Monday, July 12, 2010

किसी भी वक्त घर से निकलना मेरा मानवाधिकार है

जानी-मानी फोटोजर्नलिस्ट सर्वेश ने अपने एक टीवी इंटरव्यू में जोरदार टिप्पणी की।

टीवी ऐंकर का आम-सा सवाल था कि एक महिला होने के नाते इस प्रोफेशन में कोई अड़चन नहीं आती जब उन्हें रात-बिरात अनजानी-अजीब सी जगहों पर भी कवरेज के लिए जाना पड़ता है?

इस पर सर्वेश ने कहा कि रात में भी अकेले काम पर निकलना पड़े तो डर उन्हें बिल्कुल नहीं लगता। सर्वेश के आगे के तर्क लाजवाब कर देने वाले थे- "यह डर वास्तव में समाज-परिवार जबर्दस्ती स्त्री के मन में भरता है। किसी भी वक्त घर जाना या घर से निकलना, कहीं भी जाना हर व्यक्ति का मानवाधिकार है। विना तकनीकी वजह के किसी के लिए ये पाबंदियां मजबूरी में या जबर्दस्ती सोची या लागू की जाती हैं तो यह उसके मानवाधिकार पर चोट है।"

“बलात्कारी के डर से घर से मत निकलो, ऐसा कहने की बजाए बलात्कारी को क्यों नहीं रोका जाता कि तुम बलात्कार न करो?!”


नेट से चुराई हुई सर्वेश की खींची एक तसवीर।



बाकी उनके ब्लॉग सर्वेश फोटोवाली पर पहुंचकर जाना जा सकता है कि उनका कैमरा कहां तक पहुंचा है।

19 comments:

Anonymous said...

very true
time and again i have been writing against people who write blog posts/ comments to prove that woman is dependent on man and that they woman should be polite to "gain respect"

i am told we need to ignore such people where as its important to understand that I AM WITHIN MY PERMISSIBLE RIGHTS to write against them

प्रज्ञा पांडेय said...

sarvesh ki baat solah aana sach hai ... apane swabhawik manviya adhikaaron se hamen vanchit kiya gaya hai .. hamare raaston ko har tarah se roka gya hai ... magar hhamari jordaar laadaayi jaari hai aur rahegi rachana bhi jabadast hain .. ye vichaar aag jalaate hain ...shukriya

राजन said...

apni bahan betiyon ko suraksha ke naam par dabbu aur kamjor banaye rakhne ki sajish hai ye hidayten.lekin ab mahilayen thodi bahut arjit ki hui ajadi ko enjoy karna seekh rahi hai.suna hai ki kaiyon ke purse me mirch powder ya koi nukili cheez bhi hoti hai.aisa kya? is tarah ke upaay purush bhi karte hai.lekin kisiko batate nahi.hahahahaha! 4q

राजन said...
This comment has been removed by the author.
राजन said...
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Pratibha Katiyar said...

Shandar post!

kushwaha said...

aap ke lekh me dam hai meri eak beti hai maine use yah kaha ki yah tumare sareer ka jo bhag hai use puruso ne bhog ki dristi se dekha hai tum ease manav sareer dekho chhune se ghista nahi hai yadi koe chhuye to dapat do aadmi kamjor hota hai bah bhag khara hoga yadi kamukta se dekhega
kamjopr ki lugai pure gao ki bhaujae hoti hai
dusere ke easaro par chale smjho aapgulam hai
thanking you this bichar

kushwaha said...

aurat aurat ki dushman hoti hai kyoki sadiyo se chali aa rahi parampara ko kaise samapt kare
aurat kewal yah kare mai eak manav hoo mera yah adhikar hai ki mri marji ke bagair koe ease chhu na sake chahe bah koe purush ho baap bhai pati sabhi soshar karte hai inka roop jati se aalag sadi par dekho jinda jala dete hai
Himmat ko salam

डॉ .अनुराग said...

Agree.......

आर. अनुराधा said...

