Tuesday, July 6, 2010

धोनी की शादी के मायने

बिलकुल नयी सूचना है, धोनी ने रविवार को अपनी बचपन कि दोस्त साक्षी रावत से विवाह कर लिया। इसके पहले उनके ढेर सारे प्रेम प्रसंग चर्चा में रहे । मुख्य रूप से 'दीपिका पादुकोण' और हाल फिलहाल 'आसिन' से। हमेशा ही ऐसा लगता रहा कि धोनी किसी चर्चित चेहरे से ही विवाह करेंगे लेकिन हुआ इसके ठीक विपरीत। धोनी ने चुनी एक बिलकुल नामालूम सी लड़की। शायद - एक 'हाउस वाइफ'। क्यों? क्या यह फिर से एक बार पुरुषों की "हीन भावना" का मामला है?

प्रेम करने - या फिर कहें मस्ती मारने- तक ऐसी लड़की चलती है जो चर्चित हों। इससे उनकी अहंकार भावना तुष्ट होती रही कि देखो इतनी खूबसूरत और इतनी मशहूर, हज़ारो लाखों की स्वप्न सुंदरी मुझपर मर रही है। लेकिन जब विवाह करने का समय आया तो उन्हें एक घरेलू सी लड़की ही जंची। जिसे कोई नहीं जानता था। निश्चित रूप से किसी फिल्म अभिनेत्री कि अपेक्षा एक 'अनाघ्रात पुष्प' एक 'असूर्यपश्या'। स्पष्ट है कि आजकल किसी फिल्म अभिनेत्री के शरीर का अधिकांश हिस्सा नुमाया ही रहता है- तो मित्रों कि दबी हँसी का खतरा रहता - और मशहूर रहने के कारण भविष्य में थोड़ी बहुत बहुत टकराव की भी आशंका रहती। जाहिर है धोनी ने संभवतः दोनों ही आशकाओं से मुक्ति पा ली है॥

19 comments:

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

अर्चना जी, आपको धोनी के मन की अच्छी थाह है। अद्‍६भुत...।

Unknown said...

dhonee ne samajhdaaree kaa kam kiyaa hai
aur please saadhaaran yaani acharchit ladkiyo ko chhotaa yaa heen naa samajhiye

Himanshu Mohan said...

ये सभी संभावनाएँ हैं, सच भी हो सकती हैं - नहीं भी, मगर बचपन की दोस्त का जीवनसाथी बनना और बनाना - ये सुनकर अच्छा तो लगता ही है - प्रथमदृष्ट्या।
वैसे आपकी राय काबिले-ग़ौर है, शायद इसमें भी ख़ूब सोची-समझी नीति हो - या शायद बुज़ुर्गों की इच्छा।
कम शब्दों में बड़ी सार्थक पोस्ट लिखी आपने - बधाई!

pankaj srivastava said...

अर्चना जी, आपने जिस पुरुष मानसिकता की कलई खोली है, वो बिलकुल ठीक है। लेकिन धोनी के मामले में कुछ और तथ्य भी हैं जिन्हें संज्ञान लेना चाहिए। आप जिसे नामालूम सी लड़की कह रहे हैं, वो धोनी के साथ बचपन में पढ़ती थी। दोनों के पिता एक कंपनी में बेहद छोटे कर्मचारी (आपरेटर)थे। दोनों परिवारों में काफी प्रगाढ़ता रही है। तो, यह भी हो सकता है कि धोनी ने अपने बचपन के प्यार या कहें उस लड़की के साथ भविष्य की डोर बांधना बेहतर समझा, जो उनके दुख-तकलीफों की साक्षी थी। आज तो बहुत लड़कियां धोनी पर मरती हैं, लेकिन जब धोनी सौ-डेढ़ सौ रुपये के मोहताज थे और क्रिकेट के जरिये बस रेलवे के टी.सी.ही बन पाए थे, तो उन्हें साक्षी से ही दो मीठे बोल मिले होंगे। धोनी ने आज की तमाम चमक-दमक को उसपर कुर्बान किया। जरा, इस पहलू पर भी विचार करें।

Ghost Buster said...

थोड़ा जल्दबाजी और भावुकता में लिखा गया लगता है.

Asha Joglekar said...

अब ये तो धोनी का पर्सनल मामला है ।

मनोज कुमार said...

धोनी ने संभवतः दोनों ही आशकाओं से मुक्ति पा ली है॥
बहुत सोच-समझ कर गहरे विचारों से लिखा गया आलेख।

Arvind Mishra said...

कुछ तो लोग कहेगें.....

daddudarshan said...

आदरणीय अर्चना जी, पुरुष इस प्रवित्ति में जीने का आदी हो चुका है | वो जिसे गर्व की बात समझता है ,असलियत में वो पुरुष के चरित्र का सबसे कमजोर पहलू है ,जिसे उसने शदियों से एक अनावश्यक-बदबूदार-लिबास की तरह ओढ़ रखा है | यद्यपि आजादी के बाद नारी अपेक्षाकृत
जागरूक हुई है ,उसी अनुपात में सम्यक-सोच वाले पुरुष-वर्ग ने नारी का साथ देना शुरू किया है ,तो परिणाम भी दिखना शुरू हो गया है | अब
शदियों से जो प्रवित्ति स्वभाव में शुमार हो गयी हो या परंपरा बन गयी हो उसे स्थान छोड़ने में कुछ तो समय लगेगा | जिस पेशे से धोनी आते हैं उसी पेशे
से सचिन तेंदुलकर भी आते हैं ,लेकिन क्या मजाल कि कोई ऐसी-वैसी हरकत सुनाने या देखने को मिली हो | कई बार दिल-फेंक किस्म के लोग, जो समाज में इसी आदत के लिए बदनाम भी रहते हैं ;जब उनकी लडकी या बीबी इस तरह का कोई कदम उठाती है तो (ओनर-किलिंग के नाम पर) उसका क़त्ल करने में भी नहीं चूकते | |

daddudarshan said...

