Friday, November 14, 2014

जेंडर सेंसिटाइज़ेशन का विचित्र तरीका


सेन्सिटाइज़ेशन के लिए (?) चीन में एक रिअलिटी शो ने नायाब तरीका निकाला । वहाँ एक अस्पताल पुरुषों को उनकी पत्नी के साथ साथ प्रसव पीड़ा का अनुभव करवा रहा है एक यंत्र की सहायता से।रियलिटी शो के साथ शुरु हुए इस 'पेन कैम्प' को कुछ पुरुषों ने ज्वाइन भी किया है और अधिकतर पति दर्द को कुछ मिनट ही बरदाश्त करके भाग खड़े हुए.

  क्या कमेंट करूँ ? यह तरीका खाप-सोच वाले मर्दों को सम्वेदनशील बनाने के लिए भले ही आजमाया जाए ...पर अपने आस पास के पुरुषों को तो मैं पत्नी की इस सृजनात्मक वेदना में साथ देख रहीहूँ । केवल पत्नी को लेबर पेन में देख लेना भर पुरुष के लिए पर्याप्त कष्टदायी होता होगा मुझे लगता है।सोचती हूँ बलातकारी को भी बलत्कृत होने का अनुभव कराने की कोई मशीन ईजाद होनी चाहिए। मशीन जाने दीजिए , अपराधियों को कम से कम गधे पर नंगा कर गाँव भर घुमाने के अनुभव के लिए तो कुछ विशेष संसाधन नहीं चाहिए। देखना यह है कि अपन किस तरह की सोसायटी बना रहे हैं ...जहाँ अतिरेक हैं, बदले हैं,कुण्ठाएँ हैं और गर्त में गिरने के कई मुहाने खुल गए हैं ।

4 comments:

SM said...

interesting read

Asha Joglekar said...

सच कहा ऐसा ही होना चाहिये।

Rishabh Shukla said...

आपका ब्लॉग मुझे बहुत अच्छा लगा, और यहाँ आकर मुझे एक अच्छे ब्लॉग को फॉलो करने का अवसर मिला. मैं भी ब्लॉग लिखता हूँ, और हमेशा अच्छा लिखने की कोशिस करता हूँ. कृपया मेरे ब्लॉग पर भी आये और मेरा मार्गदर्शन करें.

http://hindikavitamanch.blogspot.in/
http://kahaniyadilse.blogspot.in/

editor.vineet said...

सुजाता जी बात आपकी सोलह आने सही है। और इसके लिए किसी मशीन की जरूरत नहीं, ऐसे कई संसाधन उपलब्ध हैं समाज में जिनसे बलात्कारी के साथ अप्राकृतिक व्यवहार उसे पीड़ा और शर्म के चरम तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त है। अप्राकृतिक इसलिए कि बलात्कार भी प्राकृतिक प्रवृत्ति नहीं है। प्रणय के साथ बना संबंध ही प्राकृतिक है शेष सब अप्राकृतिक। जिस तरह हत्या के लिए फांसी का प्रावधान है, बलात्कार के लिए भी उसी के अनुरूप सजा खोजनी होगी। वह न्यायालय दे या फिर समाज, क्या फर्क पड़ता है।

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