Friday, March 6, 2009

टीनेज प्रेग्नेंसी की समस्या का अपना भारतीय संस्करण

मै कल से हैरान हूँ , या अनजान हूँ ? कि जिस समय हमारे लिए ब्रिटेन मे टीनेज प्रेग्नेंसी विवाद का विषय बन रही थी और 13 साल के पिता के जगह जगह साक्षात्कार व तस्वीरें छप रही थीं उसी समय उसी युग मे म्हारा राजस्थान मे 13 वर्षीय बालिका माँ बन गयी जिसका ज़िक्र शायद ही कहीं उस जज़्बे से हुआ जिस जज़्बे से ब्रिटेन के बच्चा-पिता का हुआ।बून्दी मे जब 13 वर्षीय बालिका बच्चे को जन्म दे रही थी तो उसके पीछे ब्रिटेन के जोड़े की तरह कोई यौन इच्छा या प्रयोगशीलता नही थी,वह मजबूरी थी ,लाचारी थी,शर्म की बात थी।
ब्रिटेन के 13 साल के पिता और 15 साल की माँ को यह निर्णय करने का अधिकार था कि वे बच्चा पैदा करना चाहते हैं या नही और अब जब बच्चा आ गया है तो उसके खर्च की चिंता भी उसे नही करनी है।
मै सोच रही हूँ बून्दी मे माँ बनी उस 13 साल की लड़की के बारे मे जिसका सारा जीवन लगभग तबाह सा है।अपने बचपन मे उस पर बच्चे के पालन पोषण की जो ज़िम्मेदारी आ पड़ी है न उसे इसकी कोई जानकारी थी न ही किसी ने उसकी इच्छा जानना चाही थी कि क्या वह बच्चा चाहती है? या यौन सम्बन्ध भी चाहती है या नही? ऐसे मे सवाल यह भी उठता है कि स्वतंत्र इच्छा का सवाल क्यों भारतीय सन्दर्भों मे किसी खाई खड्ड मे औन्धे मुँह जा गिरता है। जहाँ ब्रिटेन की एक दिन  गर्भनिरोधक गोली लेना भूल जाने की वजह से माँ बनी वही बून्दी की यह लड़की बेसहारा हो जाने ,ज़बरन शादी और बलत्कृत होने के बाद माँ बनी। उस बच्चे के पालन की ज़िम्मेदारी हमारे लोकतंत्र और हमारी संस्कृति  मे उस माँ के अलावा क्या किसी की नही होगी ,क्योंकि माँ ही जननी है, वही सृजनकर्ता है,वही संस्कार देती है,वही सब कुछ है?
यह वाकई दुखद है!और मै अब भी इंतज़ार मे हूँ कि यह खबर एक मुख्य खबर बन  पाए और टीनेज प्रेग्नेंसी की समस्या के इस भारतीय स्वरूप पर जम कर चर्चा हो !

राष्ट्रीय सहारा के मुख्य पृष्ठ पर कल यह खबर थी -

13 साल की बच्ची मां बनी, पति पर रेप का के

जयपुर (एसएनबी)। बूंदी जिले के बराड़ क्षेत्र में ग्राम कंवरपुरा में तेरह वर्षीय बालिका ने एक बच्ची को जन्म दिया है। पुलिस के अनुसार बालिका शादीशुदा है। पुलिस ने उसके पति के खिलाफ नाबालिग पत्नी के साथ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया है। 
यहां राज्य पुलिस मुख्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार बूंदी जिले के बराड़ क्षेत्र के कंवरपुरा गांव की यह बालिका लीला (काल्पनिक नाम) जब दस वर्ष की थी तो उसके पिता की मौत हो गई। इसके कुछ माह बाद मां भी उसे छोड़कर नाते (मायके वालों द्वारा पैसे लेकर दूसरे पुरूष के पास बेटी को भेजने की प्रथा) चली गई। सिर से पिता का साया उठने और मां के दूसरे घर चले जाने के बाद मजदूरी की तलाश में लीला पास के कस्बे बराड़ आ गई जहां एक युवक प्रकाश के साथ उसके प्रगाढ़ संबंध हो गए। बाद में नादान लीला ने अपनी से दोगुनी उम्र के प्रकाश के साथ बकायदा विवाह कर लिया। गर्भवती होने के बाद बालिका ने आज बराड़ के एक सरकारी अस्पताल में स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक तेजराज ने बताया कि नाबालिग पत्नी के साथ यौन संबंध को दुष्कर्म मानते हुए पति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है

9 comments:

मुनीश ( munish ) said...

