Tuesday, May 10, 2011

“परिवार की इज्जत के नाम पर हत्या जघन्यतम है, मृत्युदंड के लायक”

सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई को एक मामले में ये फैसला दिया है कि तथाकथित परिवार के सम्मान के लिए की जाने वाली हत्याओं को जघन्यतम माना जाए और इसके लिए अपराधियों को मृत्यु दंड दिया जाए। इस अमानवीय और सामंती प्रथा को बंद करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालयों और दूसरे न्यायालयों को ये निर्देश दिए ताकि ऐसा करने वाले के सामने यह विचार रहे कि फांसी का फंदा उसके इंतजार में है। किसी भी कारण से हो, उनकी राय में यह जघन्यतम अपराध है।

यह रवायत हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान में आम है। कोई महिला अपनी इच्छा से किसी ऐसे व्यक्ति के साथ रहती है, विवाह करती है या प्यार करती है, जिसे वह समुदाय मंजूर नहीं करता तो परिवार के अन्य सदस्यों के लिए यह समुदाय-समाज और खानदान की इज्जत पर बट्टा लगने वाला काम हो जाता है और इसके लिए वे कानून हाथ में लेने में भी नहीं हिचकते। इज्जत उन्हें अपनी औरतों की जान से ज्यादा कीमती लगती है। न्यायाधीश महोदय ने कहा कि ऐसे हालात में कोई ज्यादा-से ज्यादा उस लड़की का सामाजिक बहिष्कार करे, पर कानून हाथ में लेना, हिंसा करना अस्वीकार्य है।

कल की सुनवाई में एक मामले में कोर्ट ने अपराधियों की, मृत्युदंड की सजा को आजीवन कारावास में बदलने की अपील को एकदम नामंजूर कर दिया।

बहुत अच्छा किया। गलत है, पर डर ही कई समस्याओं का समाधान है।

6 comments:

Pratibha Katiyar said...

वाकई, डर ही कई समस्याओं का समाधान है...

kavita verma said...

sach hai bhay binu hoy na preeti...swagat hai is faisale ka...

राजन said...

बहुत अच्छा फैसला.

kushwaha said...

yathart yahi hai

Anonymous said...

sahi nirnay!

Unknown said...

हत्या किसी कारण से हो, मानवता और ईश्वर के प्रति अपराध है. अदालत ने सही निर्णय दिया है.

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