Monday, March 8, 2010

नारी होने पर गर्व !!

महिला-दिवस सुनकर बड़ा अजीब लगता है. क्या हर दिन सिर्फ पुरुषों का है, महिलाओं का नहीं ? पर हर दिन कुछ कहता है, सो इस महिला दिवस के मानाने की भी अपनी कहानी है. कभी महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई से आरंभ हुआ यह दिवस बहुत दूर तक चला आया है, पर इक सवाल सदैव उठता है कि क्या महिलाएं आज हर क्षेत्र में बखूबी निर्णय ले रही हैं. मात्र कुर्सियों पर नारी को बिठाने से काम नहीं चलने वाला, उन्हें शक्ति व अधिकार चाहिए ताकि वे स्व-विवेक से निर्णय ले सकें. आज नारी राजनीति, प्रशासन, समाज, संगीत, खेल-कूद, फिल्म, साहित्य, शिक्षा, विज्ञान, अन्तरिक्ष सभी क्षेत्रों में श्रेष्ठ प्रदर्शन कर रही है, यहाँ तक कि आज महिला आर्मी, एयर फोर्स, पुलिस, आईटी, इंजीनियरिंग, चिकित्सा जैसे क्षेत्र में नित नई नजीर स्थापित कर रही हैं। यही नहीं शमशान में जाकर आग देने से लेकर पुरोहिती जैसे क्षेत्रों में भी महिलाएं आगे आ रही हैं. रुढियों को धता बताकर महिलाएं हर क्षेत्र में परचम फैलाना चाहती हैं.

पर इन सबके बावजूद आज भी समाज में बेटी के पैदा होने पर नाक-भौंह सिकोड़ी जाती है, कुछ ही माता-पिता अब बेटे-बेटियों में कोई फर्क नहीं समझते हैं...आखिर क्यों ? क्या सिर्फ उसे यह अहसास करने के लिए कि वह नारी है. वही नारी जिसे अबला से लेकर ताड़ना का अधिकारी तक बताया गया है. सीता के सतीत्व को चुनौती दी गई, द्रौपदी की इज्जत को सरेआम तार-तार किया गया तो आधुनिक समाज में ऐसी घटनाएँ रोज घटित होती हैं. तो क्या बेटी के रूप में जन्म लेना ही अपराध है. मुझे लगता है कि जब तक समाज इस दोगले चरित्र से ऊपर नहीं उठेगा, तब तक नारी की स्वतंत्रता अधूरी है. सही मायने में महिला दिवस की सार्थकता तभी पूरी होगी जब महिलाओं को शारीरिक, मानसिक, वैचारिक रूप से संपूर्ण आज़ादी मिलेगी, जहाँ उन्हें कोई प्रताड़ित नहीं करेगा, जहाँ कन्या भ्रूण हत्या नहीं की जाएगी, जहाँ बलात्कार नहीं किया जाएगा, जहाँ दहेज के लोभ में नारी को सरेआम जिन्दा नहीं जलाया जाएगा, जहाँ उसे बेचा नहीं जाएगा। समाज के हर महत्वपूर्ण फैसलों में उनके नज़रिए को समझा जाएगा और क्रियान्वित भी किया जायेगा. समय गवाह है कि एक महिला के लोकसभा स्पीकर बनाने पर ही लोकसभा भवन में महिलाओं के लिए पृथक प्रसाधन कक्ष बन पाया. इससे बड़ा उदारहण क्या हो सकता है. जरुरत समाज में वह जज्बा पैदा करने का है जहाँ सिर उठा कर हर महिला अपने महिला होने पर गर्व करे, न कि पश्चाताप कि काश मैं लड़का के रूप में पैदा होती !!
!!! अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस के 100 वर्ष पूरे होने पर शुभकामनायें !!!

आकांक्षा यादव

13 comments:

राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

बधाई हमारी तरफ से भी, इस कारण से नहीं कि आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस ने 100 का आंकड़ा छुआ है बल्कि बधाई एक माँ के बेटे की तरफ से, एक बहिन के भी की तरफ से, एक पत्नी के पति की तरफ से, एक बेटी के पिता की तरफ से, महिला मित्रों के मित्र की तरफ से.................. इसलिए कि हमें इस व्यक्तित्व को बनाने में महिलाओं का योगदान अहम् है.

फिर से बधाई.

जय हिन्द, जय बुन्देलखण्ड

निर्मला कपिला said...

मुझे तो गर्व है कि महिला हूँ। मगर जब खन्ना आँटी जैसी और सोनू पंजाबन जैसी औरतों का नाम सुनती हूँ तो जरूर शरम आती है। बहुत अच्छा लगा आलेख धन्यवाद्

KK Yadav said...

अंतरराष्ट्रीय नारी दिवस पर सुन्दर पोस्ट. शुभकामनायें.

S R Bharti said...

नारी की भूमिका को रेखांकित करती उम्दा पोस्ट. आकांक्षा जी को साधुवाद.

S R Bharti said...

अंतरराष्ट्रीय नारी दिवस के 100 साल पर बधाई.

Unknown said...

नारी सशक्तिकरण के लिए यह जरुरी भी है. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की बधाइयाँ.

सुशीला पुरी said...

महिला दिवस मनाने का कोई औचितत्य नही पर सविधान मे तो बिना आरक्षण के अभी बड़ी अफ़रा तफ़री है .उम्दा पोस्ट .

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

हमें भी गर्व है एक नारी का बेटा होने पर, एक नारी का भाई होने पर, एक नारी का पति होने पर और एक नारी का पिता होने पर...। हमें नारी समाज के बीच सुसंस्कृत होने का गर्व है।

Unknown said...

पोस्ट बहुत बढिया है
और इस दुनिया को सुन्दर और खुश्हाल बनाने मे महिलाओ के योगदान को प्रणाम करता हू.
http://hariprasadsharma.blogspot.com/2009/09/blog-post_2067.html

कार्तिकेय मिश्र (Kartikeya Mishra) said...

एक बेटे की ओर से उसकी माँ को, भाई की ओर से उसकी बहन को, एक सहमे हुए एकतरफा प्रेमी की ओर से उस लड़की को, और न जाने कितने रिश्तों की गाँठों से बँधी असंख्य स्त्रियों को महिला दिवस की बधाईयाँ...

कृष्ण मुरारी प्रसाद said...

महिला दिवस ...हिम्मत से पतवार सम्हालो......
लड्डू बोलता है ....इंजीनियर के दिल से....
http://laddoospeaks.blogspot.com/2010/03/blog-post_09.htm

ZEAL said...

Ho ho...I do believe ...We shall overcome one day.

Hum honge kaamyaab...Hum honge kaamyaab ek din...

Nari ko saare adhikaar mil jayeinge jab wo apne adhikaaron ko lena seekh legi.

"apna haq sangdil jamane se chheen pao to koi baat bane....sur jhukane se kuchh nahi hota, sur uthaao to koi baat bane.

संजय भास्‍कर said...

नारी सशक्तिकरण के लिए यह जरुरी भी है

अनुप्रिया के रेखांकन

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स्त्री-विमर्श के तमाम सवालों को समेटने की कोशिश में लगे अनुप्रिया के रेखांकन इन दिनों सबसे विशिष्ट हैं। अपने कहन और असर में वे कई तरह से ...