Sunday, October 9, 2016

सम्वादों के आइने में लघु जीवन के बड़े सच


रिचा साकल्ले
वरिष्ठ टीवी पत्रकार
कविताएँ लेख व समीक्षाएँ प्रकाशित
फिलहाल टीवी टुडे आजतक से सम्बद्ध 

रिचा साकल्ले ने चोखेरबाली के लिए ये सम्वाद कथाएँ लिख कर भेजी हैं। ये हमारे आस-पास ही की कुछ कहानियों के सम्वाद हैं। चोखेरबाली पर हमने हमेशा प्रयास किया है कि सीधे थियरी न लिख कर सादी भाषा में अपने और अपने आस-पास के अनुभवोंं को इस तरह साझा करें  कि स्त्री विमर्श की थियरी उनसे इमर्ज होती हो। 


लघु संवाद कथा  1

दो बच्चे थे एक एक साल की उम्र के अंतर के कि अचानक तीसरा भी पेट में आ गया। ख़बर मिलते ही क्रोधित पति ने पत्नी से कहा-बेवक़ूफ़ औरत क्या कर दिया तूनेकुछ अक़्ल है या नहीं? ज़िंदगी की कोई समझ भी है?
पत्नीक्या मैं अकेले दोषी हूंतुममे इतनी समझ है तो तुम्ही समझा देते।
पति-(तड़ाक) ख़ूब बोल रही है तू ,अब जो करना हो कर,नहीं चाहिए मुझे तेरी ये औलाद
पत्नी चुप।
पति- मुँह पर पट्टी बाँध ली है क्या ****द
पत्नी- गाली क्यों दे रहे हो? बोलती हूं तो कहते हो कि ख़ूब बोल रही है। जो हो गया उसमें तो दोनों की ज़िम्मेदारी है।
पति- ज़्यादा भाषण मत दे और जाकर गिरा दे बच्चा
पत्नी- अब अकेले नहीं जाऊँगी। दोनों बच्चों के टाइम भी अकेले अस्पताल के चक्कर लगाती रही। अब साथ चलो तुम भी।
पति-***ड़ी की, मेरे पास टाइम नहीं है इन फ़ालतू कामों के लिए। जा अपने बाप के साथ जा और अबॉर्शन करा के ही अपनी शक्ल दिखाना।
पत्नी ने पिता के साथ जाकर अबॉर्शन कराया और पति के साथ शादी के 5 साल पूरे कर लिए हैं एक अंदरूनी चुप्पी के साथ

लघु संवाद कथा  2

पहला सीन
20 वर्षीय मेड बोली- दीदी आपको एक बात बतानी थी पर किसी को बोलना मत, मेरी मम्मी को भी नहीं
दीदी-हाँ बोल नहीं बोलूँगी किसी को
मेड-खाओ मेरी क़सम
दीदी-ठीक है तेरी क़सम
मेड- मेरा एक ब्वॉय फ़्रेंड है, मैं घर में झूठ बोलकर उससे छिप-छिप कर मिलने जाती हूँ, हम घूमने जाते हैं उसने मुझे गिफ़्ट भी दिए हैं। दीदी मैं उससे बहुत प्यार करती हूँ और शादी भी करना चाहती हूँ।
दीदी- कर लेना क्या दिक़्क़त है
मेड- मेरे पापा हैं ना दिक़्क़त वो मेरी शादी उससे नहीं करेंगे
दीदी- अच्छे से बता दे प्यार से थोड़ा
मेड-अरे अगर मैंने बता दिया तो मेरी हड्डी पसली तोड़ देंगे
दीदी- ऐसा कर पहले मम्मी को बता वो पापा से बात कर लेंगी
मेड-अरे नहीं बाबा वो तो मम्मी और मेरे को पीट पीट कर दोनों को घर से बाहर निकाल देंगे
दीदी- अरे वो मारते भी हैं क्या दोनों को
मेड- और नहीं तो क्या ज़रा सा घर देर से पहुँचो तो बस गाली ही गाली और जूता उठाकर मारते हैं।दीदी कुछ नहीं मैंने तो बस सोच लिया है अगर मेरी शादी उससे नहीं हुई तो फाँसी से लटक जाऊँगी।
दूसरा सीन
डॉक्टर बाप 20 साल की बेटी से-मैंने तुमको बता दिया है शाम को 6 बजे से पहले तुम मुझे घर के अंदर दिखनी चाहिए और अगर ऐसा नहीं हुआ तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा
थोड़ी देर बाद बेटी का मोबाइल घनघनाया बात होने के बाद बाप- किसका फ़ोन था
बेटी- एक फ़्रेंड का
बाप- ये क्यों रोज़ फ़ोन करता है, तुम इससे इतना हँस हँसकर क्यों बात करती हो
बेटी-दोस्त है मेरा कई तरह की बातें होती हैं डैडी अब सब बातें आपको बताऊँ क्या
बाप- ये क्या उस लड़के ने सिखाया है बाप से ऐसे बात करना।
बाप ने मोबाइल फेंका, बेटी को चांटा मारा और उसकी माँ से कहा-बिगड़ रही है तेरी बेटी, समझा दो इसको वरना दोनों को घर में ही बंद कर दूँगा।
बाप के जाने के बाद बेटी माँ से- मम्मी ये पापा के व्यवहार से में तंग आ गई हूँ देख लेना एक दिन सुसाइड कर लूँगी।

