Sunday, February 14, 2010

प्रेम : एक अनसुलझा रहस्य

प्यार क्या है। यह एक बड़ा अजीब सा प्रश्न है। पिछले दिनों इमरोज जी का एक इण्टरव्यू पढ़ रही थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि जब वे अमृता प्रीतम के लिए कुछ करते थे तो किसी चीज की आशा नहीं रखते थे। जाहिर है प्यार का यही रूप भी है, जिसमें व्यक्ति चीजें आत्मिक खुशी के लिए करता है न कि किसी अपेक्षा के लिए। पर क्या वाकई यह प्यार अभी जिन्दा है? हम वाकई प्यार में कोई अपेक्षा नहीं रखते। यदि रखते हैं तो हम सिर्फ रिश्ते निभाते हैं, प्यार नहीं? क्या हम अपने पति, बच्चों, माँ-पिता, भाई-बहन, से कोई अपेक्षा नहीं रखते।

...सवाल बड़ा जटिल है पर प्यार का पैमाना क्या है? यदि किसी दिन पत्नी या प्रेमिका ने बड़े मन से कोई कार्य किया और पति या प्रेमी ने तारीफ के दो शब्द तक नहीं कहे, तो पत्नी का असहज हो जाना स्वाभाविक है। अर्थात् पत्नी/प्रेमिका अपेक्षा रखती है कि उसके अच्छे कार्यों को रिकगनाइज किया जाय। यही बात पति या प्रेमी पर भी लागू होती है। वह चाहे मैनर हो या औपचारिकता हमारे मुख से अनायास ही निकल पड़ता है- थैंक्यू या इसकी क्या जरूरत थी। यहाँ तक की आपसी रिश्तों में भी ये चीजें जीवन का अनिवार्य अंग बन गई हैं। जीवन की इस भागदौड़ में ये छोटे-छोटे शब्द एक आश्वस्ति सी देते हैं।...पर अभी भी मैं कन्फ्यूज हूँ कि क्या प्यार में अपेक्षायें नहीं होती हैं? सिर्फ दूसरे की खुशी अर्थात् स्व का भाव मिटाकर चाहने की प्रवृत्ति ही प्यार कही जायेगी।...अभी भी मेरे लिए प्रेम एक अनसुलझा रहस्य है।

23 comments:

Asha Joglekar said...

जहां रिश्तों में अपेक्षायें होती हैं वहीं प्यार में सच्चा समर्पण होता है । प्रेम तभी तक जीवित है जब तक कोई रिश्ता नही है ।

Arun sathi said...

आपके लिए नहीं सब के लिए प्रेम एक अनसुलझा रहस्य है। ओशों ने कहा कि प्रेम में कोई कारण नहीं होना चाहिए, जहां कारण हुआ प्रेम नहीं रहेगा। अपेक्षा भी एक कारण है।

निर्मला कपिला said...

रे आकाँकशा जी हम ने तो सोचा था कि सवाल हम ने सुलझा लिया है मगर आपकी पोस्ट पढ कर तो हम भी उलझ कर रह गये। सोचते है धन्यवाद्

Amit Kumar Yadav said...

प्यार वाले इस विशेष दिन पर ही आपने प्यार को उलझा दिया, पर बात badi दूर की कही.

Amit Kumar Yadav said...

प्यार वाले इस विशेष दिन पर ही आपने प्यार को उलझा दिया, पर बात बड़ी दूर की कही.

Shahroz said...

प्यार तो बस महसूस करने वाला विलक्षण भाव है, इस पर कोई बंदिश नहीं.

Akhilesh pal blog said...

pyar samaj ko badal deta hai

अनिल कान्त said...

प्यार एक अनसुलझा रहस्य...

Rangnath Singh said...

प्यार सबकुछ सह सकता है उपेक्षा नहीं - शेक्सपीयर

ab inconvenienti said...

