Saturday, April 3, 2010

पानी के झगडे में गई इस गर्मी की पहली जान

कल ही एक अख़बार की खबर , इंदौर में पानी के झगडे में एक युवती को अपनी जान गंवानी पड़ी , ने सोचने पर विवश कर दिया कि कब तक हम पानी को लेकर जागरूक नहीं होंगे और जहाँ पानी अधिक है वंहा जल की बर्बादी को रोकने के लिए जनजागरण अभियान की आवश्यकता है .......अन्यथा ये खबरे ....परेशां करने वाली हैं .....

4 comments:

Anonymous said...

जनजागरण अभियान ???? अजी रुकिए... अभी तो लोग सानिया मिर्ज़ा की शादी (और इसी तरह के मसलों) में उलझे हुए हैं.

Anil Pusadkar said...

आपकी चिंता जायज है।पानी की कमी के लिये हम खुद ज़िम्मेदार हैं और एक बात और है कि पानी की किल्लत जितनी प्राकृतिक कारणों से होती है उससे ज्यादा अनइक़्व्क़ल डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम से होती है।गरीब बस्तियों मे तो पानी की किल्लत की खबरे आती ही रहती है क्या आपने कभी किसी वी आई पी इलाके मे पानी की किल्लत की खबर पढी है।पिछले दिनों फ़्ररवरी मे विदर्भ जाना हुआ था,वंहा नदी-तालाब और कुयें लगभग सूख चुके थे।जलसंकट साफ़ दिख रहा था और पानी बिकने लगा था।सोचिये गरमी मे क्या हालत होगी।यंहा भी गर्मियों मे पानी 80 किमी दूर के एक बांध से लाया जाता है।सरफ़ेस रन-आफ़ या वाष्पीकरण से लगभग 70 % पानी का नुकसान होता है मगर हर साल का यही रोना है।इस प्रदेश मे तो नदियों तक़ को बेच दिया है सरकार ने उद्योगपतियों को।जिस तरह से उद्योगों मे भूजल का दोहन हो रहा है उससे भूजल स्तर नीचे जाना स्वाभाविक है।उससे बचने के लिये सरकार रेन वाटर हार्वेस्टिंग और रिचार्ज़ का शिगुफ़ा छोड़ देती है,लेकिन सवाल ये है कि उद्योगो के बड़े-बड़े बोरवेल जितना पानी एक घंटे मे खींच लेते हैं उतना पानी हम रेन वाटर हार्वेस्टिंग से कई महिनो मे नही रिचार्ज़ कर सकते।बस चूसे जा रहे है धरती मैया का खून घर-घर बोरिंग करके।पता नही कब रूकेगा ये धरती मां का दोहन-शोषण्।
शायद मैं भटक गया था,आपकी चिंता जायज है इस माम्ले मे जनजागरण अभियान बहुत ज़रूरी है।हमारे शहर मे पानी कि किल्लत छोटी बस्तियों मे शुरू हो चुकी है और आज सुबह ही अख़बार मे एक बस्ती मे टैंकर के इंतज़ार मे रात भर लोगों के जगने की खबर पढी है और फ़िर आपने भी वही चिंता ज़ाहिर कर दी।

संजय भास्‍कर said...

आपकी चिंता जायज है।पानी की कमी के लिये हम खुद ज़िम्मेदार हैं और एक बात और है कि पानी की किल्लत जितनी प्राकृतिक कारणों से होती है उससे ज्यादा अनइक़्व्क़ल डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम से होती है।गरीब बस्तियों मे तो पानी की किल्लत की खबरे आती ही रहती है क्या आपने कभी किसी वी आई पी इलाके मे पानी की किल्लत की खबर पढी है।पिछले दिनों फ़्ररवरी मे विदर्भ जाना हुआ था,वंहा नदी-तालाब और कुयें लगभग सूख चुके थे

रेखा श्रीवास्तव said...

जो भविष्यवाणी की जा रही है की अगला विश्व युद्ध इसी पानी को लेकर ही होगा. आज ही सच नजर आने लग है. पहले गाँव , शहर , देश और फिर विश्व सभी को इसका शिकार होना ही है.
जन जागरण किसको सिखायेंगे? ये किसके लिए बना है? पैसे वाले सब खरीद सकते हैं. पानी भी खरीद लेंगे. कल को समुद्र से लेकर घर तक पानी खींच लेंगे . पानी विषैला होने लग है. जिससे जीवन जुड़ा है, उनमुद्दोंसे से दूर हमारी सरकार पता नहीं कहाँ कहाँ उलझी पड़ी है? हम ब्लोग्गेर्स ही इसकी शुरुआत करें की अपने घर में पानी की बरबादी नहीं होने देंगे. कुछ तो बचेगा औरो के लिए.

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