Monday, March 23, 2009

स्त्री सशक्तिकरण में सबसे महत्वपूर्ण बात -ग्लैमर ,आत्मविश्वास और जागरूकता

समाचार चैनलों मे किसी महिला एंकर के बारे मे आपकी क्या राय बनती है?
आमतौर पर लोगों की क्या राय है इसे ही जानने के लिए मीडिया खबर द्वारा एक ऑनलाइन सर्वे कराया गया। इस सर्वे के नतीजों के हिसाब से -

सर्वे में 44.72% लोगों ने न्यूज़ चैनलों में स्त्रियों के चयन के आधार को अपीयरेंस माना। दूसरी तरफ चैनल के ब्रांड इमेज में महिला पत्रकारों के योगदान को 65.85% लोगों ने अपीयरेंस तक ही सीमित माना। जबकि शिफ्ट और वर्किंग आवर को स्त्री पत्रकारों को सबसे बड़ी समस्या माना गया। और इसके पक्ष में 37.40% लोगों ने वोट किया। 46.34% लोगों ने महिला पत्रकारों के लिहाज से एनडीटीवी इंडिया को सबसे बेहतर माना। चैनलों की स्त्रियों से समाज में सबसे ज्यादा किसका प्रसार होता है, सर्वे के इस सवाल का परिणाम अप्रत्याशित रहा और 44.72%लोगों ने यह माना कि चैनलों की स्त्रियों से समाज में महिला जागरूकता और आत्मविश्वास का प्रसार होता है।



जिन बातों को हाइलाइट किया गया है उनमे पहली बार मे मुझे भयंकर अंतर्विरोध प्रतीत होता है।(पर यह शायद अंतर्विरोधों का ही समय है , एक उत्तर आधुनिक समय) सर्वे के नतीजे साफ तौर पर कहते हैं कि अधिकांश लोग मानते हैं कि किसी न्यूज़ चैनल के प्रसार मे स्त्री एंकर की भूमिका केवल उसके अपीयरेंस से तय होती है और एंकर होने के लिए ग्लैमरस होना या महिला होना ही काफी है, वही उनके चयन का आधार है।
ऐसे मे आश्चर्य की बात यह है कि जब इन्ही लोगों से पूछा गया कि महिला एंकर समाज मे किस बात का प्रसार करती हैं(प्र.10) तो वे पहले नम्बर पर वोट करते हैं - आत्मविश्वास और जागरूकता को। और दूसरे नम्बर पर ग्लैमर का नाम आता है।आंकड़ों को इकट्ठा करने की अपेक्षा उनकी व्याख्या कर पाना मुश्किल काम है। एक निरा समाजशास्त्रीय काम !इसके लिए बहुत ज़रूरी है कि सबसे पहले यह जाना जाए कि इस सर्वे का "सैम्पल" क्व उसका साइज़ क्या है?वे कौन लोग थे जो वोट कर रहे थे?ज़ाहिर सी बात है कि इससे किसी नतीजे पर पहुँचने मे काफी अंतर आ जाता है।दूसरी बात - प्रश्न संख्या 8,9 व 12 सीधे सीधे स्वयम महिला एंकर की सोच से जुड़ॆ हैं और उन्ही का जवाब सही व्याख्या तक पहुँचने मे मदद कर सकता था।
फिर भी, इस नतीजे के मतलब तक पहुँचने की कोशिश करूँ तो प्रतीत होता है कि अधिकांश लोगों के लिए स्त्री सशक्तिकरण के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है -ग्लैमर ,आत्मविश्वास और जागरूकता। इन्हें प्राथमिकता के क्रम मे ही लिखा है।)उल्लेखनीय है केवल आत्मविश्वास और जागरूकता से सफलता नही मिलती। यह वह सोच है जो आमतौर पर झलकती है।