लघु संवाद कथा  3
पति (काम से थका हुआ) काम से घर साथ आई पत्नी से- मैडम फटाफट पानी दे दो और अदरक वाली चाय बना दो
पत्नी- रूको, थोड़ा आराम कर लूँ फिर बनाती हूं
पति-तुम समझती ही नहीं हो। थका हुआ हूँ। तुमको अपनी पड़ी है
पत्नी- तो थककर तो मैं भी आई हूँ
पति-ये तो पहले सोचना था, काम का शौक़ तुमको है। घर में रहो और सेवा करो
पत्नी- अरे तो घर में रहकर काम करने वाली औरतें नहीं थकतीं क्या? घर में रहकर भी थक जाऊँगी तो तब भी तुमको बनानी पड़ सकती है चाय।
पति- ज़ुबान मत चलाओ नहीं तो धर दूँगा यहीं. भूल जाओगी ज़ुबान चलाना
पत्नी ने चाय बनाकर पिला दी।
अगले दिन,
थकी हुई पत्नी ने काम से घर साथ लौटे पति से कहा- भई कल मैंने पिलाई थी चाय। आज तो तुम पिला दो
पति-तुम्हारी माँ को तुम्हारे पिता ने कभी चाय पिलाई है जो मैं पिलाऊँ । जाओ चुपचाप अपनाकाम करो।
पत्नी ने फिर चाय पिला दी।

लघु संवाद कथा  4 
पहला सीन
उसके पति और ससुरालवालों ने पति की शारीरिक बीमारी छिपाकर उसके साथ शादी की, शादी के बाद जब उसे पता चला तो पूरे 6 महीने वो ठीक से सो नहीं पाई, हिम्मत बटोरी, घर ठीक से चले इसलिए नौकरी ज्वाइन की और इस धोखे को अनदेखा कर तन मन धन से पति की सेवा में जुट गई। घर बाहर पति बच्चे सबको संभालती दोहरे बोझ से दबी पत्नी एक दिन बोली- यार बहुत हो चुकी घर-बाहर की ज़िम्मेदारी।अब थक चुकी हूँ। आराम करना चाहती हूँ ।
पति-तुम्हारा दिमाग़ तो ठीक है ना? नौकरी छोड़ने की बात आइंदा सोचना भी मत। तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ये सोचने की?
पत्नी-मैं भी तो इंसान हूँ। आख़िर कब तक झेलती रहूँगी ये सब?
पति- तुम जो कर रही हो वो कोई अनोखा नहीं है। तुम्हारी जगह कोई भी होती वो यही करती। ये ड्यूटी है तुम्हारी।
थोड़ा श्रेय, सहानुभूति, प्रेम भरी बात चाह रही पत्नी को धोखेबाज़ पति ने अहम और कर्तव्य का जूता जड़ दिया था।
दूसरा सीन                                                             
अपनी लड़की की शारीरिक बीमारी छिपाकर पिता ने उसकी शादी कर दी।
बात खुलने पर पति भड़क उठा- ये धोखा मुझसे बर्दाश्त नहीं। तुम जहाँ से आई हो, वहीं वापस चली जाओ।
पत्नी- देखो, मैं माफ़ी चाहती हूँ लेकिन ये मेरे पिता ने किया मैंने नहीं।आपको जो दुख पहुँचा वो मैं समझती हूँ। लेकिन मैं आपके और आपके घरवालों को शिकायत का मौक़ा नहीं दूंगी। मैं इस बीमारी के बावजूद सब अच्छे से संभाल लूँगी।
पति- अरे तेरी बीमारी का ख़र्चा कौन उठाएगा? अपने बाप से पैसे लेकर आती फिर इलाज के।
पत्नी- प्लीज़ माफ़ कर दीजिए।मैं नौकरी कर लूँगी। मुझे एक स्कूल में नौकरी मिलने वाली है।
पति- मुझे तेरी शक्ल से नफ़रत हो रही है। चल निकल यहाँ से।
पति और ससुराल वालों ने लड़की को घर से निकाल दिया। पति उसे तलाक़ भी नहीं दे रहा।

4 comments:

SM said...

all storied show the mirror of society
well written

SM said...

all short stories show the mirror of society ,the truth of society
well written

Dev said...

सीधे थियरी न लिख कर सादी भाषा में अपने और अपने आस-पास के अनुभवोंं को इस तरह साझा करें कि स्त्री विमर्श की थियरी उनसे इमर्ज होती हो...bahut sahi bat kaha aapne aur aise hi koi anubhav kaha ja sakta hai

Dev Palmistry

Unknown said...

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