Saturday, June 13, 2009

औरत का आना मना है

एक और औरत हाथ मे साबुन लिए उल्लास की पराकाष्ठा पर है

गदे वाली कुसी पर बैठ एक और औरत कामुक निगाहो से ताक रही है

इशतहार से खुली छातियो वाली औरत मुझे देखती मुसकराती है

एक औरत फोन का डायल घुमा रही है और मै सोचता हूँ वह मेरा ही नंबर मिला रही है

माँ छः घंटो बस की यात्रा कर आई है

माँ मुझसे मिल नही सकती, होस्टल मे रात को औरत का आना मना है।

लाल्टू

12 comments:

मुकेश पाण्डेय चन्दन said...

nice post !!

ओम आर्य said...

sundar rachana....

Kavita Vachaknavee said...

सार्थक.

मनोज द्विवेदी said...

gahara prashna chhed diya apne...

Asha Joglekar said...

व्यापरियों के लिये उनके माल की बिक्री बढाने का महज एक जरिया, पर ये औरतों का शोषण है ऐसा नही लगता आपको । जब कि बहुसंख्य औरतें आपकी माँ की तरह ही जिंदगी से जूझती नज़र आती हैं ।

Pt. D.K. Sharma "Vatsa" said...

आखिए ये हमारा समाज किस तरफ जा रहा है?!!!!!

वीनस केसरी said...

यथार्थ दिखलाने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
वीनस केसरी

लोकेश Lokesh said...

बड़े शहर की लड़कियाँ

शहर में
एक बहुत बड़ा छोटा शहर और
निहायत ही छोटा सा एक
बड़ा शहर होता है

जहाँ लड़कियाँ
अंग्रेज़ी पढ़ी होती हैं
इम्तहानों में भूगोल इतिहास में भी
वे ऊपर आती हैं
उन्हें दूर से देखकर
छोटे शहर की लड़कियों को बेवजह
तंग करने वाले आवारा लड़के
ख्वाबों में - मैं तुम्हारे लिए
बहुत अच्छा बन जाऊँगा -
कहते हैं

ड्राइवरों वाली कारों में
राष्ट्रीय स्पर्धाओं में जाती लड़कियाँ
तन से प्रायः गोरी
मन से परिवार के मर्दों सी
हमेशा गोरी होती हैं

फिल्मों में गोरियाँ
गरीब लड़कों की उछल कूद देखकर
उन्हें प्यार कर बैठती हैं
ऐसा ज़िंदगी में नहीं होता

छोटे शहर की लड़कियों के भाइयों को
यह तब पता चलता है
जब आईने में शक्ल बदसूरत लगने लगती है
नौकरी धंधे की तलाश में एक मौत हो चुकी होती है
बाकी ज़िंदगी दूसरी मौत का इंतज़ार होती है

तब तक बड़े शहर की लड़कियाँ
अफसरनुमा व्यापारी व्यापारीनुमा अफसर
मर्दों की बीबियाँ बनने की तैयारी में
जुट चुकी होती हैं

उनके बारे में कइयों का कहना है
वे बड़ी आधुनिक हैं उनके रस्म
पश्चिमी ढंग के हैं
दरअसल बड़े शहर की लड़कियाँ
औरत होने का अधकचरा अहसास
किसी के साथ साझा नहीं कर सकतीं
इसलिए बहुत रोया करती हैं
उतना ही
जितना छोटे शहर की लड़कियाँ
रोती हैं

रोते रोते
उनमें से कुछ
हल्की होकर
आस्मान में उड़ने
लगती है
ज़मीन उसके लिए
निचले रहस्य सा खुल जाती है

फिर कोई नहीं रोक सकता
लड़की को
वह तूफान बन कर आती है
पहाड़ बन कर आती है
भरपूर औरत बन कर आती है
अचंभित दुनिया देखती है
औरत।

लाल्टू

अनिल कान्त said...

behtreen post

काशिफ़ आरिफ़/Kashif Arif said...

बहुत उम्दा पोस्ट। सच्चाई के दर्शन कराती हुई पोस्ट

अनूप भार्गव said...

सशक्त ...

Nitish said...

bahut uttam kavya mantra mukta kar diya.... aanand se bhar diya....

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