Tuesday, May 19, 2009

चुनाव मे आधी आबादी की भागीदारी

चुनाव परिणाम से लोग हकबकाए है, और चुनाव से पहले महिला और दलित सशक्तिकरण के नाम पर मायावती को ओबामा के समकक्ष भी खडा किया जा चुका है। पर एक चीज़ जिस पर इस पूरे चुनाव मे बहस नही हुयी वों है महिलाओं से जुड़े मुद्दे, सुरक्षा के, सार्वजानिक जीवन मे , कार्यस्थल मे गैर बराबरी के मुद्दे। चुनाव मे महिलाओं की भागीदारी की स्थिति पर नज़र डाले तो वों ५-९% के बीच है । लेफ्ट, राईट, सेण्टर, सभी दलों मे महिला उम्मीदवारों की उपस्थिति हाशिये पर है। ये शायद हमारी आँख मे उंगली डालकर दिखाने के लिए काफी है की भारतीय लोकतंत्र मे औरते बराबरी पर नही बल्कि हाशिये पर है। और लोकतंत्र मे उनकी शिरकत आजादी के इतने सालो के बाद बढ़ने के बजाय कम हुयी है। ...................

Party wise Candidate List

( http://www।indian-elections.com/) से साभार

PARTY ABBRE PARTY NAME PARTY TYPE Male Female Total
BJP Bharatiya Janata Party N 334 30 364
BSP Bahujan Samaj Party N 415 20 435
CPI Communist Party of India N 32 2 34
CPM Communist Party of India (Marxist) N 62 7 69
INC Indian National Congress N 372 45 417
NCP Nationalist Congress Party N 27 5 32
AC Arunachal Congress S 1
1
ADMK All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam S 31 2 33
AGP Asom Gana Parishad S 12
12
AIFB All India Forward Bloc S 10
10
AITC All India Trinamool Congress S 27 6 33
BJD Biju Janata Dal S 11 1 12
CPI(ML)(L) Communist Party of India (Marxist-Leninist) (Liberation) S 61 4 65
DMK Dravida Munnetra Kazhagam S 13 3 16
FPM Federal Party of Manipur S 1
1
INLD Indian National Lok Dal S 19 1 20
JD(S) Janata Dal (Secular) S 39 4 43
JD(U) Janata Dal (United) S 70 3 73
JKN Jammu & Kashmir National Conference S 6
6
JKNPP Jammu & Kashmir National Panthers Party S 7
7
JKPDP Jammu & Kashmir Peoples Democratic Party S 2 1 3
JMM Jharkhand Mukti Morcha S 7 2 9
KEC Kerala Congress S 1
1
KEC(M) Kerala Congress (M) S 1
1
MAG Maharashtrawadi Gomantak S 2
2
MDMK Marumalarchi Dravida Munnetra Kazhagam S 4
4
MNF Mizo National Front S 1
1
MPP Manipur People's Party S
1 1
MUL Muslim League Kerala State Committee S 10
10
NPF Nagaland Peoples Front S 3
3
PMK Pattali Makkal Katchi S 6
6
RJD Rashtriya Janata Dal S 40 1 41
RLD Rashtriya Lok Dal S 29 4 33
RSP Revolutionary Socialist Party S 19 1 20
SAD Shiromani Akali Dal S 9 1 10
SAD(M) Shiromani Akali Dal (Simranjit Singh Mann) S 6
6
SDF Sikkim Democratic Front S 1
1
SHS Shivsena S 53 3 56
SP Samajwadi Party S 213 24 237
TDP Telugu Desam S 29 4 33
UGDP United Goans Democratic Party S
1 1
UKKD Uttarakhand Kranti Dal S 4
4

10 comments:

दिनेशराय द्विवेदी said...

महिलाओं की राजनीति में उपस्थिति बढ़नी चाहिए। लेकिन इस के लिए तो उन्हें सक्रिय होना पड़ेगा। महिला प्रकोष्ठों से काम न चलेगा।

सुजाता said...

भारतीय राजनीति मे महिलाओं का सक्रिय होना उतना ही कठिन है जितना कि और भी किसी ऐसे क्षेत्र मे जहाँ उनके हाथ सीधे सीधे ताकत और सत्ता आती हो।
सुरक्षा के जिस घेरे मे भारतीय स्त्रियाँ कैद हैं उससे निकले बिना यह सम्भव नही।पंचायतें उदाहरण हैं कि कैसे यहाँ सरपंच चुनी जाने के बाद भी उन महिलाओं के नाम से मीटिंग्स तक मे उनके पति बाप भाई जेठ ही जाते हैं, वे ही फैसले लेते हैं और यहाँ तक कि घोटाले भी करते हैं।

