Tuesday, October 29, 2019

स्त्री को सिर्फ बाहर ही नहीं अपने भीतर भी लड़ना पड़ता है- अनुप्रिया के रेखांकन


स्त्री-विमर्श के तमाम सवालों को समेटने की कोशिश में लगे अनुप्रिया के रेखांकन इन दिनों सबसे विशिष्ट हैं। अपने कहन और असर में वे कई तरह से पुनर्पाठ और नवोन्मेष की तरह हैं। अनुप्रिया इन दिनों जिस तरह डूब कर अपना काम कर रही हैं मानो वे उसी में जी रही हैं। उनके रेखांकन कविता की तरह अनंत अर्थ छवियाँ समेटे हैं। इनकी विशेषता है कि उनमें आधुनिक और परम्परागत जीवन के बीच स्त्री अस्मिता की छ्टपटाहट, उसके व्यक्तित्व की तमाम परतें, उलझने, उम्मीद और सपने अभिव्यक्ति पाते हैं। उसका अकेलापन है, एकांत है, बहनापा है। उनके रेखांकनों से महज़ गुज़र जाना सम्भव नहीं है, हमें ठहरना होता है और वे खुद किन्हीं प्रतीकों, किन्हीं कोड्स के साथ हमारे भीतर ठहर जाते हैं। कभी हम बुद्ध हो जाती और आधे हिस्से में तमाम कामनाएँ सजाती स्त्री का चेहरा घण्टों देखते रह सकते हैं, कभी देखते ही कोई भाव उतर आता है हृदय में, कभी बस आह! निकलती है या अचानक किसी रेखांकन में एक स्त्री की कुर्ती में लगा सेफ़्टी पिन दर्ज हो जाता है मन में, याद आ जाती है अनामिका की कविता या अपनी ही किसी मौसी, माँ का चेहरा। इनका पूरा शिल्प समझने के लिए स्त्री के साझा अनुभवों और संघर्षों तक जाना होता है और लोक-कला में बसी स्त्री, उसके भित्ति-चित्र, कलाकारी के ज़रिए एक कहानी कहने का कौशल समझना होगा। खुद अनुप्रिया के शब्दों में एक स्त्री को सिर्फ बाहर ही नहीं अपने भीतर भी लड़ना पड़ता है अपने लिए अपने आप से ही।यह लड़ाई कब तक चलेगी नहीं जानती।होगी थकान ,कभी टूट भी जाएं बिखरने की हद तक ,लेकिन रुकना नहीं है ।चलते जाना है ।एक दूसरे का हाथ थामे ,उम्मीदों के बीज अपनी खुरदरी हथेली में लिए जलते जाना है  उस मद्धम रोशनी के लिए जो हमारे भीतर उग आयी है ।  

आज चोखेरबाली पर अनुप्रिया के इन दस रेखांकनों के साथ हम इसे एक स्थायी स्तम्भ की तरह शुरु करने जा रहे हैं। अनुप्रिया के रेखांकनों का यह चोखेरेबाली कोना इस पेज पर दर्ज रहेगा और नियमित अपडेट होता रहेगा।  - सुजाता 


अनुप्रिया 


5 comments:

manoj chhabra said...

बहुत बढ़िया काम है अनुप्रिया जी का, सुजाता।

Rekha suthar said...

कितने रिलायबल है ये रेखांकन.. इन्हें देख कोई न कोई पुरानी स्मृति एकाएक सजीव हो रही मन मे.. दूसरा वाला रेखांकन सबसे बेमिसाल है ❣️

रचना प्रवेश said...

अनुप्रिया के रेखांकन नजर को बांध लेते हैं ,सोच के दायरों को अपरिमित कर देते हैं ।हर नया रेखांकन कहता है मै पहलेवाले से बेस्ट हूं ।और यह सच भी हैं ।
शुभामनाएं आप दोनों को

रचना प्रवेश said...
This comment has been removed by the author.
Manisha shree said...

बहुत सुंदर

अनुप्रिया के रेखांकन

स्त्री को सिर्फ बाहर ही नहीं अपने भीतर भी लड़ना पड़ता है- अनुप्रिया के रेखांकन

स्त्री-विमर्श के तमाम सवालों को समेटने की कोशिश में लगे अनुप्रिया के रेखांकन इन दिनों सबसे विशिष्ट हैं। अपने कहन और असर में वे कई तरह से ...