फिजिकल या लैंग्वेज एब्यूज़ हो सकता है ! माई डियर तैयार रहा करो तुम्हारे साथ आगे कुछ भी हो सकता है ! वह सोचता होगा हमारी वाली को देखो घर में बंधी रहती है मजाल है उसके साथ कोई कुछ कर जाए ...!

ऎसे चारपाई ब्वाय को मसिजीवी पत्नीवादी ,प्रमोद सिंह भी "बदचलन " लगेगा ! दोनों ही अपनी पत्नी को बांधकर नहीं रख सके ! एक की भूखे सांड सी दौडती रहती है दूसरे की भाग जाती है ! हे चारपाई ब्वाय तुम नीलिमा को कठघरे में खडा करने के लिए जितने उतावले हो अगर उतने ही उलावले अपनी काठ की संवेदना को गलाने के लिए होते तो बात थी !

तुम तो पहुंचे गाल बजाते देखो साला पकडा गया बलात्कार ऎसे नहीं किया जाता साले को कितनी बार समझाया था ! जो करो ऎसे करो कि पकडे न जाओ ! बोधि जी को देखो बोला भी बाद में पलट भी गए बच गए ! मुझे देखो सनसनी गर्ल कहा था तुरंत मिटा दिया साथ ही यह कहने के ऎतराज में आई टिप्पणी भी मिटा दी ! एकदम साफ कोई सबूत नहीं ! पर भूखी सांड सी पीछे पडेगी तो आगे का कुछ नहीं कह सकता ! मैं कहता था न मैं बडा बाप हूं मुझसे सीखो ! स्त्री विमर्श भी करो स्त्री का एब्यूज़ भी करो ! तरीका मुझसे सीखो -मैंने कई बार कहा था ! तुम ठहरे कच्चे खिलाडी और जल्दबाज ..खैर भुगतो !

तो हे चारपाई ब्वाय हिंदी व्लॉग जगत की मुझ सी भूखे सांड सी बेवजह जगह -जगह दौडती औरत जिसमें तुमने अपनी माताजी का रूप देखा , पत्रकार स्‍मृति दुबे जिनमें तुम्हें सनसनी गर्ल ( कॉल गर्ल ,बार गर्ल ,पिन अप गर्ल ,सिज़्लिंग गर्ल जैसी ही कोई चीज़ .....जो तुम औरतों में देखते होंगे ..) प्रत्यक्षा , सुजाता मनीषा पांडे जैसी तमाम औरतें बस अब तुम्हारी चारपाई की ओर देख रही हैं ! चारपाई पकडे रहना बलात्कारी ब्वाय को तो हम  और कानून मिलकर देख ही लेंगे ,साथ की कामना करेंगे कि और कोई बलात्कारी ब्वाय उगने न पाए !  आमीन !

9 comments:

roushan said...

हाँ अब हम इंतज़ार कर रहे हैं अविनाश जी का . आपने सही ही कहा है कि अविनाश जी का कर्तव्य बनता है जवाब दे.

sandeep sharma said...

क्यों फोकट की लडाई कर रहे हो सब....
ब्लॉग पर आप (ब्लोग्रिये) उल्टा-सीधा इसीलिए लिखते हैं क्योकिं लोगो का ध्यान उधर जाए. आप लोग उसे चर्चा का विषय नहीं बनायेंगी तो, कोई उसे देखेगा भी नहीं. वैसे भी देश में कितनी मगज़िने छपती है. भद्दी-भद्दी. गोबर को देखना बंद कर दे तो चार दिन में अपने-आप ही सुखकर खाद बन जाएगा....

Anonymous said...

गोबर को देखना बंद कर दे तो चार दिन में अपने-आप ही सुखकर खाद बन जाएगा....
chintan ka star kafi uncha hai.

Anonymous said...

क्‍या सचमुच एक झूठ से सब कुछ ख़त्‍म हो जाता है?

मुझ पर जो अशोभनीय लांछन लगे हैं, ये उनका जवाब नहीं है। इसलिए नहीं है, क्‍योंकि कोई जवाब चाह ही नहीं रहा है। दुख की कुछ क़तरने हैं, जिन्‍हें मैं अपने कुछ दोस्‍तों की सलाह पर आपके सामने रख रहा हूं - बस।

मैं दुखी हूं। दुख का रिश्‍ता उन फफोलों से है, जो आपके मन में चाहे-अनचाहे उग आते हैं। इस वक्‍त सिर्फ मैं ये कह सकता हूं कि मैं निर्दोष हूं या सिर्फ वो लड़की, जिसने मुझ पर इतने संगीन आरोप लगाये। कठघरे में मैं हूं, इसलिए मेरे लिए ये कहना ज्‍यादा आसान होगा कि आरोप लगाने वाली लड़की के बारे में जितनी तफसील हमारे सामने है - वह उसे मोहरा साबित करते हैं और पारंपरिक शब्‍दावली में चरित्रहीन भी। लेकिन मैं ऐसा नहीं कह रहा हूं और अभी भी पीड़‍िता की मन:स्थिति को समझने की कोशिश कर रहा हूं।