परिवार को सर्वोच्च मूल्य की तरह स्त्रियों की ज़िन्दगी मे जैसे चिपका दिया गया है उससे आज़ाद हुए बिना क्या एक या दो स्त्रियों के क्रांति करने से बात बनेगी?
दूसरा राजनीति की गन्दगी भी स्त्रियों को आगे आने से रोकती है, यह भी कहीं न कहीं उनके पारिवारिक मूल्यों के कारण ही होता है।वे गन्दगी से निबटेंगी या बच्चों का करियर बनाने मे अपना जीवन व्यतीत कर देंगी इसमे से वे निश्चित ही घरेलू भूमिका को चुनती हैं।
कारण क्या है?
प्रतिस्पर्द्धा , सत्ता और ताकत की भूख भी यदि उनमे है तो वह भी घरेलू फ्रंट तक सीमित है। हमे उन्हे जानने देना होगा कि एक रसोई की सत्ता हथिया कर , बहू या सास पर आधिपत्य रखकर वे दुनिया मे अपना कोई योगदान नही देने वालीं।उनकी ट्रेनिंग को माता पिता के रूप मे हमे उलटना ही होगा।
स्त्री के साथ इस सदी तक भी वही कविता घटित होती है - जब चिड़िया के बच्चे अण्डे के अन्दर थे तो वे समझते थे कि इतना सा ही है संसार , उन्हे उड़ना होगा ताकि वे जाने कि कितना बड़ा है संसार।
उड़ान के बाधक भी अपने ही प्रियजन होंगे , वे भरपूर कोशिश करेंगे कि पंख कुतरे जाएँ।सो लड़कियों अपने प्रियजनो की सोच पर भी सवाल उठाओ!!

रचना त्रिपाठी said...

सुजाता जी आपने बिल्कुल सही कहा।
खास तौर पर हम मध्यमवर्गीय परिवार में महिलाएं अगर इच्छुक भी हैं तो उन्हें उल्टे-सीधे बात सुनाकर और समाज कितना गन्दा है,इसका भय दिखाकर उन्हें पीछे खींच दिया जाता है। इसके बावजूद भी अगर कोई महिला मोर्चे पर निकल पड़ती है तो उसकी खिंचाई करने और तरह-तरह के लांछन लगाने के लोग नही चुकते।

शोभना चौरे said...

mhilao ko mhma mndit kar unhe ghar ki rsoi tak hi simit rkha jata hai .aur agr kuch mhilaye uska virodh kar bahar aati hai to unhe bhut se morce par par krne hote hai rajniti tak aate aate fir ghar me baitha di jati hai .
agr koi khudana khasta aa bhi jati hai to sivat tano aur apman ke kuch hasil nhi hota .

Dr. Amar Jyoti said...

सुजाता जी की बात में दम है। पर जो लोग उड़ान में बाधक हों वे काहे के अपने और काहे के प्रियजन!हर सफ़लता और हर स्वतन्त्रता का मूल्य तो चुकाना ही पड़ता है। इस सामन्ती मानसिकता वाले समाज में नारी को स्वतन्त्रता,समानता, और सफ़लता भीख, दान, या बख़्शीश में नहीं मिलनी है। संघर्ष तो करना ही होगा।
और संघर्ष करने पर सिर्फ़ विरोधी ही नहीं मिलते। बहुत से साथी और सहयोद्धा भी मिलते हैं।
एक बार घर के पिंजरे से बाहर निकलें तो सही!

स्वप्नदर्शी said...

Politics and economy are the center of any civilization and center of power. I do not believe that women are not participating in politics by choice.

But rather that choice to enter and get sustained in politics is not there.
It may be a good idea if some of the men and women can narrate their own idea why they have not considered politics as a option for their carrier?


Natinal politics is any way is a big thing but small things like "filling gaddas " and taking an initiative to involve your neighbors to prevent growth of mosquitoes during summer and rainy season in your neighborhood can be a social initiative a community work.

What is the hurdle in doing small activities like that?
It will not change politics but women will get organizational skills and may cross boundaries of their home within safe neighborhood.

Unknown said...

Dinesh ji,French Revolution aur tmam dusri krantiyon k bare me vidwano ka kahna h ki vastvik kranti se pahle vaicharik kranti ho chuki thi.dharti k bhi dus hath neeche tk dhakeli gai mahilaon ne abhi to sans lena shuru bhr kiya h.fir samnti mansikta abhi, apne ko pragtisheel samajhne wale kitne logon k bheetar jad jamaye h jiska manthan is manch pr bhi hota rahta h.mujhe lagta hai ese me soch pr kam krna prathmikta h,jise ye 'stri prkoshth' bahkoobi kr rhe hn.beshak abhi hamara pahla kadam bhi adhoora h lekin lakshya ki pahchan bhi zaroori h.rajniti me mahilaon ki bhagidari k lakshy ki or sanket krke Swpndarshi ne achchha yodan diya h.

RAJ SINH said...

आस्चर्य यह कि जिन दलों की सर्वेसरवा नारीयां ही हैं , जैसे माया , ममता , जया , सोनिया , वहां भागीदारी की हालत और भी खराब है . स्त्री शसक्तीकरन और सामाजिक न्याय मे इनकी भुमिकायें निरर्थक ही नहीं , अक्सर नकारात्मक .

"अर्श" said...

NAMASKAAR,

SAHITYA SHILPI MERI GAZAL KO PASAND KARNE KE LIYE APKA BAHOT BAHOT DIL SE ABHAAR...


AAPKA

ARSH

Anonymous said...
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