@ Kushwaha
"aurat aurat ki dushman hoti hai"

बाकी संदर्भों की बात नहीं करती, पर मौजूदा संदर्भ में यह नसीहत पुरुष ही देते हैं। घर की महिलाएँ सिर्फ पुरुषों के उसी राग को सीख कर दोहराती हैं। परिवार का मुखिया जो कहे, वही तो सही है!!!

प्रवीण said...

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"यह डर वास्तव में समाज-परिवार जबर्दस्ती स्त्री के मन में भरता है। किसी भी वक्त घर जाना या घर से निकलना, कहीं भी जाना हर व्यक्ति का मानवाधिकार है। विना तकनीकी वजह के किसी के लिए ये पाबंदियां मजबूरी में या जबर्दस्ती सोची या लागू की जाती हैं तो यह उसके मानवाधिकार पर चोट है।"

इस कथन से सही सोच वाला कोई भी शख्स असहमत हो ही नहीं सकता!

"बलात्कारी के डर से घर से मत निकलो, ऐसा कहने की बजाए बलात्कारी को क्यों नहीं रोका जाता कि तुम बलात्कार न करो?!”

जिस दिन ऐसा होने लगेगा , उस दिन से ही हम सही मायने में अपने को 'सभ्य' कहलाने के हकदार होंगे।

आभार!


...

Anonymous said...

@ Kushwaha
"aurat aurat ki dushman hoti hai"

More men kill other men. Be it property fued in the extended family, road rage, religious offence or football match. Then why don't we say:

Men are the worst enemy of men??

Going back to women, if you keep them at home just cooking and cleaning and tell them their life has meaning only if it is attached to a man through marriage what do you think they'll do for entertainment (bug each other) and saving the scarce resource call male affection. Women are awarded by patriarchy to hurt other women and forward the male cause.

Mothers conspiring in honor killings of daughters are not doing it for their personal agrandizement but for saving the honor of so called family where her own survival is dependent on following male rules.

Sarvesh is my personal hero. I met her in 2002. She is a survivor and she inspired me to walk out tall.

What she said in the interview is what happens in the women hostels across the country. Women are locked in at certain hour in the name of their protection and men still go around women's hostel and peen in.

Peace,

Desi Girl

रेखा श्रीवास्तव said...

ghar se nikalana bahut chhoti baat hai isase se bade maanavadhikaron ke liye nari jholi phailae khadi hai kaun de raha hai? ye akhabaron aur likhane valon ka vishay to jaroor hai lekin ???????????

Himanshu Mohan said...

बहुत सी बातें कहने-सुनने में बहुत अच्छी लगती हैं।
ये भी लगी।
करने में बहुत सी अड़चनें हैं। कोई-न-कोई कोशिश में लगा होगा - अड़चनें हटाने की। कोई-न-कोई छापेगा अपने ब्लॉग पर, अख़बार में - रिसाले में या टीवी पर बताएगा - जब अड़चनें हट जाएँगी।
तब का इन्तज़ार करते हैं।
बहुत ज़रूरी और काम हैं, और थकान लग रही है अभी…

Chinmay said...

मानवाधिकार तो है लेकिन नाइट शिफ्ट करना अपने आप में एक बड़ा सिरदर्द है

Anonymous said...

मैंने इस विषय पर www.mediasaathi.com पर शालिनी जोशी की एक कहानी स्याह-सफ़ेद पढ़ी... दिल को छूने वाली कहानी...

Anonymous said...

मैंने इस विषय पर www.mediasaathi.com पर शालिनी जोशी की एक कहानी स्याह-सफ़ेद पढ़ी... दिल को छूने वाली कहानी...

Anonymous said...

मैंने इस विषय पर पर शालिनी जोशी की एक कहानी स्याह-सफ़ेद पढ़ी... दिल को छूने वाली कहानी...

Anonymous said...

मैंने इस विषय परपर शालिनी जोशी की एक कहानी स्याह-सफ़ेद पढ़ी... दिल को छूने वाली कहानी...

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