Right Sujata ,but this is merely one of those innumerable incidents which show the horrific divide between Haves & Havenots . It has nothing to do with gender bias ,this is purely an economic issue and by taking the unfortunate girl's husband in custody this sick society is only adding insult to her injury.Action should have been there at the time of her marriage, it is sheer cruelty now.

आर. अनुराधा said...

निश्चित रूप से यह निरा टीनेज प्रेगनेंसी का मामला नहीं, उससे कहीं आगे, सोशल, इकॉनमिक मुद्दा है। और अपनी करह का अकेला भी नहीं। इसके हजारो-हजार पहलू हैं, जिस पर विस्तार से बात होनी चाहिए। इस मुद्दे पर थोड़ा पढ़ने का मन बन रहा है मेरा भी।

दिनेशराय द्विवेदी said...

बहुत ही दुखद खबर है। खुद पर शर्म आ रही है। बच्चा पैदा करने में सक्षम होने के पहले तो कुत्ते भी अपनी मादाओं के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करते। इस पर हम कहते हैं हम सामाजिक प्राणी है। हमारी शिक्षा और व्यवहार को साधुवाद!

sanjeev persai said...

ब्रिटेन का 13 साल का पिता फर्जी ख़बर साबित हुआ है, उसके पिता ने ही मीडिया से पैसे ऐंठने के लिए ये झूठी ख़बर प्रचारित की थी. सो वो बात तो ख़तम ही हो गयी.
रही बात १३ साल के बच्ची के माँ बनने की तो मेरा प्रतिरोध इस बात को लेकर है की स्त्री विमर्श ब्लॉग और शहरी क्षेत्रों में तो प्रारम्भ हो चुका है लेकिन भारत का ग्रामीण इलाका अभी तक इसकी परछाई से अछूता है.
अन्यथा न लिजियेगा लेकिन जिन परिस्थितियों में हम ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के प्रति असंवेदनशीलता और भ्रांतियां देखते हैं, उनसे तरस और नफरत दोनों ही होते हैं.

Unknown said...

इस तरह की घटनाएं समाज में होती रहती हैं । कभी हवा मिली तो ही चर्चा में आती है वरना दब जाती है । दुखद है यह।

स्वप्नदर्शी said...

ये मुद्दा नाबालिग़ लड़की के रेप से आगे का मुद्दा है। क्या इस स्थिति को रोकने मे सरकार , समाज या पुलिस ने कोई भूमिका निभायी? अगर नही तो क्या उसके पति पर मुकद्दमा चला कर इस नयी नयी बनी माँ और उस छोटे बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी किसी ने ली है? अगर पति भी जेल चला गया तो ये दोनों मर जायेंगे। और ये जो नया बच्चा है उसका जीवन भी अपनी माँ से अलग नही होगा। पति को जेल भेजने से ज्यादा ज़रूरी कदम है उस परिवार की सहायता। और इस तरह का स्पोर्ट सिस्टम तैयार करना, की अभी भी आगे के जीवन मे नयी संभावनाए तलाश की जा सके. इस तरह के काननों और जैसी रवायत है कानून वालों की , एक संभावना ये बन जायेगी की पिता की जिम्मेदारी लेने कोई आगे नही आयेगा, और ये बन्दा भी भाग जायेगा.
क्या भविष्य मे इस तरह की बच्चियों के लिए कोई ऐसी जगह हो सकती है, जहाँ वों असमय वासना का शिकार न बने?

Arun Arora said...

नही जी हमारे यहा लोग्पो को स्लम डाग और ब्रिटेन की घटनाओ पर बात करके ही समाज का प्रतिबिंब पर चर्चा करना है .

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

सुजाता जी,

१३ साल की मेरी नानी जी भी थीँ जब उन्होँने मेरे बडे मामा जी को जन्म दिया था -
समय बदला है
आज १८ साल से छोटी लडकी नाबालिग कहलाती है -
और शादी क्यूँ करवाई उस १३ साल की कन्या की ? उस परिवार पर भी कानून लागू होना चाहीये

- स्त्री की इच्छा के विरुध्ध, जोर जबरदस्ती कानूनन दँडनीय अपराध है और सामाजिक दुष्कर्म

फिर भी, यहाँ भी ऐसे किस्सी होते हैँ -

स्त्री की मानसिक व शारीरिक सुरक्षा
सर्वोपरी मुद्दा है --
स स्नेह,
- लावण्या

dr amit jain said...

मेरी बात आप यहाँ सुन सकते है

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