सर्वे मे जो 12 सवाल पूछे गए थे वे हैं -

1. हिंदी के महिला न्यूज़ एंकरों में आप किसे सर्वश्रेष्ठ न्यूज़ एंकर मानते हैं ?
2. हिन्दी न्यूज चैनल की सबसे ग्लैमरस एंकर आप किसे मानते हैं?
3. आमतौर पर न्यूज चैनलों में स्त्रियों के चयन का आधार होता है..
4. किसी भी चैनल में सबसे ज्यादा महिला पत्रकार किस काम पर लगाए जाते हैं-
5. चैनल की ब्रांड इमेज में महिला पत्रकारों का योगदान किस स्तर पर माना जाता
6. मौजूदा हालत में स्त्री पत्रकारों की समस्या है-
7. स्त्रियों का मीडिया के प्रति बढ़ते रुझान की वजह है
8. ज्यादातर महिला पत्रकार किस फील्ड की रिपोर्टिंग पसंद करती है
9. महिला पत्रकारों के लिहाज से किस चैनल का महौल सबसे बेहतर है
10. चैनल की स्त्रियों से समाज में सबसे ज्यादा प्रसार होता है
11. महिला एंकरों से ऑडिएंस के जुड़ने की वजह होती है-
12. टीवी पत्रकार के तौर पर ज्यादातर स्त्रियां अपने को किस रुप में देखना पसंद करती हैं

4 comments:

इरशाद अली said...

aap isko daekhe
NDTV की नगमा सहर
http://irshadnama.blogspot.com/2009/02/ndtv.html

मोना परसाई said...

सुजाता जी,
अच्छी पोस्ट और विषय
दरअसल महिला के संवाद की ताकत अत्यंत तीव्र होती है और जब इस ताकत के साथ विचारों का प्रवाह होता है तो ये सामंजस्य उसे औरों से बेहतर बनाता है. महिला पत्रकारों के विषय में यही बात महत्त्वपूर्ण है.
महिला सशक्तिकरण के लिए सिर्फ आत्मविश्वास और जागरूकता ही आवश्यक है, लेकिन पुरुषवादी मानसिकता इसमें ग्लैमर को जोड़कर वास्तविकता को भ्रमित करने का प्रयास करती है.

आर. अनुराधा said...

?????!!!!!
mediakhabar.com/topicdetails.aspx?mid=107&tid=808

गौर फरमाएं-

"कुल 4125 लोगों ने सर्वे में भाग लिया। सर्वे में मीडिया और पत्रकारिता से जुड़े लोगों ने भी भाग लिया और इनकी संख्या 650 के करीब रही। इन्हें व्यक्तिगत स्तर पर मीडिया का ऑनलाइन सर्वे फॉर्म भेजा गया। सर्वे में कुछ सवाल ऐसे थे जो सिर्फ पत्रकारों के लिए था। मसलन महिलाओं के लिए कौन से चैनल का माहौल सबसे अच्छा है।

वोटिंग करने की प्रक्रिया में हमने ऐसी व्यवस्था की थी कि एक बार वोटिंग करने के तत्काल बाद आप उसी कंप्यूटर या आईपी एड्रेस से दुबारा वोट नहीं कर सकते। 12 घंटे के बाद ही वोट कर चुका व्यक्ति दुबारा वोट कर सकता था।"...
"न्यूज़ चैनलों की सबसे ग्लैमरस महिला एंकर के लिए मुख्य प्रतिस्पर्धा एनडीटीवी की अफसां अंजुम और आजतक की श्वेता सिंह के बीच रहा। "...

बालसुब्रमण्यम लक्ष्मीनारायण said...

पता नहीं किन फिजूल के कामों में आप अपना समय बर्बाद करती रहती हैं। सबसे ग्लेबरस ऐंकर गर्ल कोई भी हो, हमें क्या, या महिला आंदोलन को ही क्या? क्या स्त्री आंदोलन के पास और कोई विषय नहीं रह गया है?

भारत के स्त्री आंदोलन की मुख्य कमी यही है कि वह अभिजातवर्गीय और अंग्रेजी-परस्त शूरू से रहा है। उसे निर्धन और ग्रामीण स्त्रियों की कठिनाइयों से ज्यादा सरोकार कभी नहीं रहा है।

इस तरह की गतिविधियों में बहुमूल्य समय (आपका और हमारा) नष्ट कराकर, आपने एक बार फिर यही साबित किया है।

अनुप्रिया के रेखांकन

स्त्री को सिर्फ बाहर ही नहीं अपने भीतर भी लड़ना पड़ता है- अनुप्रिया के रेखांकन

स्त्री-विमर्श के तमाम सवालों को समेटने की कोशिश में लगे अनुप्रिया के रेखांकन इन दिनों सबसे विशिष्ट हैं। अपने कहन और असर में वे कई तरह से ...