आदरणीय अर्चना जी, पुरुष इस प्रवित्ति में जीने का आदी हो चुका है | वो जिसे गर्व की बात समझता है ,असलियत में वो पुरुष के चरित्र का सबसे कमजोर पहलू है ,जिसे उसने शदियों से एक अनावश्यक-बदबूदार-लिबास की तरह ओढ़ रखा है | यद्यपि आजादी के बाद नारी अपेक्षाकृत
जागरूक हुई है ,उसी अनुपात में सम्यक-सोच वाले पुरुष-वर्ग ने नारी का साथ देना शुरू किया है ,तो परिणाम भी दिखना शुरू हो गया है | अब
शदियों से जो प्रवित्ति स्वभाव में शुमार हो गयी हो या परंपरा बन गयी हो उसे स्थान छोड़ने में कुछ तो समय लगेगा | जिस पेशे से धोनी आते हैं उसी पेशे
से सचिन तेंदुलकर भी आते हैं ,लेकिन क्या मजाल कि कोई ऐसी-वैसी हरकत सुनाने या देखने को मिली हो | कई बार दिल-फेंक किस्म के लोग, जो समाज में इसी आदत के लिए बदनाम भी रहते हैं ;जब उनकी लडकी या बीबी इस तरह का कोई कदम उठाती है तो (ओनर-किलिंग के नाम पर) उसका क़त्ल करने में भी नहीं चूकते | |

Deleted Profile said...

घटिया आलेख है. इतने सारे 'शायद' व् 'संभवतः' के बाद तो एक डिस्क्लेमर भी लगा ही देना था नीचे.

जहाँ तक हाउस-वाइफ होने की बात है तो इसमें क्या गलत है, लेख लिखने और नौकरी करने से ही कोई औरत या आदमी का तोप-तलवार होना होता है?

ये भी तो हो सकता है की धोनी के बारे में जितनी अफवाहें थी सब झूठी हैं...फिर ?

राजन said...

haan purush ki maansikta aisi hi hai.lekin phir bhi dhoni ka mamla thoda alag lag raha hai.maan lijiye dhoni apne bachpan ke pyar sakshi jisse wo lagataar sampark me bhi rahe hi honge ke bajaay kisi heroine se hi achanak shadi kar lete.aur sakshi baad me dhoni ki is ' bewafai'{jahir hai} ke bare me apni saheliyon ko {ya apko bhi } batati to unki {ya apki bhi} kya pratikriya hoti? spasht kar dun ki purush ki mansikta par apne jo sawaal uthaye hai unse sahmat hun.purush patni ke roop me daasi hi chahta hai........

राजन said...

.......lekin mera aitraz apke dwara is shadi me jabardasti wo dekhe jane se hai jo aap dekhna chahti hai.after all ye unka personal mamla hi hai.wx

आनंद said...

क्‍या आपने साक्षी की फोटो देखी है? किसी हीरोइन से कम है?
- आनंद

बोधिसत्व said...

जब वो साक्षी से शादी न करते तब आप कहती कि ऐसा किया...एक घरेलू लड़की को छोड़ दिया। चकाचौंध में पुराने गरीब प्यार को भूल गए। अर्चना जी कुछ और लिखिए, कुछ और तरीके से धोनी को घेरिए, बात बनी नहीं। धोनी की तारीफ करने की जगह आपने ...

Ashish (Ashu) said...

मॆं आपसे असहमत नही हू पर इतना कहूगा कि लाईफ को पाजिटिव देखना चाहिये..आपने कहा "प्रेम करने - या फिर कहें मस्ती मारने- तक ऐसी लड़की चलती है जो चर्चित हों। इससे उनकी अहंकार भावना तुष्ट होती रही कि देखो इतनी खूबसूरत और इतनी मशहूर, हज़ारो लाखों की स्वप्न सुंदरी मुझपर मर रही है। " पर दूसरा पहलू भी हो सकता हॆ "प्रेम करने - या फिर कहें मस्ती मारने- तक ऐसी लड़का चलता है जो चर्चित हों। इससे उनकी अहंकार भावना तुष्ट होती रही कि देखो इतना खूबसूरत और इतना मशहूर, हज़ारो लाखों लडकियो के दिलो मे बसने वाला लडका मुझ पर मर रहा है। "...रही बात बात धोनी की तो मॆ उनका फॆन नही हू..पर बोधिसत्व की बातो से सहमत हूं

PD said...

मेरी माँ हमेशा एक बात कहती है "कुछ लोग ऐसे होते हैं कि अपना गर्दन भी काट कर दे दो तो वो कहेंगे कि देखो, ठीक से नहीं काटा.. थोडा टेढा कट गया है.." बस ऐसे ही याद आ गया.
.
बाकी बात ऊपर बोधि जी लिख ही चुके हैं..

PD said...
This comment has been removed by the author.
neelima garg said...

absolutely correct....

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