Love is pure business like anything else. If you get something you have to pay back, you attracted to someone because you find some value in him/her.

Yes, to some extent we may see true love in mother-child relationship, which is relatively selfless form of love -- from mothers side.

But all other relations have ruthless 'give and take' system by default. So true love or selfless love in romantic settings is a kind of true myth.

मनोज कुमार said...

प्यार अहसास है
प्यार कोई बोल नहीं,
प्यार आवाज़ नहीं
एक ख़ामोशी है,
सुनती है, कहा करती है।
न यह बुझती है,
न रुकती है,
न ठहरी है कहीं
नूर की बूंद है,
सदियों से बहा करती है।

vandan gupta said...

yahi to vidambna hai .........jitna suljhane ki koshish karoge utnahi uljhoge........prem ke rahasya bahut hi gahan hote hain..........tabhi to kaha gaya hai-------ek aag ka dariya hai aur doob ke jana hai.

सुशीला पुरी said...

prem ansuljha hai, tha,aur rahega .

स्वप्नदर्शी said...

प्यार में अपेक्षा न हो, ये स्थिति प्यार के किसी ख़ास मुकाम पर पहुंचकर हो सकती है, बहुत विरल स्थिति में। नहीं तो शायद प्यार में ही सबसे ज्यादा अपेक्षाएं होती है। कुछ हद तक अपना वजूद पूरी तरह से दुसरे इंसान पर थोपने की कोशिश भी। प्रेम भी समाजीकरण की एक संस्था है।, अपने नियम क़ानून लिए, शुचिता, आदर्श, पाप, पुण्य सभी लिए. प्रेम की गली भी अति संकरी ...........

Arvind Mishra said...

प्रेम उत्सर्ग है उदात्तता और उदारता का परिचायक

S R Bharti said...

Confused...!!

सुजाता said...

प्रेम भी समाजीकरण की एक संस्था है।- स्वप्नदर्शी जी की इस बात से सहमत हूँ !

aa said...

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राजकिशोर said...

किसी स्त्री का सबसे बड़ा सम्मान यही है कि आप उसके साथ विवाह न करें। यही बात पुरुष का सम्मान करनेवाली स्त्री पर भी लागू होती है।

dr amit jain said...

प्यार वो भावना है जहां पर हम किसी भी प्रकार की अपेक्षा नहीं होती ,
@ राजकिशोर
आप के सम्मान की भावना का हम आदर करते है

ab inconvenienti said...

यानि विवाह महिला का अपमान है.

girlsguidetosurvival said...

This is not the first time Imroz's love for Amrita Pritam is used to raise the complexity of love. The part that is missing is what did Amrita say? I remember reading one interview where she said "I lost Sahir once, with Imroz I decided not to repeat that mistake."
Here is an excerpt from Uma Trilok's Amrita-imroz A love Story: "

“We never said `I love you' to each other. It wasn't needed. What is love? Love is taking care of small-small things for each other. When we decided to live with each other in the early 1950s, we didn't let anyone interfere with our decision. I told her, `You are my society. I am your society'. And why do you call it live-in? Aren't others live-in relations?" As far as Sahir is concerned, he never asked her to come to him. If he had, she would have gone. And I would have respected her decision," says Imroz, forever smiling.

This means she was contributing to the relationship o equal terms. Imroz did not have to expect respect and kidness from her because she made sure she gave it to him for everyday of their lives.

Pickig up on or two statements out of context and then filling in one's own meanings do not contribute to the cause. Bottom line is "If it is hurting, it is not love." If there is no respectful reciprocation of emotions it is not love it is person addiction.

No, the love between the mother and child is not selfless. There is a hidden agenda that manifests through socialization practices- at times it is creating an alter ego through the child and at other times it is just the feeling of power of creating.

For information on Is it Love or Person Addiction visit

www.girlsguidetosurvival.wordpress.com

स्वप्नदर्शी said...

@ giri

Great. this is more realistic.

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