मैं दोषी हूं, तो मुझे सलाखों के पीछे होना चाहिए। पीट पीट कर मुझसे सच उगलवाया जाना चाहिए। या लड़की के आरोपों से मिलान करते हुए मुझसे क्रॉस क्‍वेश्‍चन किये जाने चाहिए। या फिर मेरी दलील के आधार पर उसके आरोपों की सच्‍चाई परखनी चाहिए। लेकिन अब किसी को कुछ नहीं चाहिए। पी‍ड़‍िता को बस इतने भर से इंसाफ़ मिल गया कि डीबी स्‍टार का संपादन मेरे हाथों से निकल जाए।

दुख इस बात का है कि अभी तक इस मामले में मुझे किसी ने भी तलब नहीं किया। न मुझसे कुछ भी पूछने की जरूरत समझी गयी। एक आरोप, जो हवा में उड़ रहा था और जिसकी चर्चा मेरे आस-पड़ोस के माहौल में घुली हुई थी - जिसकी भनक मिलने पर मैंने अपने प्रबंधन से इस बारे में बात करनी चाही। मैंने समय मांगा और जब मैंने अपनी बात रखी, वे मेरी मदद करने में अपनी असमर्थता जाहिर कर रहे थे। बल्कि ऐसी मन:स्थिति में मेरे काम पर असर पड़ने की बात छेड़ने पर मुझे छुट्टी पर जाने के लिए कह दिया गया।

ख़ैर, इस पूरे मामले में जिस कथित क‍मेटी और उसकी जांच रिपोर्ट की चर्चा आ रही है, उस कमेटी तक ने मुझसे मिलने की ज़हमत नहीं उठायी।

मैं बेचैन हूं। आरोप इतना बड़ा है कि इस वक्‍त मन में हजारों किस्‍म के बवंडर उमड़ रहे हैं। लेकिन मेरे साथ मुझको जानने वाले जिस तरह से खड़े हैं, वे मुझे किसी भी आत्‍मघाती कदम से अब तक रोके हुए हैं। एक ब्‍लॉग पर विष्‍णु बैरागी ने लिखा, ‘इस कि‍स्‍से के पीछे ‘पैसा और पावर’ हो तो कोई ताज्‍जुब नहीं...’, और इसी किस्‍म के ढाढ़स बंधाने वाले फोन कॉल्‍स मेरा संबल, मेरी ताक़त बने हुए हैं।

मैं जानता हूं, इस एक आरोप ने मेरा सब कुछ छीन लिया है - मुझसे मेरा सारा आत्‍मविश्‍वास। साथ ही कपटपूर्ण वातावरण और हर मुश्किल में अब तक बचायी हुई वो निश्‍छलता भी, जिसकी वजह से बिना कुछ सोचे हुए एक बीमार लड़की को छोड़ने मैं उसके घर तक चला गया।

मैं शून्‍य की सतह पर खड़ा हूं और मुझे सब कुछ अब ज़ीरो से शुरू करना होगा। मेरी परीक्षा अब इसी में है कि अब तक के सफ़र और कथित क़ामयाबी से इकट्ठा हुए अहंकार को उतार कर मैं कैसे अपना नया सफ़र शुरू करूं। जिसको आरोपों का एक झोंका तिनके की तरह उड़ा दे, उसकी औक़ात कुछ भी नहीं। कुछ नहीं होने के इस एहसास से सफ़र की शुरुआत ज़्यादा आसान समझी जाती है। लेकिन मैं जानता हूं कि मेरा नया सफ़र कितना कठिन होगा।

एक नारीवादी होने के नाते इस प्रकरण में मेरी सहानुभूति स्‍त्री पक्ष के साथ है - इस वक्‍त मैं यही कह सकता हूं।

सुजाता said...

अच्छा है कि अविनाश जी का जवाब आ गया है। ध्यान रहे कि यह मामला विश्वविद्यालय का मामला है जिसे 15 D के तहत , पुलिस का नही है,और विश्वविद्यालय कमेटी खबर की पुष्टि के बाद ही समिति का गठन करती है। समिति द्वारा अविनाश जी को बुलाया जाना चाहिए।सम्भव है कि यह कार्यवाही अभी हो, और तब अविनाश जी अपना यह स्पष्टीकरण दे सकते हैं।

Anonymous said...

