Monday, December 12, 2011

औरत की दुनिया कितनी बड़ी है

टाई
बेल्ट
रुमाल
मोजे
जूतों की चमक में बाल संवार लो

टिफिन बॉक्स
नाश्ता
पानी
फल
ग्रोइंग बॉय, स्मार्ट बॉय

बस स्टॉप
दुआ-सलाम
टाटा बाय-बाय
नसीहतें
ओह, नई कॉपी? पैसे रख लो

चाय
चीनी
नमक
सर्फ
सब अपनी-अपनी जगह सही

ज़ीरा
सब्जी
तड़का
छोंक
पति की झिड़की सास की चुप्पी

चाबियां
चिल्लर
उपवास
प्यास
भारी पांवों से बस की सवारी

रोटी-रोल
फाइल
सेब
कंप्यूटर
यू गॉट टु वर्क आउट!

एंथू
इंक्रिमेंट
एफीशिएंसी
एप्रीसिएशन
प्लस-माइनस-प्लस-माइनस

मेहमान
महफिल
सजावट
बनावट
डल-सी क्यों हो आर्म कैंडी?

होमवर्क
ड्रेस
बिस्तर
देह
सूरज का आतंक इतना क्यों है?

10 comments:

mridula pradhan said...

bhawon se bhari hui.....bahut sunder kavita.

Rashmi Swaroop said...

aur saari ki saari duniya aapne samet li is kavit me.. jaise naino me aasmaan samaya hota hai.. :)

Rashmi Swaroop said...

kavita*

आशा बिष्ट said...

saty ko dharan kiye shabd rachna..

vandan gupta said...

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
अवगत कराइयेगा ।

http://tetalaa.blogspot.com/

Nidhi said...

बहुत खूब.....

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

पति की झिड़की सास की चुप्पी

चाबियां
चिल्लर
उपवास
प्यास
भारी पांवों से बस की सवारी..

बहुत सुन्दर नारी के व्यथा कथा को बहुत अच्छी तरह से देखा आप ने और उसका वर्णन हो सका ..काश लोग इन्ही नजरों से देखें और सम्हालें उसे ...
जय श्री राधे
भ्रमर ५

Asha Joglekar said...

आह, एक दोहरी जिम्मेवारी सम्हालती औरत की पीडा बखूबी शब्दों में उतारी है आपने ।

सुजाता said...

बढिया ! सूरज का आतंक शहराती कामकाजी जीवन की नियति है....स्त्री के लिए हर पल संघर्ष का पल है ।

Incognito Thoughtless said...

Aaj ke daur ki aurat ka ekdam sachcha khaka....Badhai....

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