Saturday, July 30, 2011

For a change...

Let us talk of  hina, mehndi , sawan , barkha, jhule and teej ......


रुकी रुकी सी बारिशों के बोझ से दबी दबी

 झुके झुके से बादलों से -
धरती की प्यास बुझी........

1 comment:

SAJAN.AAWARA said...

bahut khub..
jai hind jai bharat

अनुप्रिया के रेखांकन

स्त्री को सिर्फ बाहर ही नहीं अपने भीतर भी लड़ना पड़ता है- अनुप्रिया के रेखांकन

स्त्री-विमर्श के तमाम सवालों को समेटने की कोशिश में लगे अनुप्रिया के रेखांकन इन दिनों सबसे विशिष्ट हैं। अपने कहन और असर में वे कई तरह से ...