Wednesday, April 27, 2011

बदलाव की बयार

बिड़ला विद्या निकेतन की शिक्षिकाएं प्रसन्न हैं। 26 अप्रैल का दिन उन्हें हमेशा याद रहेगा। स्कूल के बच्चों को भी वह दिन खूब रोचक लगा। बच्चों के शब्दों में- उस दिन तो ऐसा लग रहा था जैसे सभी टीचर्स किसी विरोध जुलूस में शामिल होने आई हैं। एक भी टीचर साड़ी में नहीं आई थीं, जैसे सबमें कोई कॉम्पिटीशन हो। पहली बार देखा कि टीचर्स सलवार-सूट पहन कर आई थीं।


नहीं, ज्यादा पहेलियां बुझाने का मन नहीं है। दरअसल 26 अप्रैल 2011 के इस ऐतिहासिक दिन से वहां की शिक्षिकाओं को अब साड़ी के अलावा सलवार सूट और चूड़ीदार पजामा-सूट पहनने की भी छूट मिल गई है। बच्चों ने बताया कि मैम लोग कॉमन रूम में भी इसी बारे में चर्चा करती रहीं और खूब प्रसन्न दिखीं। एक-दूसरे के शानदार सूटों के कट और टेक्सचर की मीमांसा करती रहीं। लगा कि जैसे उन्हें कोई बड़ा तोहफा मिल गया हो। इस दिन से पहले वहां सभी महिला टीचर्स को सिर्फ और सिर्फ साड़ियां ही पहनने की पाबंदी थी, चाहे जो मौसम हो, चाहे जो दिन हो। इस बदलाव का कारण वहां के नए प्रिंसिपल डेसमंड डेमोंटे हैं। बधाई सभी टीचर्स को।

7 comments:

अनूप शुक्ल said...

वाह! बधाई!
नये प्रिंसिपल बहुत समझदार हैं!

kavita verma said...

naye principal ko badhai ..aur sabhi teachers ko sath hi yah bhi ki sabhi teachers naye paridhanon me bhi teachers ki garima banaye rakhengi taki ye parampara chalti rahe.

आर. अनुराधा said...

कासे कहूंजी, फिर वही विचार आप पर भी हावी लगता है कि परिधान (साड़ी) से गरिमा बढ़ती है। और यह भी कि साड़ी से सलवार-सूट पहनने से गरिमा कम हो जाती है या होने लगती है, जिसे संभालने की नसीहत आप देना चाहती हैं। कपड़े बदलने से आदमी की सोच बदल जाती है क्या? किसी मनोवैज्ञानिक से इस पर कोई विचार मिले तो मज़ा आए। वैसे, इस टिप्पणी के आधार पर तो पूरे पंजाब की महिलाएं इक्ट्ठी होकर खुद की गरिमा पर शक के खिलाफ मोर्चे पर आ जाएंगी!

kavita verma said...

anuradhaji mere kahne ka matlab ye nahi hai ki salvar kameez pahanane se garima ghatati hai,lekin aaj kal salvar kameez ke nam se jo figure hugging laggings bahut chhote kurte aur bahut deep cut vale kurte pahane jate hai unhe dekh kar to khud se sharm aa jati hai..abhi sirf aadhe ghante pahale motorcycle par ek mahila ko jate dekha jiske kurte ka side deep cur aur usme se jhante uske antervstra ke print...ab aur kya kahun..ham khud isni karno se choodidar par 'ban'jhel chuke hai.vastra koi bure nahi hai par fashion ke nam par unka jo kayakalp ho jata hai use dekh kar khud striyon ki aankhe jhuk jati hai. yahi bat sari par bhi lagoo hoti hai.

आर. अनुराधा said...

मैं ये सवाल करना चाहती हूं कि क्या साड़ी हमेशा और सलवार कुर्ते, चूड़ीदार पजामा कुर्ते से ज्यादा 'मर्यादापूर्ण' होती है? मैं असहमत हूं। बल्कि वह ज्यादा फिगर हगिंग और बदन उघाड़ू और पुरुषों को 'पसंद'... आदि-इत्यादि होती है जी, उसे आप चाहे कितनी भी शालीनता से पहने। और मुद्दा फिर वहीं आ पहुंचा कि सिर्फ साड़ी या कोई और परिधान पहनने या न पहनने से स्त्री के 'फैशनेबल' आदि होने का कोई संबंध नहीं है जी। साड़ी असुविधाजनक और ज्यादा सार-संभाल, वक्त मांगने वाली होती है और छह मीटर कपड़े (ब्लाउज सहित) और दो-तीन परतों के बाद भी अपना काम पूरा नहीं करती, लेकिन परपज़ पूरा करती है!

kavita verma said...

anuradhaji mein na yaha sari ki pairavi kar rahi hu na salvar kameez ki khilafat.paridhan chahe koi bhi ho sari salvar kameez ya langa chunari.sab apne aap me sampoorn paridhan hai.ek bar kisi film nirmata ne meena kumariji se kaha tha kisi seen ke liye-ki jab aap jhuke to aapka pallu neeche girne de.meena kumariji ka javab tha ki bhartiya nari jab bhi jhukti hai uska pallu kabhi nahi girta vah use pahle sambhalti hai.aur aisa nahi hai ki sari apne purpose me fir nahi hoti ha ye alag bat hai ki use pahanane ka 'purpose'kya hai vo alag alag logo ka alag ho sakta hai .fir rahi bat jyada ya kam sar sambhal ki to vo to aadat ki bat hai.majdoor striyan vahi sari pahan kar sara din kam kar leti hai aur kai sukumariyan suit me bhi ashaj rahti hai vo to apne aas pas dekhane ki aur khas kar us mahila ko dekhne te turant bad aapki post padhane me aa gayee isliye bas ek salah de dali ye soch kar ki jo swatantrata shikshikaon ko mili hai vo hamesha bani rahe.baki mera na salwar kameez se koi bair hai na aapke khayalon se.mere khyal se mein apni bat rakh payee hu isse jyada bat ko khinchna mere swabhav me nahi hai.baki to har vyakti apni pasand se rahne ke liye swatantra hai.

आर. अनुराधा said...

सहमत।

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