जब भी कभी ऐसी कोई बात होती हैं तो उस स्त्री को जिस ने शिकायत दर्ज करायी होती हैं या तो चरित्र हीन या मानसिक रूप से कमजोर का तमगा दिया जाता हैं . अगर किसी का चरित्र ख़राब हैं और सब जानते हैं तो उसका साथ ??? और जो मानसिक रूप से कमजोर हो उसका भी पता चल ही जाता हैं .
अफ़सोस हैं

मनीषा पांडे said...

मांग है तो आपूर्ति रहेगी ही वाली पोस्‍ट पर कोई बेनामी कमेंट था कि मैंने अविनाश की तरफ से उस लड़की को डराने-धमकाने में मदद की। हालांकि ऐसी मूर्खतापूर्ण बातों की सफाई देने की कोई जरूरत नहीं होती, लेकिन फिर भी यह कहना जरूरी है कि मैं अविनाश की ऐसी किसी कोशिश में शामिल नहीं थी। क्‍या मेरे सारे स्‍त्रीवाद की यही परिणति होनी अब बाकी रह गई है कि मैं किसी लड़की को डराने धमकाने का काम करूं। उल्‍टे किसी लड़की को कोई धमकाए तो मैं उसके साथ खड़ी होंगी।

Anonymous said...

जो लोग अविनाश को जानते हैं, वो जानते हैं कि वो एक घटिया आदमी है। इस मामले में साज़िश वाली थ्योरी में इसलिए दम नहीं है, क्योंकि खुद उसने अपनी सफाई में माना है कि उसने लड़की को दफ्तर बुलाया और उसे घर छोड़ने का ऑफर दिया और घर जाकर छोड़ा भी। क्या साज़िश करने वाला उसके दिमाग में बैठकर साजिश कर रहा था, जो उसने लड़की को बुलाया और फिर उसे छोड़ने का ऑफर दिया? सच तो ये है कि अविनाश ऐसा ही है। चूंकि आपलोग उसे उसके ब्लॉग के माध्यम से जानते हैं इसलिए उसके लिए सहानुभूति हो रही है और चूंकि आपलोग उस लड़की को नहीं जानते, इसलिए उसकी मनस्थिति का अंदाज़ा नहीं लगा पा रहे। कुछ मित्रों ने उस लड़की के चरित्र पर भी टिप्पणी की है। वो यह भूल रहे हैं कि आरोप लगाने वाली लड़की वह कोई वेश्या या कॉल गर्ल नहीं, बल्कि देश के एक महत्वपूर्ण पत्रकारिता संस्थान में पढ़ रही छात्रा है। क्या उसे अपनी इज्जत और करियर का ख्याल नहीं होगा? आखिर वह क्यों किसी को फंसाने के लिए अपनी इज्जत दांव पर लगा देगी? यह आपलोगों की स्त्रीविरोधी मानसिकता बोल रही है, जो स्त्रियों को सिर्फ भोग की वस्तु समझती है। अविनाश के पैरोकार उसे वामपंथ और स्त्रीवाद से जोड़ रहे हैं। आखिर कितना जानते हैं वो अविनाश को? क्या उन्हें पता है कि वो किस दर्जे का अय्याश और कुंठित आदमी है? क्या उन्हें उसका पुराना इतिहास मालूम है? क्या उन्हें पता है कि पिछले दफ्तरों में उसने क्या-क्या गुल खिलाए और किन हालात में पिछले दफ्तरों से भी उसे निकाला गया? आखिर उसी के खिलाफ क्यों होती रहती हैं साजिशें? क्या दास इतना महान और नामचीन व्यक्ति है कि उसके खिलाफ इस स्तर की साजिश होगी? दास के वकीलो, आपलोग भी या तो उसी जैसे हो या फिर भोले हो या अनभिज्ञ हो। सच ये है कि दास बहुत गंदा आदमी है। पहले भी उसपर बलात्कार की कोशिश के आरोप लगे हैं। अभी वह इतना बड़ा नहीं हुआ है कि उसे फंसाने के लिए बार-बार लड़कियों को मोहरा बनाया जाएगा। जहां तक उस लड़की के पुलिस में नहीं जाने का सवाल है तो आप जानते हैं कि वह क्यों नहीं गई होगी। वह निश्चित रूप से उस फजीहत और परेशानी से बचना चाहती होगी, जो सबको पता है कि पुलिस में एक बार चले जाने पर तमाम औरतों को झेलनी पड़ती है। उसके पुलिस में नहीं जाने को अविनाश का ढाल मत बनाओ, उसे उस लड़की की मजबूरी के तौर पर देखो।

Randhir Singh Suman said...

nice

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