Tuesday, September 29, 2009

मैं पूछूं तुमसे

मत रूठो मुझसे
मेरे स्वामी!
देखो, मैं बन सकती हूँ
तुम्हारी माँ,
मित्र तो हूँ ही मैं,
तुम मानो या नहीं।
वक्त पड़े अगर तो
मैं बन जाउंगी
तुम्हारी दासी भी,
पर मत कहो मुझसे
बनने के लिए
वेश्या तुम्हारी!
कि छटपटाती है
मेरी आत्मा
अदा करने मैं तुम्हे
ये कीमत
तुम्हारे दिए इस
रोटी, कपड़े और मकान की ।
हो सके तो
बना लो मुझे अपनी प्रेमिका,
करो मुझसे प्यार,
और मैं दे दूंगी
वो सब कुछ तुम्हे
जो भी है मेरे पास।
एक बात पूछूं मैं तुमसे?
आई थी मैं तुम्हारे पास,
छोड़ कर सब कुछ अपना,
घर और परिवार।
क्यों नहीं बन पाए
कभी तुम
पिता, भाई और
मित्र मेरे?

13 comments:

Dr. Shreesh K. Pathak said...

एक चिरंतन प्रश्न...

M VERMA said...

आत्माभिव्यक्ति की छटपटाहट. नारी का दर्द.
बेहतरीन

Lal salaam said...

nice

Mumukshh Ki Rachanain said...

क्यों नहीं बन पाए
कभी तुम
पिता, भाई और
मित्र मेरे?

प्रयोग में अनुतरित ही रहा है सदा से यह प्रश्न?

चन्द्र मोहन गुप्त
जयपुर
www.cmgupta.blogspot.com

shobhana said...

arthpurn kayita

Science Bloggers Association said...

बेहद मासूम और जायज सवाल हैं।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

Yusuf Kirmani said...

विचारोत्तेजक...नहीं आएंगे जवाब।

ushma said...

वाह रे कविता की सम्प्रेष्ण शक्ति !
अद्भुत है ......बधाई ..................!

Unknown said...

ye aapka apna dard hai ya pure samaj ka.jo bhi ho par dil ko choo liya.

vijay kumar sappatti said...

bahut hi adbuth dil ko choone waali kavita , naari man ko bakhubi pradarshit karti hui ..

meri badhai sweekar karen..

regards

vijay
www.poemsofvijay.blogspot.com

चाहत said...

बहुत बड़ियां है

अनुराग अन्वेषी said...

बेशक शानदार कविता है यह। पर इससे भी बेहतर कविताएं मैंने देखी हैं आपके ब्लॉग http://uubaurdoob.blogspot.com/ पर।

Anonymous said...

आखिर क्या देखा था

उस शख्श में

जिसे कर बैठी थी तुम प्यार

क्या क्या ख्वाब सजाये

उसके लिए

जो जानता ही नहीं था

कि क्या होता है प्यार

जब हुआ तुमको अपनी गलती का एहसास

तब देने लगी उलाहना

कि उसने सिखा नहीं कि

कैसे करते हैं प्यार

जाने क्यों हर कोई इस दुनिया में

चाहता है

कि उसकी सोच के दायरे में रहके

कोई करे उससे प्यार

शायद हर किसी को चाहिए

इस दुनिया में

अपना अपना प्यार .....

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